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Friday, August 24, 2018

अमेरिका डायरी, 18-07 और 19-07-2018, इरवाइन, यु एस ए, 15 वाँ, 16वाँ दिन (Day 15,16)

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18-07-2018, इर्वाईन, यु एस ए, 15वाँ दिन (Day 15)
आज का दिन दो तीन कारणों से खास हो गया।
पहला: आज मैं, पत्नी और लड़के चिन्मय के साथ पास की सड़क के किनारे से होते हुये थोडा दूर पश्चिम-उत्तर की ओर के मनोरम पार्क के तरफ निकल गये। पार्क में चारो ओर हरियाली ब्याप्त थी। इसका एक क्षेत्र पुनर्नवीनिकरण के लिये बंद किया हुआ था। दूसरी तरफ का जो हिस्सा खुला था, उस ओर हमलोग बढ़ चले। जल्बून्द छिड़काव यन्त्र (Sprinkler) द्वारा जल के छिडकाव से घास गीली थी। बिना बारिश के ही, मिट्टी से बारिश के बाद आती सोंधी खुशबू, जिसमें घास की खास महक भी घुली थी, चारो ओर फैल रही थी। सारा वातावरण एक नैसर्गिक आनन्द से भरा था। पाइन पेड़ों के बीच से आती सूर्य की रोशनी, ओक के पत्तों पर ठहर-ठहर जाती थी। उन्हीं के बीच से घास के गुदगुदी गलीचे पर खाली पाँव चला जाय, तो कैसा लग सकता है? इसकी कल्पना से ही मन मौज मे आकर उड़ानें भरने लगता है। सुबह की शुरुआत अगर इतनी आनन्दभरी हो, तो क्या कहा जा सकता है? दिन शुरु हो गया आनंद के विस्फोट के साथ!!!
वहाँ से लौटते हुए, एक पतले पुल से गुजरना हुआ। पुल पैदल चलने वालों और साइकिल चलने वालों के लिये है। पुल के नीचे से (7-7) लेन वाली सड़क पर कारें बेतहाशा दौड़ लगा रही थी। ऊपर स्वर्गिक आनन्द और नीचे कारों पर रफ्तार का मानव-सृजित आनन्द, दोनों का सम्मिलित रूप ही सभ्यता के विकास का तिलस्म है।
दूसरा: आज सुबह के नास्ते में दोसा का आनन्द लिया गया। यहाँ दोसा बनाने की सारी सामग्री स्टोर में उपलब्ध है। बंगलुरु जैसा तैयार बार्टर तो नहीं मिलता, उसे मिश्रित कर तैयार करना पड़ता है। बस घोलने से ही तैयार हो जाता है। स्वाद बिल्कुल मौलिक,,,
तीसरा: आज बेते चिन्मय और बहु दोनो को, 6 बजे, शाम तो नहीं, अपराह्न ही कहा जायेगा, क्योंकि उससमय अपराह्न जैसी ही धूप है, पोते के स्कूल जाना हुआ। हमलोग भी कार में सवार हो गये। वे दोनों स्कूल के अन्दर परेंट्स कौन्सल्लीन्ग के लिये चले गये और मैं और मेरी पत्नी पोते रिषभ को लेकर पास के पार्क में आ गये। वहाँ बच्चों के खेलने की सारी सुविधायें थी। वहीं पर पुणे से आये मनीष से बात हुयी। उनकी पत्नी कौन्सेलिन्ग के लिये गयी थी और वे अपनी बच्ची के साथ यहां पार्क में आ गये थे। उनसे बात करते हुए पता चला कि वे भी उसी कम्पनी के लिये काम करते हैं, जहाँ मेरा लड़का काम करता है।
वहाँ पर पास में जाली से घिरा लॉन टेनिस का मैदान था, जहाँ दो लड़कियाँ, अफ्रीकन या कैरीबियाई मूल की लगी, टेनिस खेलने का अभ्यास कर रही थी। इतने में पार्क की ओर आते एक बुजुर्ग दम्पति पर नजरें पड़ीं। पति का नाम था बिरोली। वे टाटा मोटर्स, पुणे में काम करते थे। टाटा का नाम लेते ही एक जुड़ाव- सा महसूस हुआ, इसलिये मैने भी बातें करनी शुरु कर दी। उन्हें भी यहाँ के जल की ब्तवस्था पर बहुत आश्चर्य हो रहा था। बारिश बिल्कुल कम, फिर भी पानी की कमी नहीं। कैसे कर पाते हैं यह सब, यहाँ के लोग?
इतने में हमने खड़खड़ाती हुई एक चार कोच वाली एक ट्रेन गुजरते हुये देखी। चारो तरफ के हरे-भरे मैदान के बीच रेलवे ट्रैक भी था, इसका पता भी नहीं चलता था। उसी हरीतिमा के बीच से ट्रेन गुजर गयी। यह ट्रेन सिंगल ट्रैक पर, शायद यहाँ से लॉस एंजेलिस तक जाती है। इसके बाद चिन्मय के आने पर उसके साथ उसके ऑफ़िस से होते हुये लौटे।

19-07-2018, इरवाइन, यु एस ए , 16वाँ दिन (Day 16)
आज नाश्ते के बाद जब मैं कैम्पस के अन्दर ही पार्क की ओर निकला, तो एक बुजुर्ग से मिला। वे मिस्टर राव है, अपने लडके के यहाँ आये हुये हैं। वे करीब दस साल पहले ओ एन जी सी (O N G C) से सेवा निवृत्त हुए हैं। वे विशाखापटनम के पास के रहनेवाले हैं। करीब 19 वर्ष तक उन्होने ONGC में अपनी सेवायें दीं। उसके पहले वे भारतीय सेना में थे। उन्होने 1971 की लड़ाई कश्मीर के मोर्चे पर लड़ी थी। वे बताते हैं कि हमलोग 40 मील से अधिक तक पाकिस्तान की सीमा के अन्दर घुस चुके थे। उसी समय यहाँ और पाकिस्तान में फर्क साफ नज़र आता था। पाकिस्तान की सड़कें बदहाल, दूर-दूर तक वीरान खेत, जीवन जैसे वहाँ अन्तिम साँस ले रहा हो।
वहीं दूसरी ओर से शोलापुर, महाराष्ट्र से आये संजीव कुलकर्णी जी से भी बातें हुयीं। वे किसी न्यूज़ पेपर में काम करते थे। हम सबों के बच्चे- बच्चियाँ अच्छी जिन्दगी और अच्छे भविश्य की खोज में तकनीकी लेबर बनने के लिये आ गये हैं। यही आज के समय का बदलता विश्व है। दुनिया समतल है, जबतक ब्रेन का इसतरह माईग्रेशन होता रहेगा। The World is flat till brain is getting migrated like this.
दोपहर में तेलगु से हिन्दी में डब की हुई फिल्म "रुद्रमा देवी" देखी। यह एक सच्ची ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित कुछ नाटकीय तथ्यों को जोड़कर बनाई गयी एक रोचक फिल्म है। आन्ध्र के काकातिया वंश के राजा गनपतिदेव को पुत्र के रूप में एक सन्तान की जरूरत थी जो राजा के बाद साम्राज्य की शासन ब्यवस्था अपने हाथों में लेकर आगे चला सके। यह सम्मुनत राज्यों में से एक था। कहनी 1263 ईस्वी के आसपास की है। राजा को सन्तान के रूप में जब कन्या रत्न की प्राप्ति हुई तो राजा के महल से इसे पुत्र के रूप में प्रचारित किया गया, ताकि प्रजा को यह विश्वास हो जाय कि राज्य को उसका राजा मिल गया है। यह राज बाद में खुलकर सबों के सामने आता है, तबतक रुद्रमा राज काज चलाने में सक्षम बन चुकी होती है। रुद्रमा देवी ने सभी जातियों से योद्धाओं को लेकर एक मजबूत सैन्य संगठन तौयार किया। इसतरह शासन ब्यवस्था और युद्ध कला दोनों में उसने कुशलता हासिल की, विकट परिस्थितियो में कई युद्ध जीते और राज्य की ब्यवस्था को सुदृढ़ किया, जिसकी वीर गाथा अभी तक गायी जाती है।
 क्रमशः 

Wednesday, August 22, 2018

अमेरिका डायरी, 17-07-2018, इर्वाइन, यु एस ए, 14 वाँ दिन (Day 14)

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17-07-2018, इरवाइन, यु एस ए, 14 वाँ दिन (Day 14)
आज सुनह 8:40 बजे मेरे पोते, Grand son को बस स्टैंड पर विद्यालय बस में छोड़ना पड़ा। बस की सुरक्षा कितनी थी, उसे मैनें देखा। एक वीडियो जो स्कूल बस से उतरते बच्चों के समय ली गयी है, देखें। यद्यपि यह वीडियो जब मैं बस पर अपने पोते को छोडने गया, उस समय का नहीं है, लेकिन मैने इसकी प्रमाणिकता की जांच की। स्कूल बस बिल्कुल वैसे ही operate किया जैसा इसमें दिखाया गया है। बस आकर नियत स्थान पर रुकी। बस के आगे के बम्पर से एक बड़ा सा रॉड जैसा निकला, जो बस के समानान्तर सड़क के किनारे निकल गया, ताकि बस के आगे से कोई सड़क को पार नहीं कर सके। बस से एक महिला चालक उतरी। उसने बच्चे को बस के अन्दर तक पहुंचाया। बस की सीट पर बैठाकर सीट बेल्ट लगा दिया। बस में इक्के दुक्के ही बच्चे थे। बस पर ड्राईवर बैठ गयी। वहीं से स्तीरिन्ग व्हील के पास के हैन्डील से दरवाजा बन्द किया। उसके बाद आगे का निकला हुआ रॉड अन्दर बम्पर के पास चला गया। बस उसके बाद ही चली। बच्चों के लिये सुरक्षा के उपाय इस हद तक फूल्प्रूफ रखे गये हैं।
मैं इससे अपने यहाँ की ठूंस-ठूंस कर बच्चों को स्कूल ले जाते हुये टेम्पो में मिली सुरक्षा का ध्यान आता है, तो कितनी तकलीफ होती है। अपने यहाँ क्या बच्चों के लिये सुरक्षित विद्यालय पहुंचने के लिये बस की ब्यवस्था स्कूल और सरकार की शिक्षा ब्यवस्था का अंग नहीं होना चाहिये ? इसके लिये भी आन्दोलन, चक्का जाम और सड़क जाम करने की जरूरत है।
शाम में डोमिनॉस से मँगाई गई पिज़ा का आनन्द लिया गया। पिज्जा लेने मैं भी गया था। मेरे ग्रैंड सन को पिज़ा काफी पसन्द है। वहाँ मैने देखा कि एक पूरा मार्किट प्लेस ही है जहां पिज़ा, बिरियानी पॉट सहित कई जलपान गृह बने हुये हैं, जहाँ आप बैठकर साफ सुथरे टेबल पर डिसेज़ का लुत्फ उठा सकते है। पार्सल करवा कर घर ले जाने का भी विकल्प मौजूद है। पिज़्ज़ा की डिलीवरी घर पर भी होती है, कार के माध्यम से। परन्तु उसके लिये अलग से डालर खर्च करने होते हैं।
क्रमशः 

Monday, August 20, 2018

अमेरिका डायरी 15-07-2018, 16-07-2018, इरवाइन, यु एस ए, 12 वाँ और 13 वाँ दिन (Day 12,13)

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15-07-2018, इर्वाईन यु एस ए में 12वाँ दिन (Day 12)
आज के दिन भी सुबह आसमान बादलों से भरा था। ये बादल जल्दी ही छँट गये और 8 बजे तक चमकीली धूप फैल गयी। आज शाम को पास के Ralf मॉल जाना हुआ। उसकी तस्वीर यहां दे रहा हूँ।
मैं यहाँ बाज़ार के स्थान की ब्यवस्था के बारे में आज समझने की कोशिश की। यहाँ किराना स्टोर कहीं नहीं दिखेगा। या सब्जी का बाज़ार या फल का बाज़ार कहीं एक जगह नहीं है। मॉल सन्सकृति के द्वारा ही सामान और ग्राहक के बीच का सम्बन्ध जुड़ता है। अपार्टमेंट में भी कोई छोटा मोटा स्टोर नहीं है। अगर नमक भी लेना हो तो स्टोर जाना पड़ेगा।
यहाँ सबसे करीब में RALF नमक मॉल है। इससे थोड़ी दूरी पर COSTCO और WALLMART का बड़ा मॉल कम स्टोर है।
मॉल सन्सकृति और कार सन्सकृति दोनों एक दूसरे के पूरक है। मॉल अपके घर के पास तो रहेगा नहीं। और दूर जाने के लिये कार चाहिये। इसी को सपोर्ट करने के लिये, चौड़ी सड़कें, मॉल के लिये बाज़ार का स्थान भी चाहिये। उसी मार्किट प्लेस में हर चीज का बाज़ार है। कुत्ते - बिल्लियों जिन्हें यहां सम्मान सूचक शब्द देते हुये "पेट(Pet)" कहा जाता है, उसके रहने के घर सहित, पहनने, खाने और रखरखाव के लिये अन्य सामग्रियों का एक अलग बाज़ार है। या मॉल के ही विस्तार में एक बड़ा सा कोना इसी के लिये आबंटित है। यानि उसका एक बड़ा बाज़ार है, तभी तो उसके लिये सारी वस्तुयें उपलब्ध करायी गई हैं। इसकी पड़ताल भी हम कर सकते हैं। क्यों "पेट" के प्रति इतना अधिक प्रेम होता है। पशुओं से प्रेम मनुष्यों के प्रति प्रेम के नजरिये को विकसित करता है या बदल देता है, यह सोचने की बात है।



