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Tuesday, July 17, 2018

अमेरिका यात्रा 03-07-2018, रात्रि 10:00 बजे (पूर्व प्रथम दिन)

#BnmRachnaWorld
#americatourdiary
03-07-2018ं, रात्रि 10:00 बजे

हमलोग के उड़ान का समय रात्रि 1 बजकर 15 मिनट पर है। कैथे पैसिफिक के एक मध्यम क्षमता वाले यान से हमलोगों को हौन्ग कौंग जाना था। यह उड़ान करीब साढ़े चार घन्टे का है। मैं अपने लगेज़ के साथ दो दिन पहले ही कलकता चला आया था। साथ में पत्नी भी थी। कोलकाता में मेरा निवास निजाम पैलेस के सेन्ट्रल पी डब्लू ड़ी द्वारा बनाये गये एक्सेक्युटिव फ्लैट में रहा, जो मेरे साले जी को आयुध निर्मात्री बोर्ड के निदेशक मण्डल में होने के कारण मिला हुआ है। कोलकता से कुछ छोटी मोटी चीजों की अन्तिम खरीददारी भी हुयी, जो अमेरिका में मुश्किल से मिलती हैं।
आखिर 3 जुलाई का दिन भी आ गया। सारे खरीदे गये सामानों को विभिन्न ट्रॉली सुट केस में वितरित किया गया ताकि वजन की सीमा के अन्दर ही सूट केस का वजन हो। वजन की सीमा 23 किलो के दो सूट केस प्रति टिकट होती है। शाम को मैं वॉश रुम से फ्रेश हो कर आ गया। उड़ान के निर्धारित समय यानी 1 बजकर 15 मिनट से तीन घन्टे पहले यानि करीब 10 बजकर 15 मिनट (रात्रि) से चेक इन शुरु हो जाता है। निजाम पैलेस, भवानीपुर, कोलकता से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अन्तरराष्ट्रीय उड्डयन स्थल तक पहुंचने में करीब 1 घन्टा तो लग ही जाता है। शाम को हल्की बारिश भी शुरु हो गयी थी। मैं और मेरी पत्नी दोनों ने साढ़े आठ बजे रात्रि में दो रोटियाँ और थोड़ी सब्जी के साथ हल्का खाना खाया। खाने में रुचि और स्वाद तो उतना नहीं लगा। मन में कौतूहल, अनिश्चितिता भरा डर और उत्सुकता लिये हुये सारे लगेज के साथ लिफ्ट से धरातल पर उतरे, जहां कार इन्तजार कर रहा था। मेरी अन्तरार्ष्ट्रीय उड़ान की इतनी लम्बी पहली यात्रा थी। प्रिय रामकुमार जी (मेरे साले) और उनकी पत्नी हमें नीचे तक छोड़ने आये। चार ट्रॉली सूट केस जो हमारे पास थे, उनमें से तीन ही डिकी में आया। एक थोड़ा बड़ा वाला सूट केस आगे की सीट पर रखना पड़ा।
निजाम पैलेस से नौ बजकर दस मिनट पर निकलकर मा फ़्लाई ओवर से होते हुए, नजरुल इस्लाम एवेन्यू होते हुये, भी आई पी रोड पकड़कर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अन्तरराष्ट्रीय विमान तल पहुंचने में करीब एक घन्टे लग गये। वहाँ पहुंचकर हमने ड्राईवर की मदद से अपने लगेज निकाले। लगेज को ट्रॉली पर रखा और अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल के तरफ खुले इन्टरी गेट के तरफ बढ़े। वहां सिक्योरिटी पर्सनल पासपोर्ट देखकर ही लोगों को प्रवेश करने दे रहे थे। हमलोगों ने भी अपना पासपोर्ट दिखाया और लगेज सहित अन्दर हाल में प्रवेश कर गये।
हाल में एअरपोर्ट के मदद मित्रों से पूछने पर कैथे पेसिफिक की उड़ान के लिये बोर्डिंग पास और लगेज़ देने के लिये काउंटर H की तरफ इशारा किया गया। वहाँ काउंटर पर पूछा गया कि क्या मैने ऑन लाईन सीट बुक की थी? मेरे हां कहने पर प्रक्रिया सरल हो गयी। उन्होने अपना रिकॉर्ड चेक कर उसकी पुष्टि कर दी। 43 नम्बर कतार की B और C सीटें। C सीट Aisle यानि किनारे की और B यानी बीच वाली सीट थी।
हमारे लगेज़ का वजन किया गया। वह निर्धारित सीमा के अन्दर था। उसपर कम्प्युटर से निकले स्र्तीप को टैग किया। हमें गेट नम्बर 8 की ओर जाने को कहा गया। काउंटर पर की बाला ने मुस्कान के साथ हैप्पी जर्नी कहा। हमलोग सिक्योरिटी चेक की तरफ बढ़ गये। हैण्ड लगेज़ की वजन सीमा 7 किलो होती है। हां उसमें किसी तरह का कोई धातु का सामान, नुकीला कोई भी समान, कोई द्रव पदार्थ आदि नहीं होना चाहिये। इसका ध्यान रखना जरूरी है की ऐसी कोई चीज गलती से भी ना रहे। मेरा पुरुष काउंटर के तरफ और पत्नी का महिला काउंटर के तरफ हैण्ड लगेज़ चेक किया गया। उससे सकुशल गुजर जाने के बाद हमलोगों ने काउंटर नम्बर 8 के तरफ रुख किया।
उससमय तक रात्रि के करीब साढे ग्यारह बज चुके थे। हमलोग गेट नम्बर 8 के पास पहुंचकर इन्तजार में झपकियां लेने में मशगूल हो गये। 


1 comment:

Lalita Mishra said...

यात्रा का आगाज़ बहुत ही शुभ और सकारात्मक रहा। बधाई हो!

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