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Saturday, October 27, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 41 वाँ और 42 वाँ दिन (Day 41, 42)

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13-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 41 वाँ दिन (Day 41):
आज के दिन हमलोग Orange County Great (baloon) Park गए। वहाँ संतरों के बागीचे को नजदीक से देखने की इच्छा की तृप्ति हो गयी। मैने OC Great Park की चर्चा पहले भी की थी। यह पार्क काफी दूर तक फैला हुआ है। इसके दूसरे किनारे पर एक फ़ार्म है, जो सरकार द्वारा संचालित शोध संस्थान के लिये प्रयुक्त होता है। वहाँ गिरे हुए, बिखरे, फैले हुए संतरों को देखना नया अनुभव जैसा था।
आज सुबह हैदराबाद से अपने बेटे के पास आये N Bikhupati से मिलने का मौका मिला। पिछले सप्ताह उनके लड़के की कार को एक मोड़ पर किसी दूसरी कार ने पीछे से टक्कर मार दी थी। उनका कार तो क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन कोई खास चोट नहीं आयी थी। यहाँ के इन्स्योरेंस के नियमों के अनुसार क्षतिग्रस्त कार, इन्स्योरेंस वाले ले गए। उसके बदले तबतक के लिये उन्हें दूसरी कार दे दी गई थी, जबतक उनकी अपनी कार रेपेयर कर मिल नहीं जाती है। इन्स्योरेंस कम्पनी ही सारा खर्च वहन करती है। जिस कार ने उन्हें ठोका था, उसे कोई गोरी लड़की चला रही थी। वह मोबाइल पर कुछ मैसेज पढ़ रही थी, इतने में शायद अचानक सिग्नल पर गाड़ियाँ खड़ी दिखी थी और उसने पीछे से ठोक दिया। वह लड़की दुर्घटना के समय में काफी घबरायी हुयी थी। यह सब उनके लड़के से उनके घर पर जाकर मिलने से और बात करने से पता चला।
श्री भिखुपति जी काफी मिलनसार हैं। उन्होने यहाँ के सारे भारतीय मूल के वरिष्ट नागरिकों को, जो अपने बच्चों के पास आये हुए हैं, उन्हें एक साथ जोड़ने और मिलाने का कार्य किया है। उनके लड़के एक अच्छे फोटोग्राफर भी हैं। आज उनके घर पर हमलोग 1:00 बजे तक थे। उनके लड़के ने हमारी तस्वीरें भी उतारी। इसतरह आज के दिन को भी खास बनाने में हम सफल रहे। क्रमशः !

14-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 42 वाँ दिन (Day 42):
आज के दिन को खास बनाने के लिये मैने कुछ खास नहीं किया। कैसे खास बनाया जाय, इसपर सोच विचार कर ही रहा था कि दोपहर बीत गयी।
सोचते -सोचते मेरा ध्यान अमेरिका के इमिग्रेशन नियमों को कड़ा करने पर और उसके इम्पैक्ट पर गया। भारत की आई टी सर्विस देने वाली जो कंपनियाँ यहाँ पर काम कर रही हैं, उनपर अमेरिकन को बहाल करने का दबाव है। अगर वे अमेरिकन नागरिक को बहाल करते हैं, तो उन्हें उन पदों और जिम्मेवारियों के लिये एक भारतीय टेकनिशियन की अपेक्षा दूगना देना पड़ता है। साथ ही वे यहाँ के नियमों के अनुसार एक सप्ताह की अग्रिम सूचना पर दूसरी कम्पनी में जा सकते हैं। इसतरह उनका कम्पनी में स्थायित्व पर प्रश्न चिन्ह हमेशा लगा रहता है। अगर वे किसी भारतीय टेकनोलोजिस्ट को बहाल करते हैं, तो उन्हें वेतन कम देना पड़ता है। लेकिन उनके वर्किंग वीसा के समय को बढ़ाये जाने पर हमेशा संशय बना होता है। इसतरह भारतीय आई टी कम्पनियों को यहाँ उन्मुक्त होकर, कुशलतापूर्वक काम करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं।
यही सब विचार करते हुए दोपहर का समय बीत गया। शाम को पार्क की ओर घूमने निकले। पार्क में एक इण्डियन जैसे ब्यक्ति दिखे। उनको नमस्ते कहा। उनसे मैने ही पूछा, "आप कहाँ से आये हैं?" उन्होने कहा, "कोलकता से।" मैने तपाक से पूछा, "मैं भी जमशेदपुर से आया हूँ।" फिर उनसे बातों का सिलसिला चल पड़ा। वे अपनी बेटी के यहाँ आये हुए हैं। उनके दामाद एक शोधार्थी हैं। पिछले काई वर्षों से वे यहाँ रह रहे हैं। मेरी पत्नी भी उनकी पत्नी से काफी देर बातें करती रहीं। इसतरह आज का दिन भी कुछ विशेष बन ही गया।
क्रमशः 