16-07-2018, इरवाइन यु एस ए , 13वां दिन (Day 13)
आज यु एस ए प्रवास का मेरा 13 वाँ दिन है। यहाँ इरवाइन के जलवायु के बारे में मैने अपने 11 वें दिन की डायरी के पन्ने में चर्चा की थी। आज उसी में कुछ आगे जोडने की कोशिश करता हूँ। 11 वें दिन की डायरी में मैने यहाँ की जलवायु में precipitation rain की प्रक्रिया का वर्णन किया था। यहाँ जाड़े में बरसात अधिक होती है। वर्ष के अन्य महीने सामान्यत: वर्षा विहीन ही होते हैं।
जाड़े में Santa Ana Mountains जो इरवाइन के उत्तर- पूर्व में स्थित है, वहाँ कभी-कभी बर्फ भी देखी जाती है। Santa Ana Mountain Range दक्षिणी कैलीफोर्निया के तट के किनारे 64 मील दक्षिण-पूर्व तक और ऑरेंज तथा रिवरसाइड काऊंटी जिले के बौर्डर तक फैला है।
इर्वाइन के नीचे के हिस्से में बर्फ अपवाद ही है। परन्तु कहा जाता है 1949 के जनवरी में इस क्षेत्र में 3 इंच बर्फ की चादर बिछ गयी थी। 1991 में एक Tornado नामक तूफान ने यहाँ दस्तक दी थी। कहा जाता है कि Tornado जैसा तूफान Orange County में सामान्यत: पांच साल में एक बार अवश्य आता है।
Tornado क्या होता है? Tornado एक तरह का तूफान होता है जो तूफान होते हुये भी तूफान से अलग होता है। इसमें कम दबाव का क्षेत्र, केन्द्र में पैदा होता है। इसे भरने के लिये चारो ओर से हवा दौड़ती है। यह उत्तरी गोलार्ध में घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में और दक्षिणी गोलार्ध में घड़ी की सुई की दिशा में उठता है। अपने साथ यह कचरा, धूल आदि लेते हुये ऊपर उठता जाता है। इसकी गति 110 मील प्रति घन्टे से 300 मील प्रति घन्टे तक हो सकती है।
यह Cumulonimbus क्लाउड का एक formation होता है जो घना होता है और सीधे ऊपर की तरफ उठता हुआ लगता है। ये बादल अकेले भी हो सकते हैं और समूह में भी हो सकते हैं, जो ठंढी आवरण के साथ ऊपर उठते हैं। यह कुछ दूर करीब 24 मील तक चलकर दबाव कम होता जाता है और ठंढा होकर समाप्त हो जाता है।  क्रमशः

Friday, August 17, 2018

अमेरिका डायरी, 14-07-2018, इरवाइन, यु एस ए 11 वां दिन (Day 11)

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14-07-2018, इर्वाइन, यु एस ए ( अमेरिका में 11वां दिन, Day 11)
अपनी अमेरिका डायरी के पिछले पन्नों में मैने इर्वाईन, जहाँ मैं ठहरा हूँ, वहाँ की भौगोलिक स्थितियों के बारे में लिखा था। आज मैं यहाँ की जलवायु के बारे में बताना चहता हूँ।
यहाँ की जलवायु दक्षिणी कैलिफोर्निया में ब्याप्त जलवायु की स्थितियों से ही प्रभावित होता है। यहाँ बसन्त ऋतु (spring), देर से आती है। ग्रीष्म ऋतु (summer), पहले आ जाती है। यहाँ सुबह में बादल छाये रहते हैं, जबकि कभी-कभी बूंदाबांदी भी हो जाती है। ये सुबह में छाये बादल दिन चढ़ते चढ़ते छंटने लगते हैं और दोपहर तक अच्छी खासी धूप खिल जाती है। ग्रीष्म ऋतु काफी गर्म होती है। तापमान करीब 85/110 डिग्री फारेनहाइट तक पहुँच जाता है। ग्रीष्म ऋतु के बीतते - बीतते शिशिर (autumn) में मैक्सिको के पश्चिमी तट पर प्रशान्त महासागर में उठते तूफानों के कारण मौसम में नमी भी रहती है। जाड़े का मौसम शुष्क होता है। कोई भी कुहासा या तुशारपात नहीं होता है। Santa Ana wind के कारण जाड़े का मौसम गर्म भी हो जाता है।
इर्वाइन के समुद्र तट के नजदीक होने के कारण, इसके अलग-अलग हिस्सों में मौसम बदलता रहता है। जाड़े के दिनों में नमी बढ़ जाती है। द्रवीभूत बारिश कैसे होती है? नमी वाली हवा जब ऊपर के एक तल से ऊपर उठती है तो वह बादलों के रूप में घनीभूत हो जाती है, जिसे stationary front ( meteoro logical term) कहा जाता है। यही front घनीभूत बारिश के क्षेत्र में होता है, जो ऊपर उठती हवा को बन्धक बना लेता है। इसी में नमी शोषित होती है और घनीभूत बादल का रूप ले लेती है। इसी तरह के बादल में जलकण एक दूसरे में संश्लिष्ट (Coalesce) होकर बड़े होते जाते हैं और बूंदों के रूप में बरस जाते हैं। इस क्रिया को precipitation rain कहा जाता है। इस क्षेत्र में precipitation rain अधिक होता है। यद्यपि कि धरती पर कुल जल की मात्रा अधिकांशतः स्थिर होती है, तथापि जल का विभक्तिकरण बड़े झीलों में, बर्फ में, ताजा जल श्रोतों में या समुद्रीय नमकीन जल में होना जलवायु के कारकों पर निर्भर करता है।
वाटर साइकिल में उर्जा का विनिमय होता है जिससे तापमान में परिवर्तन होता है। जब जल का वाष्पीकरण होता है तो वातावरण से उर्जा का अवशोषण होता है और इसतरह पर्यावरण ठंढा हो जाता है। जब इसका घनीभूतिकरण होता है, तो यही अवशोषित उर्जा बाहर उत्सर्जित होती है और पर्यावरण उष्ण हो जाता है। यही ताप का विनिमय जलवायु को प्रभावित करता है। इस वॉटर साइकिल से जल का शुद्धिकरण होता है, जो धरती पर ताजे और पीने लायक जल की उपलब्धता को सुनिश्चित करता है। इसीतरह बर्फ और जल का बहाव अपने साथ मिट्टी और खनिज बहा कर ले जाता है। यही पृथ्वी पर मिट्टी और चट्टानों के क्षरण(erosion) और अवसादन या तछटीकरण (sedimentation) की क्रियाओं से भौगोलिक स्थितियों का निर्माण होता है। यही जल वृत्त (water cyccle) इस ग्रह पर जीवन और पर्यावरण के रखरखाव करने की स्थितियों का द्योतक है। इसतरह इर्वाईन में जुलाई-अगस्त में 44 डिग्री सेंटीग्रेड के उच्चतम तापमान और दिसम्बर-जनवरी में 4/5 डिग्री न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया जाता है।
आज रथयात्रा है। शाम को हमलोग मन्दिर गये। यह एक स्टोरहाउस नुमा स्थान में किनारे-किनारे देवताओं की मूर्ति स्थापित है। बीच के स्थान में कार्पेट बिछाया हुआ है। यहाँ बाहर में छोटा सा रथ दिखा। रथयात्रा का कार्य क्रम संभवतः सुबह में सम्पन्न हुआ होगा। अन्दर में हमने जगन्नाथ जी के दर्शन किये। ग बाहर के लान में मुफ्त भोजन के लिये लोग पन्क्तिबद्ध थे। हमलोग भी लग गये। चावल, रोटी, दो सब्जियाँ और खीर, भरपेट भोजन का लाभ उठाया गया। मुझे पता चला कि यह पूरा आयोजन यहाँ के लोगों के दान पर ही चलता है। भारत से दूर भी एक भारत के होने का अहसास और उससे भी अधिक भारतीय संस्कारों के होने का अहसास बहुत बड़ी बात है। 
क्रमशः

Thursday, August 16, 2018

मैं अटल हूँ, ंंमैं जिन्दा हूँ (कविता)

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अटल विहारी बाजपेयी (श्रद्धांजलि स्वरुप)
मैं अटल हूँ, मैं जिन्दा हूँ।
मैं संसद में नहीं
राजपथ में भी नहीं।
मैं सडकों पर, गलियों में
फूलों में, कलियों में।
नित्य सलिला नदियों में
खेतों में, फलियों में।
मैं राष्ट्र गगन में उड़ता एक परिन्दा हूँ।
मैं अटल हूँ, मैं जिन्दा हूँ।

मैं नेताओं जैसी लफ्फाजी में नहीं
राजनीति की जीती हुयी बाजी में भी नहीं।
मैं अक्षरों में, शब्दों में,
वाक्यों में, गीतों में।
मैं हार में, ब्यवहार में,
अरियों में, मीतों में।
सुधा -पत्र का एक पुलिंदा हूँ।
मैं अटल हूँ, मैं जिन्दा हूं।

मैं राजनीति के शिखर में नहीं,
मैं कूटनीति के स्वर मे नहीं।
मैं बन्चितों की चीख में,
मैं भिखुओं की भीख में।
मै कतार में खड़े हर उस
अन्तिम आदमी की भूख में।
आज भी शर्मिन्दा हूँ।
मैं अटल हूँ, मैं जिन्दा हूं।

मैं विशिष्ट जनों के संघों में नहीं,
मैं परिजनों के स्वयं संघों में नहीं।

मैं कार्यकर्ताओं की ताकत के मूल में हूँ,
रास्ते की कण कण में, धूल में हूँ ।
गुलाबों की रंगत में नहीं, शूल में हूँ।
फलदार पेड़ों की शाखों में नहीं, बबूल में हूँ।
मैं उपवनों में, वनों में वृंदा हूँ।
मैं अटल हूं, मैं जिन्दा हूँ।

-ब्रजेन्दनाथ, इर्वाईन, कैलिफोर्निया, यु एस ए
तिथि: 16-15-2018
(अटल जी के देहावसान पर)

स्थानीय तुलसी भवन में सुनाई गई इसी कविता का यूट्यूब लिंक
https://youtu.be/sj_dGxAxk5E

Tuesday, August 14, 2018

अमेरिका डायरी, 13-07-2018, इर्वाईन, यु एस ए ंंमें 10 वां दिन(Day 10)

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13-07-2018, अमेरिका डायरी, इर्वाईन, दसवाँ दिन (Day 10)

आज यु एस ए में मेरे आवास का दसवाँ दिन है। जैसा कि मैने पहले भी बताया था, मैं जहां ठहरा हूँ, यानि इरवाइन, जो यहां के कैलिफोर्निया राज्य के Orange County (जिले) का हिस्सा है, उसी बारे में कुछ और जानने की कोशिश करते हैं।
मैने अपनी डायरी के पिछले पन्नों में इस बात का जिक्र किया था कि यह शहर योजनाबद्ध तरीके से विकसित और स्थापित शहर है। इरवाइन के उत्तर में Tustin, उत्तर-पश्चिम में Santa Ana, पूर्व में Lake Forest, दक्षिण-पूर्व में Laguna Hills और Laguna Woods, पश्चिम में Costa Mesa और दक्षिण - पश्चिम में New Port beach है। Orange का छोटा किनारा उत्तर की तरफ इसे छूता है।
San Diago Creek (झरने से बड़ी एक छोटी नदी) जो उत्तर-पश्चिम की ओर Upper New Port Bay (खाड़ी), की ओर बहती है, वही जल उपलब्धता का मुख्य श्रोत है। Peter Canyon (खड्ड या घाटी) Wash इस नदी का मुख्य tributory है। इसतरह पूरा इरवाइन एक समतल, चौड़ी घाटी की शक्ल में हैं, जो उत्तर में Loma Ridge और दक्षिण में San Joaquin Hill के बीच फैला है (दिये गये तस्वीर, map में देखें)। सुदूर उत्तर और दक्षिण में कई पहाड़, पहाड़ियां, पाठार और खड्ड(Canyon) फैले हैं।
लॉस एन्ज्लेस के वास्तुविद William Pereira और Irvine कम्पनी के कर्मचारी Raymond Watson ने इस शहर के निर्माण और विकास की रूप रेखा बनाई। उसने इसको कस्बों या मुहल्लों (townships), जिन्हें villages कहा गया, में विभाजित किया। बीच में कम-से-कम छ: लेन की सडकों और हर मुहल्ले में समान डिजाइन के घरों और ब्यवसायिक केन्द्रों, धार्मिक केन्द्रों(चर्चों), विश्वविद्यालयों और ब्यवसयिक क्षेत्रों में विभाजित कर दिया। वास्तुविद पेरेरा ने पूरे क्षेत्र का वृत्ताकार डिजाईन, जिसमें कई मानव निर्मित झीलें होंती और बीच में विश्वविद्यालय होता, तैयार किया था। लेकिन इरवाइन कम्पनी ने खेती के मूल्यवान मैदानों को इसके लिये देने से इन्कार कर दिया। इसीलिये विश्वविद्यालय का क्षेत्र दक्षिणी तटीय पहाड़ों के तरफ स्थानान्तरित कर दिया। अब यह डिजाईन वृत्ताकार से बदलकर नेकलेस की शक्ल का हो गया, जिसमें villages दो समानान्तर मुख्य मार्ग की तरह हैं, जो University of California (UCI, Irvine), पर जाकर खत्म होता है। यानि UCI एक Pedant या लॉकेट की तरह है।
यहाँ दो बड़े ब्यवसायिक केन्द्र Irvine Business Complex पश्चिम की तरफ और Irvine Spectrum पूरब की तरफ स्थित हैं। मूल वृत्तनुमा डिजाईन को आप अब भी महसूस कर सकते हैं, जिसमें दो मानव निर्मित झीलें, South woodbridge और North woodbridge लेक (जिसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं, Day 5 में) और UCI university केन्द्र में स्थित हैं।
अब यहाँ, शहर के अन्दर की सडकों और उनके landscaping पर नज़र डालें। कम-से-कम छ: लेन की सड़कें, बीच में डिवाईडर पर भी लैंडस्केपिन्ग, साइड में दोनों तरफ 5 फीट चौड़ा पैदल चलने के लिये कंक्रीट से बना चिकना भ्रमण - पथ, दोनों तरफ पेड़ों की कतार, पेड़ों के कतार से पगडंडी तक landscaping, हेज भी करीने से तराशे हुए, एक खूबसूरत हरियाली का कारवाँ आपके साथ चलता हुआ प्रतीत होता है। इसके साथ ही दाहिनी ओर सायकिल चलाने के लिये सड़क का एक हिस्सा, छ: लेन के अतिरिक्त निर्धारित किया हुआ है। ये पूरी हरियाली का क्षेत्र और यहां के हर मुहल्ले में बना पार्क का पूरा क्षेत्र reclaimed water यानि रिहायशी इलाकों में प्रयोग के बाद जमा किये गये पानी को पुन: प्रयोग में लाये जाने लायक बनाकर एकत्रित पानी से ही हरा - भरा दीखता है। इसके लिये अलग से जल की ब्यवस्था नहीं करनी पडी है। अगर आप सुबह घूमने निकलें, तो सारा हरियाली का लैन्डस्केप वाला क्षेत्र जल से नहाया हुआ दिखेगा। लेकिन रात में कोई बरसात नहीं हुई, जिससे या जल - स्नान हुआ है। हर पेड़-पौधे के पास sprinklar या जल छिडकाव यन्त्र लगा हुआ है। रात में ही निर्धारित समय पर इस यन्त्र से जल छिडकाव हो जाता है। इसीलिये सुबह में सारे पौधे और पेड़ों की जड़ें जल से नहाई हुई लगती हैं।
यहाँ की जलवायु और मौसम के बारे में अगले पन्ने पर,,,
क्रमशः



