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Wednesday, March 4, 2026

पवन - झकोरे फागुनी (कविता)

 #holipoem #romantic 











पवन - झकोरे फागुनी 

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देह तुम्हारी कंचन, होंठ भयो रतनार।

नैन तुम्हारे तीखे, जैसे चुभे कटार।।


प्रीत आँचल में भरकर, रख लो अपने पास।

गर न आये पाती तो, होना नहीं उदास।।


होली में भरता जाए, चटख फागुनी रंग।

सराबोर मैं कर दूं, तेरे अंग - प्रत्यङ्ग ।।


लाल चुनरी भींगेगी, कसमस करते अंग।

भर दूँ देह में उष्मा, सांस निभाए संग।।


 फूल - देह ज्यों लचके, बिरवा की हो पात।

मेरी बगिया में आए, जैसे नया प्रभात।।


रास - रंग तृप्त नारी, यौवन भार अपार।

चढ़ चली देह-नाव पर, जाती है उस पार।।


पवन - झकोरे फागुनी, नस - नस बसें अनंग ।

पिऊ - पिऊ पुकारती, कोकिल बैन तरंग ।।







पवन - झकोरे फागुनी (कविता)

 #holipoem #romantic  पवन - झकोरे फागुनी   -------------------------- देह तुम्हारी कंचन, होंठ भयो रतनार। नैन तुम्हारे तीखे, जैसे चुभे कटार।।...