Tuesday, October 23, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 39 वाँ और 40 वाँ दिन (Day 39, 40)

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11-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 39 वाँ दिन (Day 39):
हमलोग सुबह पास के बड़े पार्क की ओर गए। वहाँ लडकियों का फुटबॉल मैच चल रहा था। लौटते हुए हमलोग एक अच्छी सोसायटी के अंदर की सड़क से होते हुए आये। ये सारे घर बन्गलानुमा थे जिसमें दो कारों के लिये गैरेज बना हुआ था।
आज नाश्ते के बाद तैयार होकर साढ़े बारह बजे हमलोग लॉस एंजेल्स के लिये प्रस्थान किए। लॉस एंजेल्स यहाँ से 55 मील (88 कि मी) है। पहले विचार था कि Griffith Observatory चला जाय और वहाँ से पहाड़ पर Hollywood साइन वाला नजारा देखा जाय। लेकिन इसके बाद विचार किया गया कि क्यों नहीं Hollywood hills और Hollywood Lake साइट पर ही चला जाय, ताकि Hollywood वाला साइन नजदीक से साफ़-साफ़ सुस्पष्ट रूप में देखा जाय।
चौड़ी-चौड़ी, साफ़ सुथरी सड़कों से होते हुए हमलोग करीब 3 बजे Hollywood Hills पर पहुँच गए। कार को उतना ऊपर तक ले गए जहाँ पर जाकर कार पार्क की जगह मिली। उपर में कार पार्किग की विशेष ब्यवस्था का अभाव दिखा। कार पार्किंग के लिये सड़क के समानांतर ही पार्किंग करनी पड़ी। पैदल ही सड़क से होते हुए थोड़ी और ऊपर तक चढ़ाई करनी पड़ी, जहाँ से HOLLYWOOD का चिन्ह साफ़-साफ़ दिखता था। वहाँ रास्ते में Maxico Cactus भी दिखे, जिसकी तस्वीर मैने उतारी । इस Cactus का जिक्र मैने लॉस एंजेल्स और Hollywood के इतिहास का वर्णन करते हुए किया था।
HOLLYWOOD साइन का भी एक इतिहास है। यह एक तरह से अभी के अमेरिका का एक मार्क बन गया है। यह LA में स्थित एक साँस्कृतिक और मनोरंजन से जुड़े उद्योग का प्रतीक बन गया है। यह प्रतीक चिन्ह लॉस एंजेल्स के Santa Monica Mountain Range में स्थित Hollywood Hills क्षेत्र के Mount Lee पर बना हुआ है।
यह चिन्ह 44 फीट(13.4 m), लम्बे आकार के सफेद इंग्लिश के Capital Letters में 352 फीट(103.3m), लम्बे स्थान में लिखा हुआ है। यह चिन्ह मूलरूप मेन 1923 ई में बना था, जिसे स्थानीय real estate के विकास के विज्ञापन के लिए बनाया गया था। लेकिन इसके बढ़ते खर्च के कारण इसे छोड़ दिया गया था। यह चिन्ह कई बार तोड़-फोड़ और उधम मचाने वालों द्वारा खंडित किए जाने हेतु इसे निशाना बनाया गया। परंतु इसे पुन: स्थापित किया गया। इन्हीं सब कारणों से इसके लिए एक सुरक्षा उपाय का भी निर्माण किया गया। अभी यह चिन्ह Hollywood Sign Trust द्वारा संरक्षित और सुरक्षित किया जाता है। यह स्थल, जहाँ पर यह साइन बना है, वहां पर की और अन्य चारो तरफ की जमीन भी Griffith पार्क के अधिकार क्षेत्र में आता है।
नीचे से देखने पर पहाड़ी के उतार-चढ़ाव पर स्थापित अक्षर तरंगनुमा नजर आते है। अगर उन्हें उसी उँचाई से देखें तो सभी अक्षर एक ही सीध में खड़े लगेंगे। Establishing shots (जिसका वर्णन हम Irvine Spectrum केज वर्णन के सिलसिले में कर चुके हैं) में अक्सर इस चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