Monday, August 13, 2018

"मुल्क" फिल्म की समीक्षा (लेख)

फिल्म "मुल्क" की समीक्षा:

आज मैनें ये फिल्म देखी। इस फिल्म की पूरी आत्मा कोर्ट के दृश्य में ही है। मुराद अली (ऋषि कपूर) अपने भतीजे का शव लेने से इन्कार कर देता है, क्योंकि वह पुलिस की गोली से मारा जाता है, जब कि उसके एक आतंकवादी वारदात में शामिल होने के पुख्ता सबूत पुलिस के पास थे।
एक सवाल इसमें यही उठाया गया है कि एक परिवार के एक लडके के आतंकवादी साबित होने से क्या पूरा परिवार आतंकवादी घोषित कर दिया जाना चाहिये?
यह सवाल बाद में उठता है, जब वह आतंकवादी वारदात को अंजाम दे चुका होता है। परिवार का कोई लड़का किस गतिविधिं में लिप्त हो रहा है, इसकी जिम्मेवारी भी परिवार की है। क्योंकि उसके कार्यों से परिवार की इज्जत जुड़ी हुई है और प्रभावित भी होती है। इसे भी इस फिल्म में स्थापित करने की कोशिश की गयी है, लेकिन कमजोर तरीके से।
एक सवाल और उठता है- मुल्क को "हम" और "वे "में विभाजित नहीं किया जा सकता। नहीं किया जाना चाहिये, इससे मुल्क की समाजिक मजबूती का धागा कमजोर होता है। कोई भी हम और वे मुल्क को कमजोर करता है। यहां ये भी साबित करने की कोशिश की गयी है कि 1947 में मुल्क के विभाजन के समय हिन्दुस्तान में वे ही रह गये जो अन्दर बाहर से राष्ट्रवादी थे, अपने को प्रतिबद्ध कर लिये थे।
1992 में अयोध्या में विवादत ढांचे के जमीन्दोज़ होने के समय तनाव ग्रस्त माहौल में  मुसलमानों के साथ उनके पड़ोसी हिन्दु भी खड़े थे, यह भी इस फिल्म का एक फ्लश्बैक दृश्य है। अब 1990 जनवरी के उस दृश्य को याद कीजिये जब कश्मीर घाटी के मस्जिदों से हिन्दुओं को घाटी छोडने का एलान किया जा रहा था। बाकी भारत के मस्जिदों से उससमय या उसके बाद कभी भी एक आन्दोलन की तरह यह एलान क्यों नहीं किया गया कि कश्मीर के हिन्दुओं घर मत छोड़ो, देखें कौन तुझे निकालता है? राजनेता चुप हो गये तो कौम भी चुप हो गयी। अब तो जिन्ना की तस्वीर कॉलेजों में लगायी जा रही है। हिन्दुस्तान तेरे टुकड़े होंगे, इंसाँ अल्ला। और तुम एक अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा,,,, वगैरह,!
आज युग की यह मांग है की राष्ट्र को कमजोर करने वाले हर तबके को उजागर किया जाय। आतंकवादी बौर्डर पार कर ही नहीं आता, वह हर ब्यक्ति उसी कटघरे में खड़ा है जो भ्रष्टाचारी है, मिलावटी है, मुनाफखोर और टैक्स चोर है, आततायी और बलात्कारी है, आय से अधिक सम्पत्ति इकट्ठी कर चुका है।
ब्रजेन्द्रनाथ

Saturday, August 11, 2018

अमेरिका डायरी ता: 12-07-2018, इर्वाइन यु एस ए ंंमें 9वां दिन(Day 9 )

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12-07-2018 , इर्वाईन, यु एस ए में 9वां दिन(Day 9 in U S A)
मित्रों, आज मैं अमेरिका में मनोरंजन ब्यवसाय से केन्द्र "हॉलीवुड" के अस्तित्व में आने के इतिहास पर दृष्टिपात करेंगे। हॉलीवुड (Hollywood) कैलिफोर्निया यु एस ए के पश्चिमी क्षेत्र में लॉस एंजिल्स के पास बसा हुआ है। यह एक सघन आबादी वाला वाला क्षेत्र यु एस ए के फिल्म उद्योग का गृह शहर है। यहाँ फिल्म उद्योग से सम्बन्धित कई फिल्म स्टुडियो स्थित हैं।
इसके इतिहास के बारे में पड़ताल करने पर पता चलता है कि यह 1853 और उसके पहले यह जगह मैक्सिकन नोपल कैक्टस(Maxican Nopal Cactus) से भरा हुआ था। 1870 तक यहाँ आकर बसे स्पैनिशों और चीनियों में से कृषि कार्य करने वाली प्रजाति विकसित हुई। यह क्षेत्र Cahuenga Valley जो Santa Monica Mountains के ठीक उत्तर में स्थित है, के नाम से जाना गया।
हॉलीवुड नाम कैसे पड़ा, इसकी एक दिलचस्प कहानी है। H J Whitley जिन्हें हॉलीवुड के पिता और संस्थापक के रूप में जाना जाता है, उनकी 1886 की डायरी में एक वाकया दर्ज था। वे लिखते हैं, " मैं आज अपनी पत्नी के साथ इस पहाड़ पर honeymoon (मधुयामिनी) मनाने आया हूँ। उपर से पूरी घाटी निहारते हुये अच्छा लग रहा है। मैंने एक wagon में लकड़ी ले जाते हुये चीनी से पूछा, 'क्या कर रहे हो?' उसने अपनी टूटी फूटी अन्ग्रेजी में कहा, ' I holly - wood ' उसके कहने मतलब है, 'मैं wood को haul यानि ले जा रहा हूँ।' यहीं से मुझे इस शहर का नाम मिल गया और मै इसे Hollywood नाम से सम्बोधित करने लगा।" शायद उसने सोचा होगा कि Holly से England, जिस देश से वह आया है, उसका बोध होता है और wood से Scotland का जहाँ उसकी जड़ें थी।
उसने वहीं पर करीब 480 एकड़ ranch की जमीन E C Hurd के साथ मिलकर खरीदी। उन्होंने आपस में मिलकर एक समझौता किया उस पूरे रैंच की एक कीमत तय की। अपनी योजना को उन्होने Los Angles Times के प्रकाशक General Harrison Gray Otis और उस क्षेत्र के ब्यवसायी Ivar Weid को बतायी। Dacida Wilcox जो Ivar Weid की पडोसी थी उस योजना की जानकारी अपने पति Wilcox को दी। उसने ये भी बताया कि Hollywood Canyon (Now Lake Hollywood) के लिये Hollywood नाम का प्रयोग शुरु हो गया था। Wilcox ने उस क्षेत्र में 120 एकड़ जमीन खरीद ली। इस प्रॉपर्टी का उसने Los Angles County के जमीन के दस्तावेज के नक्शे में Hollywood नाम से दर्ज करवा लिया। इसतरह hollywood अस्तित्व में आया।
उससमय 1990 में LA (Los Angles) इससे 10 मील दूर, पूर्व में स्थित था। LA और Hollywood के बीच Vineyards, barley fields, और citrus grooves फैले हुये थे। इस दस मील को तय करने में घोड़े से दो घन्टे लगते थे। फलदायी Citrus fruits के store को अस्तबल में परिवर्तित कर घोड़ों को रखने की ब्यवस्था हुई। इन्हीं घोड़ों को यातायात के साधन के रूप में उपयोग किया जाने लगा।
क्रमशः

Thursday, August 9, 2018

अमेरिका डायरी, 11-07-2018, इर्वाइन (यु एस ए ंंमें आठवां दिन, Day 8


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11-07-2018, इर्वाइन, साउथ कलिफोर्निया ( यु एस ए में आठवां दिन, Day 8)

आज का दिन अन्य दिनों से कुछ अलग बीता क्योंकि हमलोगों का ऑरेंज काऊंटी ग्रेट बैलून पार्क जाना हुआ। इस पार्क के लिये हमलोग सात बजे अपराह्न या सन्ध्या क्या कहूँ, समझ नहीं पा रहा हूँ, निकले। ज्ञात हो कि यहाँ साढ़े आठ बजे तक उजाला ही होता है। शाम तो उसके बाद ही आती है।
यह पार्क करीब 27.5 एकड़ में फैला हुआ खेल, कृषि और कला को समर्पित एक पब्लिक पार्क ( आम या सार्वजनिक उद्यान) है। इतिहास बताता है कि यह Marine Corps Air Station, El Toro के अन्तरराष्ट्रीय air field station को बंद किये जाने के बाद यहाँ की जनता ने इसे सार्वजनिक उद्यान में बदल दिये जाने के लिए पब्लिक ओपिनियन पोल में वोट किया था।
एयर फील्ड स्टेशन को बंद किये जाने के बाद यह सार्वजनिक विवाद में फँस गया था। 1940 से पहले यह एयर बेस था, जो युद्धक विमानों के ठहराव स्थल, इन्धनीकरण और उड़ान भरने के काम आता था। द्वितीय युद्ध की समाप्ति के बाद इसका उपयोग बिल्कुल कम हो गया। अब इस बड़े भूभाग का क्या उपयोग हो, इसपर विचार किया जाने लगा। इसके कुछ दूरी पर Orange County Airport जिसे 1979 में एक बड़े अभिनेता के नाम पर John Wyne Air Port नाम दे दिया गया, है। इस एयर पोर्ट की जगह पर नयी सुविधाओं के साथ इस बंद किये गये एयर बेस स्टेशन को नया civilian air port में बदल दिये जाने पर विचार किया जाना था। इसपर यहाँ के निवासियों में मतभेद था, इसलिये विवाद होना स्वाभाविक था।
प्रशासन यहाँ के स्थायी निवासियों का विचार जाने बिना यहाँ किसी भी नयी सुविधा को लाना सम्भव नहीं था। इस विवाद में जो इसे नये एयर पोर्ट में परिवर्तित करने पक्ष में थे, वे मूलतः उत्तरी क्षेत्र के लोग थे, जो अभी John Wyne Air port के आसपास विमानों के शोर से स्वयं को पीड़ित महसूस कर रहे थे। El Toro में नये एयर पोर्ट के विरोध में आसपास के Lake Forest, Laguna Niguel, Laguna Woods, Dana point और Mission Vego के निवासी थे। वे भी विमानों के परिचालन में आसन्न शोर से सामान्य जीवन में उत्पन्न होने वाले व्यवधान भयाक्रांत थे। इसीलिये यहां के निवासियों ने El Toro Reuse Planning Authority बनाया और इसका पुरजोर विरोध किया। इसतरह प्रशासन को इस बहिष्कृत या abandoned एयर स्टेशन को अन्ततः पार्क में बदले जाने का निर्णय लेना पड़ा। इसके बाद इसकी अच्छी प्लानिंग कर आधुनिक डिजाईन बनाया गया और यह पूरा क्षेत्र एक बैलून पार्क में विकसित हुआ।
इस एयर बेस को जब अन्ततः 1999 में स्थानान्तरित किया गया, तो पूरा क्षेत्र 4682 एकड़ का था। अभी 2018 में बनी योजना के अनुसार 688 एकड़ पार्क में तब्दील होगा। बचा हुआ भूखंड आधारभूत संरचनाओं के विकास और हाऊसिंग सुविधाओं के निर्माण के लिये डेवलपर को दिया गया। इस तरह यह बैलून पार्क अस्तित्व में आया।
हमलोग कार पार्क करने के बाद, कुछ दूर चलकर पार्क में प्रवेश किए। पार्क में हरियाली दूर तक फैली थी। लग रहा था कि हरी-हरी घास से भरा मैदान दूर क्षितिज में नीले आसमान से मिल गया हो। विस्तार इतना विस्तृत था कि मन विस्मय से भर गया। इस अनावृष्टि के क्षेत्र में इतनी हरियाली को सुरक्षित रख पाना एक अद्भुत प्रयास का ही प्रतिफल कहा जायगा।
घास भी इतनी करीने से तराशी हुई कि चलने पर उसमें पांव धंस जाते हैं, जैसे किसी गड्डे पर चल रहे हों। घास भी जंगल वाली नहीं, जो मोटी और कड़ी होती है। बिल्कुल दूब जैसी पतली और छोटी-छोटी, आंखों को शुकून देने वाली। मुझे दूबों के अवलोकन पर याद आता है वो मंजर जब सुबह - सुबह ओस से नहायी दूबों पर सूर्य की रश्मियाँ बिखर-बिखर जाती हैं, और इन पंक्तियों में बँधकर सँवर- सँवर जाती हैं:

ओस की बूंदें मोती - सी लगे,
दूबों पर टिकती हुई सोती - सी लगे।
उन्हें उंगलियों से छूना चाहूँ
मुट्ठियों में बंद करना चाहूँ।

रात सितारे आते अम्बर से
उन्हें धरा पर बिखरा जाते।
झोंके पवन के आते,
सहलाते, पसारते, छितरा जाते।

