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Friday, April 17, 2026

'गुनाहों का देवता' उपन्यास को एक बार फिर पढ़ना (लेख )

 #bnmrachnaworld 



गुनाहो का देवता’ को एक बार फिर पढ़ना 

डॉ धर्मवीर भारती की लिखी और हर वर्ग के पाठकों द्वारा सबसे अधिक पढ़ी गयी कृतियों में से एक "गुनाहों का देवता" मैंने एक बार फिर पढ़ी. पढ़ी हुई किताब की सुनी - सुनायी कहानी को एक बार फिर पढ़ने का क्या मायने होता है या हो सकता है? आज से साठ वर्ष पूर्व या कहें कि टी वी के दौर के पूर्व इसे पढ़ते हुए, इसके प्रसंगों, पात्रों के बीच घटती घटनाओं और 'इसके बाद क्या' की स्थिति को जानने के लिए ही पढ़ा होगा. आज जब टी वी, मोबाइल, व्हाट्सप्प, इंस्टा, फेसबुक, विकिपीडिया सब कुछ हमारे सामने है, फिर क्यों पढ़ने का मन किया या करता है? 

मित्रों, यह 'मन किया या किया करता है', इसी में इसका उत्तर खोजने का प्रयास करता हूँ :

यह उपन्यास 1949 में पहली बार प्रकाशित हुआ था. अभी तक इसके सौ से अधिक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं. अभी भी यह उतने ही चाव से पढ़ा जाता हैं. आज के आधुनिक दौर में जब कई ब्रेक - अप और प्यार में गिरने - गिराने के बाद सच्चा प्यार खोजने का चलन चल पड़ा है, क्यों चंदर और सुधा के प्रेम के आदर्श को प्रेमीजन आज भी खोजने का प्रयास करते हैं? 

चंदर में दोहरा व्यक्तित्व है, ऐसा लग सकता है. जब वह सुधा के सानिध्य में होता है, तो उसके अंदर का देवता जगा हुआ होता है. सुधा की आत्मीयता, निकटता और समर्पण भी उसे वहाँ तक बढ़ने से रोकता है, जहाँ तक वह पम्मी के प्रयास मात्र से पहुँच जाता है. एक ही व्यक्तित्व में देवता और दानव दोनों निवास करते हैं. सम्बन्धों के रेशे इतने बारीक़ होते हैं कि कब देवता वाला रेशा मजबूत हो जाय और कब टूट जाय, पता ही नहीं चलता है. चन्दर का सुधा के प्रति निःस्वार्थ और आदर्शवादी प्रेम सामाजिक मान्यताओं और परंपराओ की मर्यादा को अक्षुण रखते हुए, सुधा की डोली को सजाने - संवारने और विदा करने में परिणति पाते हुए, अपूर्ण ही रह जाता है. 

अपूर्ण या अर्धपूर्ण प्रेम ही सफल प्रेम कहानी बनती है, यह उपन्यास उसे साबित करते - करते रह जाता है, क्योंकि अपूर्णता के खालीपन को पूरा करने के लिए उस व्यक्ति का दानव जग जाता है या जगा दिया जाता है. उसका पूर्णता की खोज में पम्मी के सानिध्य में आना और उसके साथ अपने देवत्व को पृष्ठभूमि में धकेल देहसंसर्ग द्वारा संसार के सारे प्रेम की परिभाषा ढूढ़ने का प्रयास, सुधा का विवाह दूसरे से हो जाने की प्रतिक्रिया स्वरुप था या सहज, इस मनोवैज्ञानिता का चित्रण डॉ धर्म वीर भारती ही कर सकते थे, ऐसा लगता है. 

उन्होंने पात्रों के मनोवैज्ञानिक पहलू और उनकी भावनात्मक उथल-पुथल को बेहद संवेदनशील तरीके से चित्रित किया है।

प्रेमचंद के सामाजिक कहानियों और उपन्यासों के दौर के बाद, प्रेम की नई परिभाषा का दौर समसामयिक साहित्य में आरम्भ करने का श्रेय डॉ धर्मवीर भारती को ही जाता है. 

कहानी सीधी सादी है. कहानी के तीन मुख्य पात्र हैं : चन्दर , सुधा और बिनती। पूरी कहानी मुख्यतः इन्ही पात्रों के इर्दगिर्द घूमती रहती है। चन्दर सुधा के पिता यानि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के प्रिय छात्रों में है और प्रोफेसर भी उसे पुत्र तुल्य मानते हैं। चन्दर का सुधा के यहाँ बिना किसी रोकटोक के आना-जाना, सुधा का उसके साथ बाल सुलभ व्यवहार चन्दर के लगाव को बढ़ा तो देता है, लेकिन वह सजग भी रहता है कि सुधा डॉ शुक्ला, जिनकी छत्र छाया ही उनका जीवन है, की वह बेटी है. धीरे-धीरे सुधा कब दिल दे बैठती है, यह दोनों को पता नहीं चलता। लेकिन यह कोई सामान्य प्रेम नहीं था। सुधा चन्दर से सम्मोहित नहीं है. वह चन्दर को देवता की तरह पूजती है, एक भक्त की तरह ही उसे सम्मान देती है।


चंदर सुधा से प्रेम तो करता है, लेकिन सुधा के पिता के उस पर किए गए अहसान और व्यक्तित्व पर हावी उसके आदर्श कुछ ऐसा ताना-बाना बुनते हैं कि वह चाहते हुए भी कभी अपने मन की बात सुधा से नहीं कह पाता। सुधा की नजरों में वह देवता बने रहना चाहता है और होता भी यही है। सुधा से उसका नाता वैसा ही है, जैसा एक देवता और भक्त का होता है। प्रेम को लेकर चंदर का द्वंद्व उपन्यास के ज्यादातर हिस्से में बना रहता है। नतीजा यह होता है कि सुधा की शादी कहीं और हो जाती है और अंत में उसे दुनिया छोड़कर जाना पड़ता है।


सुधा के विवाह के बाद आए उसके पत्र को पढ़ने के बाद चन्दर की स्थिति का वर्णन:

कभी - कभी रोते - रोते आदमी की उदासी थक जाती है और आदमी करवट बदलता है. ताकि हंसी की छाँह में कुछ विश्राम कर फिर वह आंसुओं की कड़ी धूप में चल सके.

भावनात्मक और गहरे प्रेम का ताना - बाना इस उपन्यास में इतनी बारीकी से बुना गया है कि इसमें कहीं कहीं अंतरंगता होते हुए भी अश्लीलता नहीं है, इसमें सिहारन तो है लेकिन उत्तेजना नहीं है. 

यही इस उपन्यास और उपन्यासकार को महान बनाता है.  


---ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र 





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