हमलोग वहाँ जितना नज़दीक जा सकते थे, उतना नजदीक पहुँचकर तस्वीरें लीं। वहाँ पर शैलानियों के लिए सुविधा की कमी दिखी जो अमेरिका की संस्कृति से मेल नहीं खाती है। वहाँ नजदीक में रेस्ट रुम की सुविधा का अभाव दिखा। शायद अमेरिकी सरकार नहीं चाहती हो कि इस स्थान पर भीड़भाड़ बढ़े।
क्रमश:
12-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 40 वाँ दिन (Day 40):
मित्रो, आज के दिन को कैसे खास बनाया जाय? इस पर मैने विचार किया तो एक विचार मन में आया कि क्यों नहीं पिछले दिनों की चर्चा को आगे बढ़ाते हुए "HOLLYWOOD" के चिन्ह के इतिहास पर पुन: दृष्टि डाली जाय।
हमने देखा कि 1923 ई में मूलत: इसे "HOLLYWOODLAND" के नाम से विकसित और प्रचारित किया गया था। इसका मूल उद्देश्य लॉस एंजेल्स के Hollywood District (तालुका) की पहाड़ियों पर गृह निर्माण और विकास की योजना का विज्ञापन करना था। 'हालीवुड के पिता के रूप में जाने गए H J Whitley ने एक चिन्ह का उपयोग अपने रियल इस्टेट के ब्यवसाय 'Whitley Height', जो Highland Avenue और Vine Street के बीच स्थित था, के लिये किया था। इसलिए उसने अपने दोस्त Hary Chandler, जो Los Angles Times अखबार के मालिक भी थे, को एक ऐसे ही चिन्ह का निर्माण अपनी जमीन और उसके विकास के ब्यवसाय के विज्ञापन के लिये करने का सुझाव दिया। रियल इस्टेट के ब्यवसाय में लगे Woodruff और Shoults ने अपने डेवलपर के इस ब्यवसाय को "HOLLYWOODLAND" कहा और इसे "बहुत अच्छे वातावरण में बिना अधिक के Hollywood Hill में उपलब्ध जमीन और मकान" के रूप में विज्ञापित किया।
उन्होंने Crescent Sign Company को इस 13 अक्षर वाले शब्द को पहाड़ी पर स्थापित करने के लिए अनुबंधित किया। इस चिन्ह बनाने वाली कम्पनी के मालिक Thomas Fisk Goff (1890-1984) ने इस चिन्ह का डिज़ाइन तैयार किया। हर अक्षर 30 फीट(9 .1m) चौड़ा और 50 फीट (15.2m) उँचा था। पूर प्रतीक चिन्ह 4000 छोटे बल्बों से भरा गया था। इसतरह इन शब्दों के अक्षरों को "HOLLY", "WOOD" और "LAND" के समूहों में अलग-अलग प्रकाशित होता था। Hollywoodland Sign के ठीक नीचे एक सर्च लाईट था, जो लोगों का ध्यान आकृष्ट करने के लिये प्रकाशित होता था। इस चिन्ह को आधार स्तम्भ देने के लिए खम्भों को उस स्थान पर खच्चरों द्वारा पहुँचाया गया था। इस पूरी योजना पर उससमय 2100 डॉलर खर्च आया था। यह अभी के समय में $3300,000 के बराबर है।
इस प्रतीक चिन्ह को अधिकारिक तौर पर 1923 ई में भेंट किया गाया था। यह मूलत: डेढ़ साल तक ही चलने के लिये बनाया गया था। लेकिन लॉस एंजेल्स में अमेरिकन सिनेमा के उत्कर्ष के बाद, अमेरिकन सिनेमा के स्वर्ण युग में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर यह चिन्ह अमेरिकन सिनेमा की पहचान बन गया। क्रमशः