नहलाई हुई उन  बूंदों में
छल-छल करती आती भोर।
पत्तों पर गिरती, चमकाती 
अमृत-रस से करती सराबोर।

फूलों पर बूंदें ठहरी हुई
छूती-चूमती, नाचती है।
टिकती, टप-टप गिरती हुई
पराग चुरा ले जाती है।

आओ उंगलियों के पोरों में,
कर लूं कैद, ले भागूँ।
उनके बदले थोड़ी-सी
मोती गगन से मैं मांगू ।

यहाँ अब शाम धीरे - धीरे पूरे मैदान पर उतर रही है। सामने बड़ा- सा बैलून दिखाई दे रहा है। या बैलून, बैलून राईड में काम आता है। बड़े से प्लेटफॉर्म को बैलून से बाँधा जाता है। बैलून की हवा को गर्म किया जाता है, जिससे बैलून ऊपर उठता जाता है और वैसे ही उठान पर होता है बैलून से लगे प्लेटफॉर्म पर चढ़े लोगों का उत्साह! आज तो मौका नहीं मिला, शायद किसी दिन मौका मिले तो उसका अनुभव अवश्य साझा करूंगा।
इसी मैदान में छ: फुटबॉल मैदान हैं। इसमें से चार मैदान फुटबॉल लीग के मैचों के लिये है। बाकी के दो मैदान अभ्यास के लिये हैं। साथ ही बास्केटबॉल के कई मैदान हैं। खेल की इतनी सुविधायें हैं कि देखकर आश्चर्य होता है। यहाँ के लोगों को शायद आज खाने और कल के खाना जुटाने की चिन्ता नहीं है। इसलिये चिंतामुक्त होकर खेलना और उसमें आनन्द लेना एक फ़ेवरिट पास्टाईम है। इससे पता चलता है कि यहाँ के लोगों का हप्पिनेस्स इंडेक्स (Happiness Index) कितना उँचा है। इस नयनाभिराम सौंदर्य को उतरती शाम की पृष्ठभूमि में मोबाइल कैमरे में कैद करना और स्मृतियों को स्थाई तौर पर अंकित कर लेने का कार्य सम्पन्न हुआ। हमलोग नौ बजे रात्रि को वापस लौटे।
क्रमशः 

Monday, August 6, 2018

अमेरिका डायरी 10-08-2018, इर्वाईन ( यु एस ए में 7 वां दिन, Day 7)

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10-07-2018, इरवाइन, साउथ कैलिफ़ोर्निया (यु एस ए में सातवाँ दिन, Day 7)

मित्रों, मैने पिछली पोस्ट में USA के कलिफोर्निया राज्य के बारे में संक्षेप में कुछ बताने की कोशिश की थी। आप सबों का स्नेहपूर्ण रेस्पोन्स मिला, इसके लिये सबों को तहे दिल से शुक्रिया।
आज मैं जहाँ ठहरा हूँ, यानी IRVINE, इर्वाईन के बारे में कुछ बताना चहता हूँ। इसकी कहानी एक अनावृष्टि वाले, कम जल श्रोत के पेड़ - पौधा रहित क्षेत्र को एक हरे भरे सुनियोजित, सुब्यवस्थित शहर में बदले जाने के मानवीय प्रयास की कहानी है। कैसे यह सब सम्भव हुआ? आइये इसकी पड़ताल करने की कोशिश करें।
इर्वाईन, यु एस ए के कैलिफोर्निया राज्य के ऑरेंज काउंटी (Orange County) या जिला का एक हिस्सा है। 1960 के पहले यह बिल्कुल ही वैसा नहीं था, जैसा अभी देख रहे हैं । इसे इरवाइन नामक कम्पनी ने 1960 के दशक में मास्टर प्लान के तहत बनाना और विकसित करना शुरु किया जो आधिकारिक तौर पर दिसम्बर 1971 में बनकर तैयार हुआ। यह 66 वर्गमील या 170 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। 2018 तक अनुमानत: इसकी कुल आबादी करीब तीन लाख हो जाने की सम्भावना है।
तकनीकी और सेमीकन्डक्टर (Technical and Semiconductor) कम्पनियों के राश्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय हेड्क्वार्टर भी यहीं हैं। यह स्थान उच्च शिक्षण संस्थानों के लिये भी जाना जाता है। यहाँ University of California, Irvine (UCI), Irvine Valley College, The Orange County Centre of the University of Southern California (USC), and Campuses of California State University, Fullerton (CSUF), University of La Verne, and Pepperdine University
स्थित हैं।
कहा जाता है कि करीब 2000 वर्ष पहले Gabrieteno नामक मूलवासियों का समूह यहाँ रहा कर्ता था। गैस्पेर डे पोर्तोला (Gasper de Portola) नामक स्पैनिश यात्री, सन् 1769 ईस्वी में इस क्षेत्र में आये और यहाँ पशुपालन औए मिशनरी कार्यों की शुरुआत की। स्पेन के राजा ने उसे ही इन कार्यों के लिये पूरी जमीन दान में दे दी।
इस तरह या पूरा क्षेत्र स्पनिशों के नियन्त्रण में था। 1821 में मैक्सिको की स्पेन से आजादी हासिल कर लेने के बाद सरकार ने मिशनरियों की जमीन पर आधिकारिक तौर पर नियन्त्रण हासिल कर लिया। इसके बाद उसने मैक्सिको के नागरिकों से आवेदन माँगकर, उनके बीच वितरित कर दिया। इसलिये यहाँ तीन बड़े- बड़े खेती और पशुपालन के खेत (Ranch) स्पैनिश और मैक्सिको के लोगों के पास चले गये। उन्हें Rancho Santiago de Santa Ana, Rancho San Joaquin और
Rancho Lomas de Santiago नाम दिया गया। 1864 में Jose Andres Sepulveda ने Rancho San Joaquin (खेत का नाम) के 50,000 एकड़ जमीन ( 200 sq km), Benjamin, Thomas Flint, Llewellyn and James Irvine को 18000 डालर में भीषण अकाल में लिये गये ऋंण को अदा करने के लिये बेच दी।
अमेरिकन - मैक्सिकन युद्ध के बाद यह क्षेत्र अमेरिकियों के नियंत्रण में आ गया। उन्होने उस क्षेत्र को 4 हिस्सेदारों में विभाजित कर दिया। जेम्स इरवाइन भी उनमें एक थे। ये सारे रैंच 1870 से भेड़ों के पालन और कृषि कार्यों में प्रयोग में लाये जाने लगे।
1878 में जेम्स इरवाइन (James Irvine) ने अपने अन्य तीनों हिस्सेदारों से 150, 000 डालर देकर सारी जमीनें खरीद ली। इसतरह पश्चिम में प्रशान्त महासागर से लेकर पूरब में Santa Ana नदी तक 140, 000 एकड़ जमीन James Irvine की हो गयी। 1886 में उसकी मृत्यु के बाद उसके बेटे ने Irvine कम्पनी की स्थापना कर इस क्षेत्र को खेती, Olive tree plantation और Citrus crops के उगाने के लिये करना शुरु किया।
1953 में यह पूरा क्षेत्र James Irvine के पोते Myford के नियन्त्रण में आ गया। उसी समय राश्ट्रीय स्काउट की जम्बूरी ( Annual festival of Scouts and Guides is called Jambooree) आयोजन यहाँ हुआ था। उसी के नाम पर यहां Jamboree रोड भी है जो New Port Beach से Orange City तक लम्बा है। कहा जाता है कि उसी जम्बूरी में भाग लेने वाला एक लड़का David Sills जब बडा हुआ ती यहां का Mayor बना और उसने चार टर्मों तक यहां अपनी सेवायें दी। उससमय इस क्षेत्र का विकास हुआ और इसके लिये मास्टर प्लान की रूपरेखा बनाकर उसका क्रियान्वन किया गया।
1975 में वियतनाम में चले लम्बे युद्ध का अमेरिका के नागरिकों द्वारा मुखर विरोध के बाद जब अमेरिकी सेना वहाँ से वापस आयी तो अमेरिका को समर्थन देने वाले वियतनामी भी शरणार्थियों के रूप में यहाँ आये। उन्हें यहाँ आ जाने पर Fountain Valley क्षेत्र में बसाया गया। इसतरह यहाँ की आबादी का एक बडा हिस्सा एशियन अमेरिकन का है।
क्रमशः 

Friday, August 3, 2018

अमेरिका डायरी 09-07-2018, इरवाइन, कैलिफोर्निया (यु एस ए में छठवां दिन)

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09-07-2018, इर्वाइन (यु एस ए में छठवां दिन)
मित्रों, 04-07-2018 संध्या 8:30 की पोस्ट में मैने लिखा था कि मैं जहाँ ठहरा हूँ, वहाँ के बारे में मैं कुछ जानकारियाँ आपको साझा करून्गा। उसी के मुत्तलिक, मैं इर्वाइन, औरेंज काऊंटी, जो यु एस ए के कैलिफोर्निया राज्य में स्थित है, वहां के बारे में जो जानकारियाँ इकट्ठी कर सका हूँ उसे साझा करना चाहता हूँ।
सबसे पहले मैं कैलिफोर्निया राज्य के बारे में बताता चलूँ। कैलिफोर्निया यु एस ए के 50 राज्यों में से एक है। इसकी राजधानी स्क्रेमेन्टो है और लॉस एंजेल्स इसकी सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। यह यु एस ए के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। इस राज्य के पश्चिम में प्रशान्त महासागर, उत्तर में ओरेगोन राज्य, पूर्व में नेवदा, दक्षिण - पूर्व में कोलेराडो नदी है। यही नदी इस राज्य को अरिजोना से अलग करते हैं। दक्षिण में मेक्सिको देश है। चार करोड़ की आबादी वाला यह राज्य अमेरिका का तीसरा सबसे बडा राज्य है। इससे बड़े दो राज्य अलास्का और टेक्सास हैं।
इसे 1850 में अमेरिकन युनियन में 31 वाँ राज्य के रूप में शामिल किया गया था। इस राज्य के बड़े शहर लॉस एंजेल्स, सान दियागो, सान जोश, सान फ्रांसिस्को, स्करमेंटो, न्यू पोर्ट और ओकलैंड हैं। सोलहवीं शताब्दि में योरोपीय देशों द्वारा चलाये गये समूद्री यात्रा अभियानों में इसे स्पैनिशों द्वारा खोज गया था। इसके पहले से यह प्रदेश मूल अमेरिकियो जिन्हें कोलम्बस ने रेड इन्डियंस कहा था, का निवास स्थान था। वे सम्भवत: दक्षिण अमेरिकी मूल के ही प्रतिरूप थे। यहाँ रहने वाले करीब सौ से अधिक तरह के मूलवासी, पांच अलग-अलग तरह की भाषायें/बोलियाँ बोलते थे। 1769 में यह क्षेत्र स्पैनिशों द्वारा जीते जाने से स्पेन के राजा के साम्राज्य के अन्दर आ गया। 1810-21 में मैक्सिको स्वतन्त्रता संग्राम में यह मैक्सिको का हिस्सा बना।
1846-48 में अमेरिका और मैक्सिको के बीच लडाई में मैक्सिको की हार के बाद, अमेरिकियों ने मैक्सिको पर दबाव बनाकर उसे यह क्षेत्र छोडने पर विवश किया। इसतरह गुआड्स्नूप हिदाल्गो सन्धि के अन्तर्गत यह यु एस ए का हिस्सा हो गया। 1848-49 में ऐतिहासिक गोल्ड रश मे सोने की खोज की तमन्ना लिये करीब 90 हजार अमेरिकन सान फ्रांसिस्को आये। कुछ लोग तो अरब पति बन गये। बाकी लोग अपनी सम्पत्ति गंवा कर खाक पति बन बैठे। वे लोग यहां के मूलवासियों की जमीन, खरीद कर या हड़प कर यहीं बस गये। इसतरह यहां की आबादी स्पैनिशों, मैक्सिकन, पूर्व से आये अमीरिकी जिनमें फ़्रैंच, ब्रिटिश, डच, यहां के मूलवासी रेड इन्डियंस और अफ्रीकी, कैरीबियाई मूल के काले लोगों का मिलाजुला रूप है।
इस राज्य का अमेरिका की जी ड़ी पी में करीब 14% का योगदान है। यहाँ का मुख्य पेशा खेती, बिजली उत्पादन, पर्यटन, लेसर (leisure यानि ध्यान और अन्य अब्यवसायिक कार्य) हैं। यु एस ए के मुख्य आर्थिक केन्द्र जैसे लॉस एन्ज्ल्स (होलिवूड में मनोरन्जन, लेसर), केन्द्रीय घाटी (कृषि), सिलिकन घाटी (कम्प्युटर और तकनीक) और नपा घाटी (शराब) भी इसी राज्य में स्थित हैं।
ज्ञात हो कि मशहूर फिल्म उद्योग और विश्व का सबसे बड़ा मनोरंजन उद्योग "होलिवूड" इसी राज्य का हिस्सा है। यहाँ फिल्मों के कई विख्यात स्टुडियो और उनके प्रोडक्सन हाऊस जैसे वार्नर ब्रदर्स, कम्बोडिया पिक्चर्स, युनिवर्सल स्टुडियो, 20th सेंंन्चुरी


 फॉक्स आदि यहीं स्थित हैं। वाल्ट डिज्नी स्टुडियो और युनिवर्सल स्टुडियो का थीम पार्क भी यही होलिवूड, लॉस एंजेल्स के निकट ही स्थित है।
सिलिकोन वैली, जहाँ गूगल, आईबीऍम, ओरकल, सिस्को, इंटेल,अडोब आदि मशहूर हार्ड वेयर और सॉफ़्ट वेयर कम्पनियों के उत्पादों के उत्पादन स्थल और ऑफ़िस स्थित है, भी इसी राज्य में है। इसपर विशेष प्रकाश डायरी के अगले पन्नों में,,,
क्रमशः

Wednesday, August 1, 2018

अमेरिका डायरी 08-07-2018, इरवाइन (यु एस ए ंंमे पांचवां दिन)

