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परम स्नेही मित्रों,
आपको और आपके समस्त परिवार को होली की अनंत, असीम, अशेष शुभकामनाएँ!
होली में इस बार अलग रंग जमायें
होली में इसबार अलग रंग जमायें
होली को इसबार कुछ खास बनायें।
ऐसे रंग पोत लिए अपने चेहरों पर ,
हो गए जुदा उनसे जो हैं बसे अंदर।
अन्दर के रंगों में विश्वास जगायें।
होली को इस बार कुछ खास बनायें।
अफसाने गा चुके मुहब्बतों के
कसीदे सजा चुके उल्फतों के।
होली में प्रेम का पुख्ता अहसास जगायें।
होली को इस बार कुछ खास बनायें।
वो झोपड़ी जो है गली के मुहाने पर
कोई बेरंग सवाल है, जमाने पर।
इस होली वहां का सन्त्रास मिटाएं।
होली को इस बार कुछ खास बनायें।
गेंदे, गुलाब, जूही, चम्पा और चमेली
चमन में हैं रंगों का मेला मेरी सहेली।
चलो इस बार कुछ पलाश उगायें।
होली को इस बार कुछ खास बनायें।
वे बच्चे जो बीन रहे बचपन में कचरे,
उनको लौटा दें उनके सपने सुनहरे।
उनके उड़ान का एक आकाश बनायें।
होली को इस बार कुछ खास बनायें।
सीमा पर जो डटे हैं देश के प्रहरी
उनसे ही होली है हमारी रंगों भरी
उनके लिये सीने में आग धधकाएँ।
होली को इस बार कुछ खास बनायें।
सड़कों पर बैठ जाते हैं, भ्रम से जो ग्रस्त हैं,
सियासत में फंसकर जो झूठ में व्यस्त हैं।
उनके दिलों में सच का सुवास बसाएँ।
होली को इसबार कुछ खास बनायें।
सियासत में मिटे विवाद, राष्ट्र हो प्रथम,
आपस में प्रेम हो, नहीं हो कोई बेशरम।
दिलों में निष्कामता का उजास फैलाएं।
होली को इसबार कुछ खास बनाये।
©ब्रजेंद्रनाथ