Thursday, October 18, 2018

उजाला दे दूंगी (लघु कथा)

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आज विजयादशमी है। बुराई पर अच्छाई के विजय का उत्सव आज मनाते हैं और यह संकल्प लेते हैं कि बुराईयों के
महिषासुर को सर उठाने के पहले ही खत्म कर देंगें। इसमें हम अपनी मानवीय संवेदनाओं को अक्षुण्ण रखेंगें।
मेरी लिखी एक लघु कथा, जो विशेष इसी अवसर के लिये लिखी गयी है, आप पढ़ें और बतायें कैसी लगी?

"माँ, आज साहब के बंगले में इतनी भीड क्यों है?" रोहित बाबु के बंगले के आउट हाउस में अपनी माँ के साथ रहने वाली छोटी बच्ची रानी ने अपनी माँ अहिल्या से पूछा था।
अहिल्या जानती थी कि साहब के यहां नवरात्र में दुर्गा जी की पूजा होती है। आज उसी की पूर्णाहुति पर कुंवारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है। उसके बाद दक्षिणा के रूप में उपहार भी दिया जता है।
"वहां माँ दुर्गा जी की पूजा हो रही है।"
"उससे क्या होता है?"
"उससे दुर्गा जी सद्बुद्धि देती हैं। और सद्बुद्धि से जीवन में उजाला आ जाता है। उसके प्रकाश में जीवन जीने से कोई भय नहीं होता है।"
"माँ, हम भी दुर्गा जी की पूजा क्यों नहीं करते?"
"करती हूं न। जहां दुर्गा जी की पूजा होती है, वहां की सफाई तो मैं ही रोज करती हूं। हमारी यही पूजा है।"
"तो फिर कन्या को बुलाकर खिला भी देंगे और दक्षिणा भी देंगें।"
"मैं तो रोज खिलाती हुँ कन्या को।"
"मैने तो किसी को आते हुये नहीं देखा।"
"तुम जो मेरी कन्या हो।"
"तुम दक्षिणा क्या दोगी?"
"मैं दुर्गा जी के पूजा स्थल की सफाई करते हुये पूजा करती रहती हुँ, वहां से ... "
"हां, तो वहां से दक्षिणा लायेगी क्या?
"हां, वहीं से सद्बुद्धि का उजाला लेकर तुम्हें उसमें से थोड़ा सा उजाला दे दूंगी।"
"तुम्हारी यही बात मेरी समझ में नही आती।"
अहिल्या अपनी रानी को गले लगा लेती है।

Wednesday, October 17, 2018

अमेरिका डायरी यू एस ए में 37 वाँ, और 38 वाँ दिन ( Day 37, 38)