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08-07-2018, रविवार, इर्वाईन (यु एस ए में पाँचवाँ दिंन)
कल की पार्टी में लेट नाइट तक जागरण के कारण, आज सुबह विलम्ब से जागना हुआ।
आज रविवार और चिन्मय की सप्ताहांत छुट्टी होने से उसके साथ ही सभी लोग रेलैक्श थे। खाना कुछ रात का बचा हुआ और कुछ ताजा तैयार कर लिया गया। इसतरह खाना बनाने के झंझट से दबाव मुक्त थे, सभी लोग। कहीं बाहर निकलने का अच्छा मौका था।
हमलोगों ने निर्णय लिया कि शाम को "वूड ब्रिज लेक" चला जाय। हमलोगों ने ओक ग्लेन अपार्टमेंट से बाहर निकल कर दाहिनी ओर की सडक पकड़ी। थोड़ी देर ड्राइव के बाद सिग्नल से बायीं ओर मुडकर बर्रन्का पार्क वे से होते हुए, क्रीक रोड सिग्नल से दाहिने मुड़कर, 10 मिनट में वूड ब्रिज लेक साइड में पहुँच गये। यह एक सुन्दर, बहुत अच्छी तरह से देखभाल कर सुरक्षित किया हुआ लेक है। चारो तरफ ओक पेड़ों की कतार से लगी हरी हरी घास, करीने से तराशा हुई , जैसे हरियाली के बीच से नीले जल से भरा हुआ बड़े कटोरे जैसा झील प्रकट हो गया हो। जल पर तैरती बत्तखों की कतारे झील के नैसर्गिक सौन्दर्य में चार चाँद लगा रहे थे। जैसे - जैसे झील पर शाम उतरती जा रही थी, किनारे के होटलों के लैम्पों की रोशनी झील की शांत सतह पर सुनहरी रेखायें खींच दे रही थीं। मेरी कल्पना के उड़ान ने मेरे कवि मन को कुछ ऐसे भावों से भर दिया कि ये पन्क्तियाँ मेरे मन-मस्तिष्क में छा गयीं और खुद-ब-खुद उभरकर आ गयी :

जल का विस्तार लिये है यहां पर झील।
घोल दी हो किसी ने कुदरती सी नील।।

हरी हरी घास से निकला जल का कटोरा है,
झील सुंदरी ने फैलाया सौन्दर्य का सवेरा है।

बत्तखों की पन्क्तियाँ, जल तल पर तैरती हुई।
किसके बच्चे के घर में लोरी सुनाने जा रही?

बच्चे आते बत्तखों संग खिलखिलाने के लिये।
माता पिता आते सुकून के पल बिताने के लिये।

झील के चारो ओर भ्रमण पथ है फैला हुआ।
जल राशि को छूकर ही मन चैन पाता है यहाँ।

जल राशि पर रोशनी की कतारें थिरकती हुई।
विद्युत स्तम्भों की सुनहरी रेखायें चमकती हुई।

मुझे यहाँ लग रहा है कि एक नया संसार रचा हुआ है। चारो ओर रिहायशी इलाके हैं। झील के किनारे कुछ होटल भी हैं। फिर भी झील के किनारे या कहीं भी कचरे का नामोनिशान नहीं है। यह तो मेरे लिये हैरानी की बात है। मैं श्रीनगर का डल झील देखकर आ रहा हूँ। उससे फैलाव में तो इस झील की कोई तुलना नहीं है। परन्तु सफाई और रखरखाव में डल झील इसके आगे कहीं नहीं ठहरता।
वूडब्रीज लेक के बारे में कुछ जानकारियाँ, जो मालूम हुई हैं, उसे मैं साझा करना चाहता हूँ। यह लेक दो झीलों, उत्तरी और दक्षिणी झील का एकीकृत नाम है। इसका नाम वूड ब्रिज इसे लकड़ी के पदातिक पुलों से जोडने के कारण पड़ा है। झील का रखरखाव "लेक अस्सोसियेशन" द्वारा किया जाता है। उत्तरी झील 30 एकड़ और दक्षिणी झील 24 एकड़ में फैली है। झील की अधिकतम गहराई 10 फीट है।
झील की सतह पर कोई भी तैरता कचरा रखरखाव के लिये तैनात स्कीमर नावों द्वारा तुरत हटा दिया जाता है। झील के जाल का रसायनिक परीक्षण निश्चित समय सीमा पर रेगुलर किया जाता हौ ताकि जल जीवों के जीवन पर कोई खतरा ना आये।
घरेलू इश्तेमाल के बाद साफ किया गया जल और आसपास की ढलानों से एकत्रित जल इस झील के मुख्य जल श्रोत हैं। गर्मियों में क्लोरीन परिशोधित जल राशि लगून यानि खलीज या समुद्र से आये जल के परिशोधन कुण्ड के जल से इस झील में छोड़ी जाती है।
झील में शैवालों (Algae) का फैलाव रोकने के लिये रसायनिक रंग छोड़े जाते हैं ताकि सूर्य की किरणों के प्रभाव होने वाले फोटो संश्लेषण (photo synthesis) की क्रिया को धीमा करके शैवालों के विकास को नियन्त्रित करके कम किया जा सके। गोल्डेन अल्गी यहाँ काफी पाया जाता है। वैसे यह मनुष्यों के लिये नुकसानदेह नहीं है, लेकिन यहाँ के जल जीवों के लिये हानिकारक है। उन्हें रोकने के लिये यह प्रक्रिया आवश्यक है।
इस झील के एक किनारे बालुका राशि को जमा कर समुद्री किनारे का फील दिया गया है। वहां लेक संघ के सदस्य और उनकी अनुमति से लोग बीच का आनन्द ले सकते हैं। यहाँ आम लोगों को तैरना और मछली मारना मना है। सिर्फ सदस्य गण ही आधिकारिक तौर पर इसके लिये अधिकृत हैं।
हमलोगों ने झील के हर कोने का परिभ्रमण किया। रात बढ़ती जा रही थी और उसी के साथ हमारा आनन्द भी। घर लौटना था वरना रात भर यहीं आनन्द मनाते हुये भी रात छोटी पड़ जाती।
क्रमशः 
इन तस्वीरों पर आधारित मेरे यूट्यूब चैनल पर मेरा क्रिएट किया हुआ शॉट्स देखें. चैनेल को सब्सक्राइब अवश्य करें. सादर :
https://youtube.com/shorts/BnjHfw-EZck?si=q0z0tWMY8i3Oc3YF

Tuesday, July 31, 2018

अमेरिका डायरी 07-07-2018 (यु एस ए ंंमें चौथा दिन, Day 4)

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07-07-2018, शनिवार, इरवाइन में (यु एस ए में चौथा दिन):
आज सुबह से ही मेरी पुत्रवधु मेहमानों के लिये स्वादिष्ट और लजीज़ ब्यन्जन बनाने में जुटी है। मेनू में चॉवमीन, पूड़ी, छोले आदि तो बने ही थे। साथ में सॉफ़्ट ड्रिंक की भी ब्यवस्था थी।शाम को घर पर ही जन्मदिन मनाने का निर्णय ले लिया गया था। उसके अनुसार स्थल के परिवर्तन से सम्बन्धित सूचनाएं सारे आगन्तुकों को भेज दी गयी थी।
हमलोग 6 बजे शाम को करीब 5 किलोमीटर पर स्थित माल कोस्तिको से केक लाने के लिये निकले। वहां पहुंचे तो देखा कि माल बन्द हो रहा है। तब याद आया कि आज शनिवार होने के कारण माल 6 बजे शाम को ही बंद हो जाता है। तब प्रबन्धक से जाकर मेरे लडके ने बात की। अन्दर जाकर उसने केक की डिलीवरी ली। हमलोग वापस डेरे पर चले आये।
सभी लोग तैयार हुये। मेरी पुत्रवधु ने रिषभ, जिसका जन्मदिन है, उसे तैयार किया, खुद भी तैयार हुयी। मेरी पत्नी भी तैयार हुयी। हमलोग सभी सात बजे तक तैयार हो गये थे।
क्या आप जानते हैं कि बच्चों का जन्मदिन मनाना क्यों जरूरी है? जब बच्चा जन्म लेता है तो साथ - साथ एक माँ, एक पिता का भी जन्म होता है। और उसी के साथ जिम्मेदारियों के अहसास का जन्म होता है। जिम्मेदारियों में यह भी जिम्मेदारी निहित होती है कि आप अपने बच्चे को खूब प्यार दें, सारी खुशियाँ दें, साथ ही साथ आप जब भी कहीं बच्चों को देखें, तो उनमें भी अपने बच्चे का अक्स अगर देखते हैं, तो आपकी जिम्मेदारियों का विस्तार होता है और आप एक जिम्मेदार माता-पिता से जिम्मेदार नागरिक में तब्दील हो जाते है, जो बड़ी समाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए अपने को तैयार कर रहा होता है। यह एक पूरा सृजन का दर्शन है, जो आत्मिक से होता हुआ सार्वभौम सन्सकृति का निर्माण करता है। उसी से जुडते हुये आज मैं भी अपने दादा और मेरी पत्नी दादी बनने का दिन भी याद करते हैं। मुझे याद आ रहा है, रिषभ का पहला जन्मदिन जब मैने एक कविता लिखकर सबों को सुनाई थी:

ऋषभ के प्रथम जन्म दिन पर दादाजी के उदगार...

चुलबुली आँखों में झांकते सपने,
दुआएं दे रहे तुम्हारे अपने ।

तेरी मुस्कराहटें फैलाती रहे रोशनी,
तेरी चपलताएँ चटपटी चाशनी।

तुम अपने पांवों से मुझको भी चलना सिखला दे,
उठकर गिरना,गिरकर उठना,
और सम्भलना फिर चल देना,
सारी दुनिया को, जीने का
यही तो है फंडा बतला दे।

तुम सच करना अपने सपने,
ऐसे काज जहाँ में करना,
तेरे कर्मों के प्रकाश से,
फैले उजाले सबके अंगना।

इस जहाँ में निर्भीक बनो तुम,
सर्वत्र तुम्हारी जय हो,
जन्म दिन तुम्हारा मंगलमय हो !
जन्म दिन तुम्हारा मंगलमय हो !

--ब्रजेंद्र नाथ मिश्र
तिथि: 07-07-2015, इरवाइन, यू एस ए।
शाम 7 बजे से आमन्त्रितों का आना शुरु हो गया। उनमें अशीष, मधुबनी विहार के, फिलहाल माता -पिता पटना में निवास कर रहे है, हर्ष मेरठ के, प्रणव दिल्ली के और अमर आन्ध्र प्रदेश के अपनी पत्नी और बच्चों के साथ आये। 9:00 बजे केक काटने की औपचारिकता के साथ हैप्पी बर्थ डे गीत गाये गये। कुछ और हिन्दी गाने जैसे "बार बार दिन ये आये, बार बार दिल ये गाये, तुम जियो हजारों साल, ये मेरी है आरजू,,,," और अन्य गीत भी बजाए गये। सॉफ़्ट ड्रिंक्स कोक के बाद चाऊमीन और मंचूरियन, पूड़ी, छोला और और फ्रायड राइस का भी ऑप्शन था। खाना समाप्त होते - होते करीब 10 बज गये। उसके बाद मेहमानों के धीरे धीरे जाने का समय हो गया। गिफ्ट देते हुये और रिटर्न गिफ्ट लेते हुए मेहमान सभी विदा हुये।
ज्ञातब्य हो कि एक और करीबी मित्र बाला जी अपनी पत्नी और बच्चे के साथ दो दिनों बाद आये। उस दिन उनकी बेटी को आंख में कन्जेच्टीवीटीज होने के कारण नहीं आ सके थे।
क्रमश:


Friday, July 27, 2018

अमेरिका डायरी 05-07 और 06-07-2018 (यु एस ए ंंमें दूसरा और तीसरा दिन)

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05-07-2018, दिन वृहस्पतिवार (यु एस ए में दूसरा दिन)
मेरे पोते का जन्मदिन परसो यानि 07 जुलाई को है। उसकी पूर्व तैयारियों की शुरुआत आज से ही हो जानी है। सुबह तो चिन्मय ऑफ़िस चला गया। 9 बजे ऑफिस पहुंचना होता है।
मैं जिस घर में और जिस परिसर में ठहरा हुआ हूँ, वहाँ की व्यवस्था और रखरखाव का अवलोकन करने लगा। यहाँ करीब 1000 युनिट हैं। दो तरण ताल ( स्वीमिंग पूल), एक थोड़ा छोटा और दूसरा बडा। उसी बड़े ताल के बगल में लीजिन्ग ऑफ़िस, जो रखरखाव से लेकर आबंटन आदि की सारी बैधानिक प्रक्रिया को देखता है, स्थित है।
सारे युनिट निम्न तल, मध्य तल और उच्च तल, तीन ही तलों के हैं। सभी रिहायसी घर लकड़ी के बने हैं। बीच में पिलर भी होगा, लेकिन उन्हें भी लकड़ी से ढंक दिया गया है। इस लकड़ी के पैनल पर स्प्रे से ऐसा पेन्ट चढ़ाया गया है कि बाहर से लगता है कि सीमेन्ट की ही दीवार है। परन्तु ठोकने पर पता चलता है कि यह तो लकड़ी है। लकड़ी की दीवारों के बीच ही बिजली के तार हैं, डर लगने की तो बात है। मैं बताता चलूं कि यह क्षेत्र अनावृष्टि क्षेत्र (arid zone) में पड़ता है, फिर भी गरम और ठंढा दोनों तरह के जल की आपूर्ति प्रचुर मात्रा में है। यही नही, यहाँ चारो तरफ हरियाली है। देवदार के वृक्ष काफी संख्या में लगे हैं। बीच बीच में पार्क हैं। बच्चों के खेलने के लिये स्लाइड्स और स्विंग्स (झूले) लगे हैं। हर पार्क में चारों तरफ वृक्ष और बीच में हरा-भरा मैदान। पीने का पानी का भी इन्तजाम और प्रसाधन कक्ष भी हैं। किसी - किसी पार्क में बास्केट बाल और लॉन टेनिस के मैदान भी देखने को मिले।
मैं यहाँ की हरियाली का फैलाव देखकर मंत्रमुग्ध था। जिस क्षेत्र में औसतन 364 mm वारिश सिर्फ साल में 40 दिन ही होती हो, बाकी दिन बारिश बिल्कुल नहीं होती हो, वहाँ जल की आपूर्ति के लिये बारिश पर तो निर्भरता बिल्कुल नहीं हो सकती है। फिर इतनी हरियाली कैसे रह पाती है? इसकी पड़ताल हो जाने पर, मैं अपने आगे के दिनों की डायरी में लिखूंगा।
आज पूरा दिन सोने में बीता। शायद जेट लैग और कल की अनिद्रा के कारण हो।
शाम में, यहाँ 8:30 तक उजाला ही है। इसलिये उस समय तक शाम ही रहती है। रातें अभी छोटी हो रही हैं। हमलोग नजदीक के पार्क में गये, जिसे जन्मदिन के स्थल की उपयुक्तता के बारे में विचार करना था। मैने पूछा कि कितने लोग भाग लेंगें? तो उसने कहा कि दस परिवार, यानि 20 पुरुष-स्त्री मिलाकर और उनके छोटे बच्चे। जन्मदिन मनाने के लिये केक आदि और मेहमानों के लिये डिनर का सामान, सबकुछ कार में डालकर ले आएंगे, जन्मदिन मनाएँगे और वापस चले जायेंगें। मुझे वैसे पार्क में मनाना कुछ अटपटा सा लगा , लेकिन फिर लगा कि लोग मनाते हैं, तो मनाने में कोई हर्ज नहीं।