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09-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 37 वाँ दिन (Day 37):
मित्रों, दो दिनों के बाद हमलोग लॉस एंजेल्स (LA), में Hollywood Hills, जहाँ Hollywood का मशहूर चिन्ह स्थित है, देखने जाना है। आज कुछ विशेष कहने के लिये नहीं है, इसलिए मैने सोचा है कि उसी की चर्चा की जाय।
Hollywood का नाम कैसे पड़ा, उसके बारे में मैने 12-07-2018 की अपनी अमेरिका डायरी के पन्ने में लिखा था। उसे मैं पुन: उदधृत करना चाहता हूँ। 1886 ई में H J Whitley, जो हालिवुड के पिता कहलाते हैं, की डायरी में एक वाकया इस तरह लिखा हुआ था, "1886 ई में जब मैं इस पहाड़ी पर अपना हनीमून मनाने आया हूँ तो मैने एक चाइनीज़ मूल के ब्यक्ति को वैगन में लकड़ी ले जाते देखा। उससे मैने पूछा, 'क्या कर रहे हो?' उसने अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी में कहा, 'I holly-wood " मतलब था, मैं wood यानि लकड़ी को haul यानि ले जा रहा हूँ। यहीं से मैने इस पहाड़ और शहर का नाम Hollywood रख दिया, जो बाद में रजिस्टर्ड हो गया।" उसी हालिवुड की चर्चा आगे बढ़ाते हुए कुछ और बातों पर बात करेंगें।
Hollywood, US Film Induatry के केन्द्रीय स्थल के रूप में विकसित हुआ। यह क्षेत्र Cahuenga Valley का हिस्सा है, जो Santa Ana Mountains के उत्तर में स्थित है। 1912 ई तक बड़ी मोशन पिक्चर कम्पनियों ने लॉस एंजेल्स शहर में या उसके समीप में अपना प्रोडक्सन केंद्र स्थापित कर लिया था। 1900 ई के आसपास चलचित्रों के पेटेंट Thomas Edison के न्यू जर्सी स्थित Motion Picture Parent Comoany के अधीन थे। फिल्म निर्माण करने वाले इस कम्पनी के अनुबंध के तहत अक्सर निर्माण रोकने पर, इस कम्पनी के साथ न्यायिक प्रक्रिया में उलझा करते थे। उससे निजात पाने के लिए फिल्म निर्माणकर्ता, पश्चिम अमेरिका की तरफ रुख करना शुरु कर दिए, क्योंकि यहाँ एडिसन के पेटेंट नियम लागू नहीं होते थे। साथ ही इस क्षेत्र में मौसम खुशगवार था, जिससे फिल्म निर्माण के सेटों का निर्माण करना , स्थापित करना और उसे लम्बे समय तक कायम रखना आसान हो जाता था।
डायरेक्टर D W Griffith शायद हालिवुड में चलचित्र बनाने वाले पहले निर्माणकर्ता थे। उन्होने Biograph Comoany के लिये 17 मिनट की एक लघु फिल्म तैयार की थी, जिसका नाम था, "In Old California " (1910 ई)। Biograph Comoany शायद यू एस की पहली कम्पनी थी, जो हालिवुड में फिल्म निर्माण और प्रदर्शन कार्य दो दशक तक (1916 तक) करती रही। इस कम्पनी के मशहूर निर्देशक D W Griffith, और अभिनेताओं Mary Pickford, Lillian Gish, Linel Barrymore को जन्म दिया और मशहूर बनाया।
क्रमशः

10-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 38 वाँ दिन (Day 38):
हलाँकि Hollywood में मूवी थियेटर (चलचित्र प्रदर्शन स्थल) पर उस वर्ष 1910 ई में प्रतिबंध लगा दिया गया था, परंतु जब लॉस एंजेल्स ने उसका अधिग्रहण कर लिया, तब Nestor Motion Pictures Company द्वार Hollywood में किसी स्टुडियो द्वारा Oct 26, 1911 में शूट की गयी पहली फिल्म का निर्माण किया गया। Hollywood के पिता के रूप में मशहूर H J Whitley के घर को सेट के रूप में प्रयोग किया गया। Whitley Avenue और Hollywood Boulevard के मध्य में इस अनाम फिल्म का निर्माण किया गया था।
अक्टूबर 1911 में New Jersey की Centaur Co ने redhouse (यात्रियों की सुविधा के लिये बनाया गया घर) के पास Sunset Boulevard से लगे हुए पहली Hollywood स्टुडियो का निर्माण किया। इसके बाद 1920 ई तक Paramount, Warner Bros, RKO और Columbia Pictures ने अपने-अपने स्टुडियो सेट अप कर लिए थे। उससमय तक Hollywood देश का पाँचवाँ सबसे बड़ा उद्योग बन गया था।
1930 ई तक Hollywood में स्टुडियो पूरी तरह एकीकृत निर्माण, प्रदर्शन और वितरण को नियन्त्रित करने वाली कम्पनियों का मुख्य स्थान बन गया था। वहाँ 600 से अधिक फिल्मों का निर्माण प्रति वर्ष होने लगा था। इसतरह यहाँ की चमक -दमक के कारण Hollywood का नाम Tinseltown या "ड्रीम फैक्ट्री" के रूप में विख्यात हो गया था। Hollywood यू एस ए का सबसे बड़ा फिल्म निर्माण का केंद्र बन गया।
क्रमशः 

Friday, October 12, 2018

अमेरिका डायरी, यू एस ए में 35 वाँ और 36 वाँ दिन (Day 35, 36)

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07-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 35 वाँ दिन (Day 35):
आज का दिन खास होने वाला था, यह पहले से ही तय था। मेरी पत्नी जी की यहाँ हिन्दुस्तान के विभिन्न हिस्से से आयी मम्मियों के साथ अच्छी-खासी दोस्ती हो गयी है। उसी के तहत उन सबों का विभिन्न घरों में बारी-बारी से जाकर महिला-मिलन-सह-सहभोज का कार्यक्रम चल रहा है।
तीन चार दिन पहले वे सभी अपनी एक हैदराबाद से आयी मित्र के यहाँ गयी थी। वहाँ उन्होंने परम्परागत इदली, बड़ा, दोसा, सांभर, चटनी का लुत्फ उठाया था। आज उसी कार्यक्रम के तहत सारी महिला मंडली मेरे यहाँ, जिस निवास स्थान में मैं ठहरा हूँ, वहाँ आ रही थी। तो आज का दिन खास होना ही था। यह महिला मित्रों की मण्डली थी, इसलिए मैं उसमें शामिल नहीं था।
इस मण्डली की महिलाएँ हिन्दुस्तान के विभिन्न जगहों जैसे देहरादून, पंजाब, आन्ध्र प्रदेश , तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड आदि स्थानों से आयी हुई थीं। इसमें झारखंड बिहार से मेरी पत्नी जी थी। वे सभी 6:30 बजे शाम तक घर पर आ गई। आते ही उन्हें स्टार्ट अप के रूप में पेश किया गाया। मेरी पूत्र वधु ने सबों के लिए छोले, पूड़ी और सेवई मेन कोर्स के रूप में बनायी थी। मैं शाम को घूमने जा ही रहा था कि पत्नी जी ने मुझे सबों की तस्वीर खींचने का आग्रह किया। उन्होने कहा कि ठीक है 20 मिनट में घूमकर आ जाईये। मैं ठीक इतने ही समय में घूमकर वापस आ गया। अच्छी तस्वीरें निकाली गयीं। मैने भी बातचीत में थोडा हिस्सा लिया। मेरी पत्नी जी ने मेरा परिचय एक लेखक के रूप में करवाया। मैने उनसे कहा कि मेरी डो पुस्तकें प्रकाशित हौ चुकी हैं। मैने अपना विज़िटिंग कार्ड भी उन्हें दिया। एक हैदराबाद से आई महिला विजय्लक्ष्मी जी ने अपने पति से मिलवाने का वादा किया। वे भी लेखन कार्य में रुचि रखते हैं।
तो इसतरह आज का दिन भी खास हो गया न!!!