क्रमशः

06-07-2018, शुक्रवार, इर्वाइन में (यु एस ए में तीसरा दिन)

आज चिन्मय ने छुट्टी ले रखी है। मौसम के अनुमान के अनुसार आज और कल तापमान 40 डिग्री तक रहने की सम्भावना है। ऐसे में कल क्या पार्क में जन्मदिन मनाना ठीक रहेगा? कुछ आगन्तुकों के 4 महीने के भी बच्चे है। इस भीषण गर्मी में क्या पार्क में वे अपने इतने छोटे बच्चों के साथ आ सकेंगें।? इसपर विचार कर ही रहे थे, कि इसके एक मित्र का फोन आ गया कि वह तो अभी न्यू यार्क में है। 4 जुलाई को अमेरिकी स्वतन्त्रता दिवस की छुट्टी इसके बाद 5 और 6 यानी बृहस्पतिवार और शुक्रवार को छुट्टी ले लेने पर शनिवार और रविवार को सप्ताहांत की छुट्टी के साथ, 5 दिनों की छुट्टियों में परिवार सहित जाया जा सकता है। सही है, ऐसे मौके कम ही मिलते हैं। उसमे चिन्मय के कई दोस्त जो जन्मदिन के अवसर पर आनेवाले थे, अनुपस्थित हो जायेंगें, इसकी सम्भावना प्रबल हो गयी। ऐसे में घर में ही ए सी चलाकर, गर्मी को मात देते हुये एक कृत्रिम खुशनुमा मौसम का निर्माण किया जा सकता है। तय हुआ की घर में ही मनाया जाय!
हमलोग पास के कोस्तिको और वल्ल्मार्ट मॉल गये। वहाँ से जन्मदिन के लिये आवश्यक सामानों, मसलन बैलून, उसे फुलाने वाला पम्प, और खाने के अन्य सामान्य के साथ, एक बडा क्रेट छोटे छोटे पकेज्द पानी बोतलों का लिया गया। एग्लेस्स केक की खोज करने पर कोस्तिको और वॉल मार्ट में निराशा ही हाथ लगी। हमलोगों ने वहाँ जाने के लिये रुख किया जहां इंडियन समान मिलते हैं। वहाँ पर भी एग्ग्लेस केक के छोटे साइज़ की भी कीमत कफ़ी थी। उसके लिये भी 4 दिन पहले ओर्डर किये जाने की बाध्यता थी, जिसके लिये अभी समय नहीं था। इसलिये अन्ततः हमलोगों ने कोस्तिको में ही जाकर ओर्डर किया, बडा सा केक। केक की डिलीवरी कल लेनी थी।
आज रात को जैसे ही गीत " हम भी अगर बच्चे होते, नाम भी मेरा होता गब्लू, बबलू,,," बजा, मेरा पोता रिषभ छूटकर डांस किया, जिसका वीडियो मैं यू टयूब पर डालूंगा। आनन्द आ गया। मैने अपने बच्चों का बचपन तो इतने करीब से देखा भी नहीं, या देखा भी होगा तो याद करने लायक जो भी रहा होगा, वह कुछ याद नहीं। यहाँ सचमुच आनन्द के क्षणों को जीने का मौका है, और उसके हर पल को मैं जीना चहता हूँ।
क्रमश:


Wednesday, July 18, 2018

अमेरिका यात्रा, 04-07-2018, होंग कोन्ग से लॉस एन्ँजल्स (दूसरा दिन)

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ता: 04-07-2018, होन्ग्कोन्ग से लॉस ऐंजल उड़ान पर:







ता: 04-07-2018, होन्ग्कोन्ग विमान तल पर लॉस ऐंजल के लिये उड़ान पर:
पिछले पोस्ट में मैने होन्ग्कोन्ग विमान तल के लाउंज में मोगा, पंजाब की आदरणीया किरणबाला जी के साथ बातचीत के दौरान उनकी जिन्दगी के संघर्षो से रुबरु करवाया।
लाउंज का ए सी इतना इफेक्टिव था कि मुझे थोड़ी ठंढ भी लग रही थी। मुझे अपना जैकेट ले लेना चाहिये था। परन्तु L A में रह रहे मेरे लडके ने कहा कि वहाँ अभी गर्मी का मौसम चल रहा है। इसलिये जैकेट लेने की कोई जरूरत नहीं है। मैने जैकेट नहीं ली। लेकिन यहां जब ठंढ नाकाबिलेबर्दास्त होने लगा, तब मुझे अपने जैकेट नहीं लेने का अफसोस जरूर होने लगा। लेकिन आश्चर्य तो तब हुआ, जब इस कम तापमान में भी कई यात्री कम कपड़ों में दिखी। ऐसी ही एक यात्री अपने मैस्कुलिन जेंडर के साथ मेरे बाजू वाली कुर्सी पर आकर बैठी। ना चाहकर भी कभी - कभी मेरी नजर उधर उठ जाती थी। इसे मेरे पास कुछ करने के लिये कुछ नहीं होने के खालीपने के हावी होने का असर भी मान सकते है। मुझे एक लेखक की पक्तियाँ याद आने लगीं: "ईश्वर की सृष्टि पर अगर आपकी दृष्टि जाती है, तो यह उन्हीं के द्वारा प्रदत्त स्वभावजन्यता के कारण है। वही दृष्टि, ब्यष्टि में डूबते हुए, समष्टि में विस्तार ग्रहण करती है। उस दृष्टि को बनाये रखना चाहिये।" उस लेखक का नाम पता करने की कोशिश में लगा हूँ। पता होते ही पता दूंगा। इस बार नजर घूमी तो उन मोहतरमा ने अपने खुले हिस्से को बड़े तौलिया से ढँका हुआ था। ऐसा उन्होने घूरती हुयी बुरी नजरों से खुद को महफूज रखने के लिये तो नहीं ही किया था। इससे यह साबित होता है कि अगर छोटे- छोटे कपड़ों में भी आप फैशन परेड की तरह घूमते रहते हैं, तो दर्शनार्थी नजरों की गर्माहट भी ए सी की नर्माहट को कम कर देता है।
स्थानीय समय के अनुसार करीब 2 बज चुके थे। मैने डिस्प्ले बोर्ड पर देखा कि हमारी फ्लाइट की गेट संख्या दी जा चुकी है। हालाँकि उड़ान समय 4:55PM स्थानीय समय के अनुसार था, फिर भी हमलोगों ने चलकर बाकी के इन्तजार का समय बोर्डिंग गेट के पास ही बिताना उचित समझा। आदरणीया किरणबाला जी ने इस थोडी देर के साथ के लिये आभार प्रकट किया। इन्तजार का वक्त बिना बोर हुये कट गया, या कहें कि कैसे कट गया पता ही नहीं चला।
वहाँ से उसी तल पर मैं और मेरी पत्नी अपने हैण्ड लगेज़ के साथ सुरक्षा जांच के लिये बढे। वहाँ से गुजर चुकने के बाद उसके नीचे तल पर एलिभेटर से गये। वहाँ एक टनेल ट्रेन, यानि चार डब्बों की मैट्रो ट्रेन हमलोगों को लेकर 40-80 गेट के सामने खड़ी हो गयी। वहाँ उतर गये। सिस्टम ऐसा था कि मैट्रो ट्रेन का गेट खुलता था, तभी ट्रेन के बाहर का गेट भी खुलता था। हमलोग बाहर आ गये। वहाँ से ऊपर की ओर जाने वाली स्वचालित सीढियों से ऊपर आ गये। वहाँ आकर डिस्प्ले बोर्ड पर देखने लगे, तो पाया कि हमारी उड़ान संख्या के सामने कोई गेट नम्बर नहीं दिख रहा था। हमें पता चल गया कि यहाँ भी भारतीय रेल में जैसे पूर्व घोषणा को कभी-कभी अन्तिम समय में ट्रेन आने के ठीक पहले बदलकर प्लेटफॉर्म संख्या बदल दी जाती है, वैसे ही यहाँ भी हो सकता है।
या हो सकता है कि मेरे जैसे भारतीय के उड़ान में बैठने की सीट तो आबंटित हो गयी, परन्तु अन्तिम समय तक कुछ तो ऐसा होना चाहिये ताकि हमें यहां भी थोड़ा भारतीय सिस्टम की फीलिंग हो। हमलोग सजग थे, क्योंकि अन्तिम समय के उलट फेर को अपनी रेल यात्रा के दरम्यान भारत में झेल चुके थे। लेकिन हमारी यह गलतफहमी ज्यादा देर नहीं कायम रह सकी। 20 मिनट के इन्तजार के बाद ही गेट संख्या प्रदर्शन पट (डिस्प्ले बोर्ड ) पर आ गयी। हमने 47 नम्बर गेट के तरफ अपना रुख किया। अभी भी उड़ान के लिये सवा घन्टे बाकी थे। वहाँ हमलोग इन्तजार करते हुये, शीशे से घिरे पूरे हाल के बाहर देखने लगे। कैथे पैसिफिक लिखा एक बडा-सा विमान दिखाई दिया। शायद यही विमान हो, जिसमें हमें एल ए (लॉस ऐंजल) की उड़ान के लिये स्थान ग्रहण करना हो। मैने तुरत उस विमान की तस्वीर उतारी। कुछ देर बाद बिना कोई घोषणा के मैने देखा कि वहाँ के स्टाफ यात्रियों को पन्क्तिबद्ध करवा रहे हैं। मैने पूछा कि उड़ान संख्या CX 822 के यात्रियों को पन्क्तिबद्ध करवाया जा रहा है, क्या। उसने जवाब दिया, 'यह लाईन बिसिनेस क्लास के लिये है। अभी एकोनोमी क्लास के लिये लाईन लगनी शुरु नहीं हुयी है।'
यहाँ भी वर्ग विभाजन ? हम उस देश में हैं, जहां माउ त्से तुन्ग ने वर्ग विहीन समाज व्यवस्था के सपने देखे थे और चीन को उसकी प्रयोग स्थली बनायी थी। आज पाश्चात्य देश ब्रिटेन से उन्हें होन्ग कोन्ग क्या मिला, उनकी आत्मा को घायल करने वाली एक व्यवस्था सौप दी, जिसमें ब्यापार और बाजार मुख्य था, जिसमें वर्गों में वर्गीकृत करना व्यवस्था के चलाये जाने के लिये जरूरी था। माओ की आत्मा को लहुलुहान कर आज चीन को आधुनिक रंग देकर बाजार से जोड़ने का काम उन्हीं के महारथी कर रहे हैं। माओ की कब्र पर चीन बाजारवाद की बदलाव स्थली बन रहा है।
थोड़ी देर बाद इकोनामि क्लास के लिये भी लाईन लगनी शुरु हो गयी थी। हमलोग ऐसी किसी घोषणा का इन्तजार कर रहे थे, जैसे कोलकता में की गयी थी। इसी इन्त्ज़ार में जब लाईन काफी लम्बी हो गयी, तब हमलोग पूछकर लाईन में लगे। कोलकता की तरह यहां घोषणा शायद इसलिये नहीं की गयी हो कि एक तो दिन का समय था, इसलिये यात्रियों के जागे रहने की अपेक्षा की जा रही होगी। दूसरे अगर घोषणा करने की सोची भी जाय तो किस भाषा में की जाय। यहाँ तो दुनिया के हर हिस्से से यात्री आये हुये है। कोई जरूरी नहीं कि जैसे हम भारतीयों को अन्ग्रेजी समझने में सुविधा और बोलने से प्यार है, सबों को ऐसा ही हो।
धीरे-धीरे हमारी लाईन भी आगे की ओर खिसकने लगी। गुफानुमा रास्ते से गुजरते हुए, हम जैसे ही विमान में अन्दर घुसने वाले थे, हमलोगों का बैग खोलवाया गया, और फिर सुरक्षा जांच हुयी। हैण्ड लगेज खोलवाकर देख रहे थे। जिनके हैण्ड लगेज़ में पानी की बोतल भी थी उसे गिराकर खाली कर दिया गया। कोई भी द्रव पदार्थ अन्दर ले जाना वर्जित था। प्लेन के प्रवेश द्वार पर ओठों पर लाली लगाई हुयी आतिथ्य बालिका ने मधुर मुस्कान के साथ विमान के अन्दर आने का स्वागत किया। सुरक्षा जांच के खुरदरे अनुभव से गुजरने के बाद यह व्यवहार मुलायम मरहम की तरह सुकून देने वाला था।
यह विमान काफी बड़ा था। हालाँकि विमान एक ही तल में फैला था। पर एकोनोमी वर्ग में 3-3-3 सीटों का रो था। यानी एक क्षैतिज कतार में नौ सीटें थी। विमान में संभवतः यात्री और क्रू मेम्बर मिलकर साढ़े तीन सौ की संख्या होगी। हमारी सीट 69 B (मध्य) और C (किनारे, aisle ) थी। खिड़की वाली सीट पर एक लड़की आकर बैठी। वह मलेशिया से आ रही थी। इस विमान में संभवतः मलेशिया, इन्दोनेशिया, सिंगापुर के अलावा कोरिया, फिलीपीन और चीन या होंग कोन्ग के यात्री अधिक थे। कुछ अक्सर विमान यात्रा करने वाले या वाली भी थे, क्योंकि वे कपड़े वाली चप्पलों, टैब और आंखों पर बांधी जाने वाली पट्टियों  और गर्दन को सहारा देने वाले अतिरिक्त कुशन के साथ थे। विमान की यात्रा करीब साढ़े तेरह घन्टे की थी, इसलिये सारे इंतजामात के साथ यात्रा को सुखद बनाने का प्रयास सही ही था।
यह विमान काफी आधुनिक लगा। पूरी तरह साउंड प्रूफ। विमान के उड़ान भरने के समय इंजन के कर्ण बेधक स्वर की कर्कशता सुनाई नहीं पड़ी। विमान ने करीब 20 मिनट विलम्ब से उड़ान भरी। कुछ ही मिनटों में हमलोग समुद्र तल से 35000 फीट से अधिक की उंचाई पर पहुंच गये। विमान के बाहर का तापमान -54 डिग्री सेंटीग्रेड बताया गया।
इस विमान में सीट के सामने ही छोटी सी सतह-स्पर्श -चालित (टच स्क्रीन) टीवी लगी थी। इससे विमान की स्थिति का पता लगाया जा सकता था। साथ ही मनपसन्द गाने या मूवी का आनन्द उठाया जा सकता था। हमलोग तो नीन्द से जूझ रहे थे। विमान के स्थिर होते ही, विमान आतिथ्य बालाओं ने पहले एप्पल जुस और उसके बाद पैक में हमलोगों के लिये शाकाहारी नास्ता या रात्रि भोजन के रूप में पास्ता, आइस्क्रीम, चोकोलेट, फ्रुट सलाद आदि लाया गया। उसका आनन्द लिया गया।
हमलोग अपराह्न उड़ान भरे और तेरह घन्टे से अधिक हवा में उड़ने के बाद भी अपराह्न ही पहुंचने वाले थे। रात तो होनी ही नहीं थी। पूर्व से पश्चिम की यात्रा में दिन की तारीख वही रहती है, क्योंकि टाईम जोन पीछे हो जाता है, घड़ी पीछे करनी होती है।
विमान अपनी गति करीब 574 मील प्रति घन्टे की रफ्तार से उड़ा जा रहा था। जब भी विमान के पथ में किसी व्यवधान के कारण कभी-कभी ज्यादा हिलना डुलना होता था, तो सीट बेल्ट बान्धने की घोषणा होती या सिग्नल आ जाता।
हमलोग विमान से उड़े जा रहे थे। विमान का पथ सीट के सामने के छोटे स्क्रीन पर दिखता था। विमान प्रशान्त महासागर के ऊपर के आसमान को चीरता हुआ बढ़ता जा रहा था। नीचे अथाह समुद्र का नीला जल और ऊपर नीले असमान का असीम, अनन्त विस्तार। हमलोग इस महान सृष्टि में कीड़े से भी छोटे हैं। अपनी लघुता को ही भूलने की भूल करके अहंकार को व्यापक बनाते रहते हैं। उस अनन्त के अनन्त वितान में आश्रय लेने के प्रति कृतज्ञता के भाव को भी भूलते जाते हैं।
काफी देर उड़ चुकने के बाद, इजाजत के बगैर भी खिडकी के पास बैठी लड़की से अनुरोध करके खिड़की खोलकर खिड़की के पार जो हमलोगों ने झाँका तो एक दूसरा ही नज़ारा खुला था, कि हमारी आंखें खुली रह गयीं। ऐसा लगा जैसे लिहाफ  की सफेद रुई  किसी ने बिखरा दी  हो। वही सफेद रुई बादल के रूप में फैल गयी  हो और हमारा विमान उसके ऊपर टंगा हो और बादल उसे उड़ाये ले जा रहा हो।
हमलोग बीच बीच में एप्पल जुस लेते रहे। मदिरा के चाहकों के लिये विभिन्न तरह के गर्म पेय उपलब्ध थे। उसका लाभ उन्होने उठाया। लॉस ऐंजल्स के समय के अनुसार करीब 3 बजे हमलोगों के लिये एक और भोज्य पदार्थ पेश किया गया। इस बार खिचड़ी थी और सलाद, चाकलेट भी थे। साथ साथ एप्पल जुस या कोक जो चाहे ले सकते थे। मेरी पत्नी करीब दो घन्टे पहले चाय, जो नेचुरल टी जैसी थी, बगल में ही कीचेन से माँगकर ले आई थी।
इसतरह विमान आतिथ्य सेवा का लाभ उठाते हुये ठीक समय यानि 4:10 PM, स्थानीय समय के अनुसार विमान लॉस ऐंजल्स विमान तल पर उतरा। कैसा आश्चर्य है, हमलोग 4:55 PM होन्ग्कोन्ग समय के अनुसार वहां से चले और उसी दिन यहां 4:10PM पर पहुँच गये। समय की गति के कोड को डिकोड करने की कोशिश कर रहे थे।
विमान से बाहर निकलकर हमलोग एक बस में सवार हो गये। बस से हमें विमान तल के मुख्य परिसर में लाया गया। वहाँ हमें एक बार फिर सिक्योरिटी और इम्मिग्रेसन चेक से गुजरना था। हमलोग पंक्ति बद्ध होकर अपने पासपोर्ट हाथ में लिये हुये, बढते हुये एक ए टी एम की तरह मशीन के पास पहुंचे। वहां अपने पासपोर्ट के वीसा पेज को खोलते हुये जैसे ही निर्धारित स्लॉट मे डाले, कुछ प्रश्नों के उत्तर कम्प्युटर स्क्रीन पर देने थे। उन्हें सही सही देने के बाद एक पर्ची निकली जिसपर हमारी वीसा वाली तस्वीर थी। इसे लेकर हम आगे बढ़े तो सुरक्षा कर्मचारी ने इमिग्रेशन अधिकारी के पास जाने को कहा। उसने पासपोर्ट और हाथ की पर्ची देखकर अपने रिकॉर्ड से मिलाया, कुछ प्रश्न पूछे कि आपलोग कहां ठहरेन्गें, यहां कबतक रहेन्गें आदि, आदि। हमारे जवाब से संतुष्ट होने के बाद उसने पर्ची पर अपनी मुहर लगायी। हमलोग आगे लगेज़ क्लेम के लिये CX 822 फ्लाइट वाले कन्वेयर की ओर बढे। वहाँ हमारे सारे सूटकेस मिल गये। उन्हें हमने ट्रॉली पर सजाया और बाहर निकलने के लिये लगी लम्बी लाईन में लग गये। बाहर निकलने के गेट पर पर्ची ले ली गयी। बाहर निकलते ही मैने अपने लड़के चिन्मय को इन्तजार करते पाया। साथ में मेरी पुत्रवधु और मेरा पोता भी आया हुआ था। पारिवारिक मिलन सम्पन्न हुआ। स्थानीय समय के अनुसार करीब 5:45 PM का समय हो चुका था।
क्रमश:

अमेरिका यात्रा, होंग कौंग हवाई अड्डे पर, 04-07-2018 (प्रथम दिन आगे)

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04-07-2018, होंग कोन्ग हवाई अड्डे पर लॉस ऐंगल के प्लेन पर चढने तक इन्तजार:

विमान टर्मिनल 1 पर उतर गया था। हमलोग विमान से जैसे ही बाहर निकलकर गुफानुमा रास्ते से बाहर निकल कर एयर पोर्ट के भवन में आये, यहां की विशालता का आभास हो गया। हमलोगों को बिना बाहर निकले दूसरी फ्लाइट का इन्तजार करना था, इसलिये हमलोग ट्रांसफर यात्री के वर्ग में आते हैं। हमें लॉस ऐंगल के फ्लाइट के लिये करीब आठ घन्टे इन्तजार करना था।
होंग कोन्ग अन्तरार्ष्ट्रीय विमान स्थल करीब 1,255 हेक्टेयरमें फैला हुआ है। इस एअरपोर्ट पर 90 बोर्डिंग पॉइन्ट हैं। इनमें 78 जेट ब्रिज गेट हैं औरं 12 गेट अस्सेम्ब्ली पॉइन्ट हैं। इस विमान तल को चेक -लैप- कोक एअरपोर्ट भी कहा जाता है। पुराने एअरपोर्ट का नाम काई-टाक एअरपोर्ट था। यह नया एअरपोर्ट 1998 में चालू हुआ था। इसे 1997 में ही ब्रिटेन के द्वारा होन्ग कोन्ग द्वीप को चायना को सौंपे जाने के पहले ही इसे पूरा किया जाना था, लेकिन किसी कारण वश इस प्रोजेक्ट के पूरा होने में विलम्ब हुआ और 1998 में इसे पूरा किया जा सका।
टर्मिनल 1 करीब 5,70,000 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ( दुबई और बीजिंग के बाद) टर्मिनल है। इस एअरपोर्ट की काफी जमीन समुद्र से हासिल की हुयी है। यहां कैथे पैसिफिक एयर लाइन्स का हेड क्वार्टर भी है।
मैं अपना बैक पैक लिये हुये पत्नी के साथ इस टरमिनल के इस तल से उस तल पर निरुद्देश्य चलते रहे। यह टर्मिनल 7 लैवल का बना हुआ है। हमलोग पूछते हुये एक स्थान पर पहुंचे जहाँ फ्लाइट के बारे में कुछ सूचनाएँ दी जाती थी। यहाँ E 1 लिखा था। यहाँ पर कैथे पैसिफिक के अतिरिक्त अन्य फ्लाइट के बारे में सूचनाएँ उपलब्ध थीं। वहाँ पूछने पर पता चला कि कैथे पसिफिक के बारे में सूचना E 2 डेस्क पर उपलब्ध थी। मैंने उस डेस्क पर सेवा रत डेस्क बाला से पूछा कि मेरा लॉस ऐंंजल के लिये 4:55 PM में उड़ान है, तो उसके लिये सेक्युरिटी चेक और बोर्डिंग आदि किस गेट पर होगा। मैने अन्ग्रेजी में पूछा था। उसने चायनीज ऐकसेन्ट में जिस तरह से जवाब दिया, उसमें से अन्ग्रेजी के शब्दों को चुनना पड़ा और खुद से अर्थ खोजना पड़ा।
वहां पर करीब 7 घन्टे का ठहराव था, तो हमलोगों को कोई सुविधाजनक कोना ढूढना था, जहाँ से प्रसाधन और पान- साधन (जल पान साधन) दोनों नजदीक हो। एक वैसा ही कोना ढूढकर हम आराम दायक कुर्सी पर विराजमान हो गये। नींद धीरे - धीरे हावी हो रही थी। बस झपकियां ही ले सकते थे। पैर फैलाकर आरामदेह स्थिति प्राप्त करना मुश्किल था।
कहा जाता है कि इतने बड़े विमान विश्रामागार को चलाने और साफ-सफाई पर ध्यान रखने के लिये करीब 65000 लोग काम पर दिन रात लगे रहते है। इतने लोग लगे हैं, इसीलिये यह पूरा स्थल साफ है या इतने लोग अपने काम के प्रति समर्पित ढंग से लगे हैं, इसलिये यह स्थान साफ सुथरा है, यह हमलोग जैसों के लिये, जो अत्यधिक और निरन्तर सफाई देखकर असहज होने लगते हैं, चिन्तनीय विषय हो सकता है, परन्तु यहाँ तो जैसे सबकुछ किसी अदृश्य शक्ति के द्वारा स्वप्रेरणा से सहज ही सम्पन्न होता दिख रहा था। सफाई के स्तर की तुलना अगर की जाय तो कोलकता का भी हवाई अड्डा कोई कम नहीं था। अब यहाँ पर यह सोचने पर विवश हो जाना पड़ता है कि हमलोग वही भारतीय हैं, जो विमान स्थल को इतनी सुन्दरता से रख रखाव करते हैं। वही अपने शहर, गली, मुहल्ले के रखरखाव पर इतने उदासीन क्यों हो जाते हैं? क्या अंतरराष्ट्रीय अतिथियो के स्वागतार्थ, पलक पांवड़े बिछाये हुये "अतिथि देवोभव" की भवना से ओतप्रोत विमान स्थल को टिप टौप रखना हमें अच्छा लगता है? और वही जब स्वयं जीने के लिये अपने गली, मुहल्ले, शहर में रहना होता है, तो वे सारे मानक ताक पर रख दिये जाते हैं।
हमलोग अपने विश्राम के स्थान पर बनी आरामदेह कुर्सियों पर विराजमान हो गये। रात की कच्ची नींद, झपकियाँ आनी शुरु हो गयीं। इतने में मेरी पत्नी की बगल वाली सीट पर सलवार सूट में एक महिला बैठी। कफ़ी देर तक इन्तजार किया, तो भी उन महिला के साथ किसी पुरुष को नही देखा। अब थोडा आश्चर्य होना स्वाभाविक था। पत्नी ने संवाद स्थापित करने की पहल की। दो भरतीय स्त्रियां अगर पास पास बैठी हो और उनमें अगर कोई संवाद नहीं हो, तो समझ लेना चाहिये कि या तो दोनों गूँगी है, या एक गूँगी और दूसरी बहरी हैं।
स्वभावतः कहां से हैं, से शुरु होकर बच्चे कितने है, कहां-कहां हैं, घर में और कौन- कौन है, और अंत में हस्बेन्ड क्या करते हैं?
तक बातें बढती ही जाती है और खत्म होने का नाम नहीं लेती। मैं भी ये बातें सुन रहा था जो उनमें हो रही थी। वो मोगा पंजाब की थी। न्यू ज़ीलैण्ड से लौट रही थीं। दिल्ली के फ्लाइट का इन्तजार कर रही थी, जो छ: बजे थी। धीरे-धीरे उन्होने अपनी कहानी के बिन्दुओं को सामने लाना शुरु किया, तो मुझे लगा कि हर शख्स की जिन्दगी यहां एक कहानी लिख रही हौ। उन्होने उस समय अपने पति को एक आकस्मिक दुर्घटना में खो दिया था, जब उनके बच्चे छोटे-छोटे थे। क्या किया जाय कुछ समझ नहीं आ रहा था? जब विपत्ति आती है तो रिश्तेदार भी किनारे हो जाते हैं। कोई खबर भी नहीं लेना चाहता, डर से कि ऐसा ना कुछ मांग बैठे। उन्होने अपने को दिलासा दिया, मजबूती दी।
सिलाई का काम शुरु किया। जो कुछ पैसे बचे थे, उससे लुधियाना से सुबह ही स्वयं जाकर सिलाई के सामान खरीदती। लोगों के कपड़े लाती, दिनभर घर का काम करते हुए ही, बच्चों को संभालते हुये सिलाई करती। धीरे-धीरे उनके इस हुनर में निखार आता चला गया। पैसे भी आने शुरु हो गये। पति के हिस्से की प्रॉपर्टी पर जेठ कुन्डली मारकर बैठ गया। उन्होने उसके प्राप्त करने के लिये जरूरी संघर्ष को स्थगित कर किनारे रखा और अपने बच्चों की पढाई पर ध्यान दिया।
बच्चे पढ़ने में अच्छे निकले। बड़ा लड़का चण्डीगढ से आई टी में डिग्री लेकर अभी न्यू ज़ीलैण्ड में कार्यरत है। वहीं से वह आ रही थी। मोगा में अपना बूतिक बना लिया था। सिलाई सिखाने की कक्षायें भी चलाती थी। छोटी बेटी कनाडा में पढाई कर रही थी। इतनी कहानी सुनते-सुनते हमलोगों को उनका नाम पूछना भी याद नहीं रहा। फिर मैने अपना विज़िटिंग कार्ड देते हुये उनका नाम पूछा। किरणबाला नाम था उनका। हमलोगों ने अपना कूकिज उनके साथ साझा किया। इन्तजार का वक्त इतनी संवेदना से ओतप्रोत अनुभवों से गुजरते हुये बीतेगा, सोचा ना था।
(होंग कोन्ग विमान तल पर बिताये गये कुछ और पलों के अनुभवों और वहां से उड़ान भरकर लॉस ऐंगल पहुंचने का वृतान्त अगले पोस्ट में )
क्रमशः 