08-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 36 वाँ दिन (Day 36):
आज पास में ही रहने वाले एन भिक्षुपति, जो हैदराबाद के हैं, अपनी पत्नी विजय्लक्ष्मी के साथ मेरे घर पर आये। उनकी पत्नी श्रीमति जी द्वारा आयोजित कल की पार्टी में आयी थी। उन्हें मैने अपना विज़िटिंग कार्ड दिया था। उनसे काफी देर तक बातें हुईं।
उनके तीन लडके हैं। चार लडके थे। एक लड़का, जो थोड़ा कमजोर और अविकसित फेफड़े के कारण बचपन से ही रोगग्रस्त था, उसकी यादों को बयाँ करते हुए वे भावुक हो उठे। 28 वर्ष का होकर पिछले वर्ष वह चल बसा था। उसका जाना दुखद था, लेकिन एक तरह से ठीक भी था, क्योंकि वह पूरी तरह अपने माता-पिता पर निर्भर था, आश्रित था। इसीलिए वे पिछले वर्ष तक कहीं आ - जा नहीं सकते थे। पिछले वर्ष जब उसके देहावसान के बाद, उस उत्तरदायित्व से मुक्त हुए, तब 7 साल से यहाँ रह रहे अपने बेटे के पास पहली बार आये थे। उनसे और भी काफी बातें होती रही। वे हिन्दी में इसलिए बातें कर पा रहे थे, क्योंकि उनका काफी समय मुंबई के एक प्राईवेट सूती मिल में काम करने के दरम्यान हिन्दी बोलने वाले लोगों के बीच रहना हुआ था। वहाँ मिल बन्द हौ जाने के बाद वे परिवार सहित हैदराबाद आ गए। वहाँ उन्होने किराना दूकान चलाया, एल आई सी की एजेन्सी की और अपने लड़कों को उँची शिक्षा दिलाई, हैदराबाद में अपनी जमीन पर अपना मकान बनवाया। अभी संघर्ष का वह समय थोड़ा सहज हुआ है, तब वह सब हमलोगों से साझा कर पा रहे हैं। वे काफी मिलनसार लगे। उन्हीं के प्रयास से भारत से अपने बच्चों के पास आये कई बुजुर्गों को एक साथ मिलवाया। यहाँ मेरे घर के सामने ही वे सभी मिलकर ताश खेलते थे। अब यहाँ के लीसिन्ग ऑफ़िस ने क्लब का एक वातानुकूलित कमरा उपलब्ध करवा दिया है, इसलिए अब वे सब वहाँ ताश खेलते हैं। कुछ लोग जो नहीं भी खेलते हैं, वे गपशप करते हैं।
आज शाम में उसी पार्क में जाना हुआ, जहाँ बच्चों को गोलबंद कर उन्हें हिन्दू संस्कारों में संस्कारित होने की शिक्षा दी जा रही है। मैं भी उसमें शामिल हुआ। एक छोटी लड़की बाँसुरी पर "जन, गण, मन....." की धुन बजा रही त्गी। मुझे भी खूब आनन्द आया। मैं इलाहाबाद से आये सर्वेश कुमार जी से मिला। वे बचपन में 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' की शाखाओं में भाग लेते रहे थे। उसमें से कुछ खास चीजें बच्चों को सिखलाना चाह रहे थे। उनका प्रयास बहुत उत्तम और सराहनीय लगा। उनसे बात करते हुए पता चला कि यहाँ पल और बढ़ रहे हिन्दुस्तानी बच्चों को अपनी जड़ों के बारे में जानना, हिन्दुत्व और हिन्दू जीवन के बारे में बतलाना कितना जरूरी है।
बच्चे बड़े होते हुए जब थोड़ा समझने लायक हो जाते हैं, वे हिन्दु जीवन और हिन्दुत्व के बारे में कनफ्युज्ड से हो जाते हैं। साथ ही अपने दोस्तों और यहाँ के माहौल में लगता है कि ईसाइयत को सीधा, सहज और सरल ढंग से समझा और निभाया जा सकता है। इसलिए वे बड़े होकर ईसाई धर्म में धर्मांतरित होकर ईसाइयत जीवन शैली को अपना लेते हैं। इससे कैसे बचा जा सके या बचाया जा सके, यही उनकी सबसे बड़ी चिन्ता लगी। इसी से इस तरह के समूहों में बच्चों को हिन्दू जीवन में संस्कारित करने की पहल कई जगह चल रही है।

Monday, October 8, 2018

चूल्हे जलते नहीं यहाँ किसी भी घर में (कविता)

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चूल्हे जलते नहीं यहाँ किसी भी घर में

चूल्हे जलते नहीं यहाँ किसी भी घर में,
फिर भी बस्ती से उठता हुआ धुआं तो देख.

महलों के कंगूरे गगन को चूमते हैं, मगर
मिलता नहीं यहाँ किसी को आशियाँ तो देख.

ये हरियाली जो दीखती है दूर तलक,
नजरें उठा, दूसरे तरफ का फैलता रेगिस्तां तो देख.

फूटपाथ पर सोये हैं जो लोग सट - सट कर,
उनके ऊपर का खुला आशमां तो देख.

जला चुके थे तुम जिन्हें चुन - चुन कर,
उस राख से उठती हुई चिंगारियाँ तो देख.

अब लाशें भी उठकर खड़ी हो गयी हैं,
हवा में उनकी तनी हुयी मुठियाँ तो देख.

ढूह में बदल जायेंगें महल दर - बदर,
खँडहर कहेंगे इन सबों की दास्ताँ तो देख.