Tuesday, July 17, 2018

अमेरिका यात्रा 04-07-2018, मिड नाइट 01:15 AM (पहला दिन)

#BnmRachnaWorld
#americatourdiary
04-07-2018, मिड नाइट, 01:15 (पहला दिन)


इतने में करीब 12 बजकर 30 मिनट में रात्रि में घोषणा हुई कि कतार संख्या 40 से 50 तक प्लेन में प्रवेश के लिये आगे बढ़ें।
हमलोग नींद से जगे और एक दूसरे को झकझोर कर जगाये। तब पूरी तरह हावी नीन्द को अनहावी कर सके। मैं जल्दी से कोलकता के अन्तरार्ष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रसाधन का उपयोग करके आया। यह जरूरी था, क्योंकि इस सुविधा के प्रयोग का मूल्य भी टिकट के मूल्य में निहित होता है, इस विचार से नहीं, बल्कि जरूरत के कारण होकर आया। उसी तरफ उंची धार से निकलने वाले झरनेनुमा नल से पेय जल का भी पान किया। हमलोग कोई खाली बड़ी या छोटी बोतल साथ में नहीं रख सके, इसका अफसोस होने लगा। पूरे लाउंज में स्थित दूकानों में शराब की बोतलें नजर आईं, मगर पानी की बोतल उतनी जल्दी कहीं नहीं मिली। खुद को इस आश्वासन के साथ कि प्लेन में तो पीने के लिये बोतलें मिलेगीं, उसी को आगे प्रयोग के लिये रख लिया जायगा, आगे बढ़ चले।
इसके बाद हमलोग गेट संख्या 8 से अन्दर के तरफ घुसे। वहाँ से तिरछी ढलान पर आदम कद गुफा से होकर गुजरने जैसा अनुभव हो रहा था। लेकिन यह गुफा आधुनिकतम विद्युत सज्जा से सुसज्जित था और नीचे कार्पेट भी बिछा हुआ था। मैने दरी के स्थान पर कार्पेट शब्द का खासतौर पर प्रयोग किया, क्योंकि प्लेन में जब धरती से ऊपर उठने की तैयारी कर रहे हों, तो 'दरी' जैसे शब्द को जुबान पर लाकर और प्लेन में साथ ले जाकर देशीपने से क्या बँधकर घुसेन्गें? हमलोगों में यह इच्छा रहती है और अभी यह ट्रेंड जोर पकड़ता जा रहा है, कि जब धरती से उपर उठने की तैयारी होती है, तो देशीपन को एक केंचुल की तरह समझा जाता है, और उतार कर फेंक देने से ही उड़ने का मज़ा आता है। यही नहीं कहीं विदेश या देश में ही किसी जगह प्लेन से उड़कर अगर आये हों, तो और लोगों के सामने इसका कई बार जिक्र करने से नहीं चूकते मसलन 'अपनी अमेरिका यात्रा या फलां जगह जब मैं विमान से नहीं कहकर प्लेन से गया था, तो,,,आगे ब्ला ब्ला,,,। यानि हर वाक्य के आगे या पीछे इस वाक्य को प्रसंगवश या अप्रसांगिक तरीके से भी लगाना नहीं भूलते, ताकि अपनी विशिष्टता को लोगों के सामने प्रमाणित कर सकें। यह एक रोग की तरह अपना फन फैलाते जा रहा है। मेरे एक मित्र हैं। अगर मैने कहा कि फलाँ जगह मैं राजधानी या दुरन्तो जैसे विशिष्ट रेल सेवा से यात्रा की थी, तो वे पहले पूछेन्गें कि किस दर्जे में मैने यात्रा की थी? अगर मैने कहा कि मैं तो थर्ड ए सी में था, तो उनका झट से उत्तर होगा,
"अच्छा, आप थर्ड ए सी से गये थे, मैं तो सेकेन्ड या फर्स्ट ए सी से नीचे यात्रा करता ही नहीं हूँ। "
अगर मैने कहा कि फर्स्ट ए सी से यात्रा की थी, तो वे कहेंगे, "अच्छा, आप सेकण्ड या फर्स्ट ए सी से गये थे, मैं तो प्लेन से ही आता जाता हूँ। "
अगर मैने कहा कि मैं तो प्लेन से वहाँ गया था। तो वे झट से पूछेन्गें, " एकोनोमी क्लास में गये थे या बिसिनेस क्लास में।"
अगर मैने कह दिया कि मैं तो ईकोनॉमी क्लास में गया था।
उनका त्वरित उत्तर होगा, " मैं तो बिसिनेस क्लास में ही आता जाता हूँ।" इसके बाद तो न मेरे पास कुछ कहने को रह जाता और न उनके पास कुछ बढ़ा चढाकर बताने को। कहाँ मैं भी आपको उलझाने लगा। चलिये ले चलता हूँ, कैथे ड्रैगन की उड़ान में। कोलकता से होन्ग्कोन्ग के कैथे पसिफिक उड़ान को कैथे ड्रैगन नाम दिया गया है।
विमान के प्रवेश द्वार पर ओठों पर सुर्खियों सहित मोहक मुस्कान बिखेरतीं विमानआतिथ्य बाला (Air hostess), ने विमान में स्वागत किया।  एयर होस्तेस्स के लिये परम्परागत तौर से प्रयुक्त शब्द, विमान परिचारिका की जगह मैने विमान आतिथ्य बाला का प्रयोग किया है। मुझे परिचारिका शब्द पर ही आपत्ति है। परिचारिका शब्द से दासता की भनक आती है। आतिथ्य दासत्व नहीं है। यद्यपि यात्री ऐसा अतिथि होता है , जिसकी तिथि तय होती है, फिर भी वह देव स्वरूप होता है। जब हम अतिथि देवोभव कहते है, तो हम ईश्वर का कार्य ही कर रहे होते हैं। ईश्वर का कार्य करने वाला महान होता है, और उसके लिये दास, दासी या परुचारिका शब्द उसके इस महती भूमिका को छोटा कर देता है। मैने विमान के अन्दर आतिथ्य रत बालाओं के लिये इस शब्द का प्रयोग कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।
यह विमान हर कतार में तीन - तीन सीटों की ब्यवस्था सहित एक मध्यम या हो सकता है कि अन्तरार्ष्ट्रीय मानकों के अनुसार कम क्षमता वाला विमान है। अन्दर जाने पर मैने देखा कि हर दस क्षैतिज कतार के बाद एक विमान बाला खड़ी थी। उनके मोहक चेहरे पर करीने से संवारी हुई केश राशि और स्लिम फिट मिडी पर स्कर्ट उसकी पतली कमर और नितम्बों को दर्शनीय बना रही थी। उसकी टाँगें एक अर्ध पारदर्शी लेग्गिन्ग से त्वचा के साथ एकाकार होते हुये, त्वचा के दर्शनार्थ ध्यान आकृष्ट कराने में सफल हो रही थीं। अगर लेगिन्ग पर ध्यान डाला जाय, तो उसे अ - पारदर्शी होते हुये भी उसके आर -पार देखने के लिये अपार- दर्शन की ललक जगा जाता था। सभी बालाएँ चाइनीज़ या मन्गोलियन मूल की थी। विमान के अन्दर पहुंचने पर लगा कि एक लम्बी - सी बस यात्रियों के बैठने का इन्तजार कर रही है। सीट खोजने में कोई दिक्कत नहीं हुयी। साइड में सीटों के ऊपर जहां हैण्ड बैग रखते है, उसी पर सीटों की संख्या भी लिखी थी। धीरे-धीरे पूरा विमान यात्रियों से भर गया। सभी के चेहरों पर हवाई यात्रा की खुशी का रोमांच चेहरे पर नज़र आ रहा था। उनमें से कुछ यात्री बंगाल के परम्परागत पोशाक धोती - कुर्ता और साड़ी में भी थे।
बिमान के उड़ान भरने के पूर्व यात्रियों के स्वागत में घोषणा हुयी। इसके बाद सुरक्षा से सम्बन्धित घोषणा: जैसे आक्सीजन मास्क आपके उपर है। उसे कैसे लगाया जायेगा, उसकी सूचनाएं, सीट बेल्ट कैसे लगाना है, सीट के नीचे लाइफ जैकेट रखा है। ये सारी घोषणाएं अन्ग्रेजी, चाइनीज़ और बंगला में हो रही थी। अन्ग्रेजी का उच्चारण ऐसा था कि कुछ भी पल्ले नहीं पड़ रहा था। बंगला में हो रही घोषणा से ही हमलोग समझने की कोशिश में सफल हो रहे थे। विमान अपने पड़ाव स्थान से धीरे-धीरे घूमकर दौड़ पथ (रन वे) पर आ गया। हमलोगों ने अपने-अपने सीट बेल्ट बाँध लिये। ठीक समय यानि 1:15AM पर विमान ने उड़ान भरी। लगता है कि करीब तीन सौ यात्रियों और बिमान परिचारिकाओं और पायलट सहित अन्य कर्मियों के साथ विमान कुछ ही पलों में धरती से ऊपर उठने लगा। बादलों के पार जो कोई संसार है, करीब 35000 फीट और -50 डिग्री फारेनहाइट के तापमान पर , वहां पहुंचकर 550मील प्रति घन्टे की रफ्तार पकड़कर विमान निर्धारित दिशा में, होन्ग कौंग की ओर उड़ चला।
विमान के स्थिर होते ही आतिथ्य में सैंडविच के साथ सलाद और जुस दिया गया। इसके बाद जैसे ही थोडा सुकून जैसा महसूस हुआ कि झपकी आई और गहरी नींद में डूबती चली गयी। कितना समय बीता, इसका भान भी नहीं रहा। पत्नी मध्य सीट पर थी। खिडकी के पास की सीट पर कोई यात्री नही था, इसलिये वे आराम से पैर फैलाकर अधलेटी मुद्रा में विमान यात्रा के आननद में नीन्द को घोलती चली गयी। जब उन्होने खिड़की खोली तो उपर नीला आसमान और सूर्य की रश्मियाँ सीधे विमान के अन्दर आ रही थी। हमें लगा कि अभी ही तो रात में चले थे, ये सुबह कब हो गयी? थोडा मस्तिष्क पर जोर देने से समझ आया कि जब आप पश्चिम से पूर्व की ओर यात्रा करेंगें, तो समय आगे की ओर खिसक जायेगा। इसीलिये हमें लगा कि सूर्योदय जल्दी हो गया। बादलों के उपर से सूर्य की फैलती धूप में धरती का नज़ारा विलक्षण था। यहां से देखने पर लगता है कि सृष्टि का विस्तार कितना अपार है। हमलोग अपनी छोटी सी दुनिया को ही संसार मान बैठकर कैसे कैसे भ्रम पाल लेने में अपने अहं को संतुष्ट करते रहते हैं। प्लेन से ली गयी तस्वीरें नयनाभिराम  है।
हमलोगों का विमान निर्धारित समय, स्थानीय समय के अनुसार 7:50 AM पर होन्ग कोन्ग के विमान तल पर उतर गया। उतरने के ठीक पहले बेल्ट बांध लेने की घोषणा हुयी थी।
सकुशल उतरने के बाद हमलोग विमान से बाहर निकले।

क्रमशः

अधिकारी की आत्मीयता (कहानी)

 #BnmRachnaWorld  #story #affection#GovernmentOfficer अधिकारी की आत्मीयता  ऑफिस में यह खबर फ़ैल गई थी कि साहब ज्वाइन करने आ रहे हैं। इस जनपद ...