वे जो सोते हैं भूख से बिलबिलाकर,
तवारीख के पंख पर लिखेंगे क्रांतियां तो देख.
by Brajendra Nath Mishra

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 33 वाँ और 34 वाँ दिन (Day 33,34)

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05-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 33 वाँ दिन (Day 33):
आज का दिन इसलिए खास रहा, क्योंकि आज पास ही स्थित Heritage Park Regional Library, जो सरकारी क्षेत्र द्वारा स्थापित और संचालित पुस्तकालयों की श्रिंखला (chain) का हिस्सा है, वहाँ जाना हुआ। यह Heritage Park में स्थित पुस्तकालय, यहाँ Orange County के साहित्य और कला के विकास का केंद्र विन्दु भी है। यहाँ इस पुस्तकालय के स्वचालित पारदर्शी शीशे के दरवाजे हैं। पुस्तकालय के नजदीक पहुँचते ही दरवाजे स्वयं खुल जाते हैं।
अंदर घुसते ही बहुत बड़ा हाल दिखता है। दाहिनी ओर पुस्तको का Issuing Desk है। सामने हाल में प्रकाशित पत्रिकाओं को सजाकर रखा गया है। डेस्क पर कम्प्यूटर लगे हैं, जिसपर आप पुस्तकों को उसके टाईटिल यानि नाम या लेखक के नाम टाइप कर ढूढ़ सकते हैं। मैने चेतन भगत की अंग्रेजी पुस्तकों को सर्च किया। वह कहीं नहीं मिली। शायद वे लाइब्रेरी मटेरियल या पुस्तकालयों की सामग्री नहीं हैं। मैने ढूढ़ने के लिए ही Harry Bernstein की लिखी पुस्तक The Invisible Wall, A love Story खोजनी चाही। मैने यह पुस्तक क्यों लेनी चाही?
क्योंकि लेखक ने यह पुस्तक अपनी उम्र के 95 वें बसंत पार कर जाने के बाद लिखी। यह एक यहूदी लड़की की एक ईसाई लडके के साथ उस समय की प्रेम कहानी है, जिससमय यहूदी जर्मनी से निकाले जाने के कारण कैम्पों में रह रहे थे। लेखक को इस पुस्तक के लिये पुलित्ज़र पुरस्कार भी मिला था। सबसे बड़ी बात यह है कि उम्र के उस पड़ाव पर भी सृजनात्मकता!
यह पुस्तक मिली, लेकिन पुस्तकालयों की इस शृंखला के अन्तर्गत किसी दूसरे पुस्तकालय में मिली।
खैर, हमलोग बाईं ओर बढ़े, तो एक बड़े से हाल में, रेक, जिनकी उँचाई 6 फीट के आसपास होगी, पर किताबें सजी थी। वहाँ बीच में टेबल और कुर्सियाँ भी लगी थी, जहाँ बच्चे किताबें पढ़ रहे थे। जब मैने किताबों में झाँकना शुरु किया, टो देखा कि सारी किताबें बच्चों से सम्बंधित थे। शायद इसीलिए रेक की उँचाई 6 फीट के आसपास ही रखी गयी है, ताकि पुस्तके ढूढ़ने में उन्हें दिक्कत नहीं हो। दस क्लास तक के बच्चों के लिये चित्रकथा से लेकर इतिहास और सामान्य ज्ञान की इतनी सारी किताबें थी कि मैं तो देखकर दंग रह गया।
मेरे लड़के चिन्मय ने ऋषभ के लिये तस्वीरों वाली 8 पुस्तकें, स्वयं के लिये कम्प्यूटर पर एक पुस्तक और मैने अपने लिए एक किताब History of California ली। इसी बीच मैं पूरी पुस्तकालय की यात्रा पर निकल पड़ा। लोग इस जमाने में, जब टी भी, इंटरनेट, टैबलेट, मोबाइल पर सीरियल, वॉट्सएप्प, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि में ब्यस्त रहते हैं, किताबों को छूकर महसूस करने और पढ़ने के लिये भी इतने लोग आये हुए हैं, इसे देखकर हमें इस धुँध भरे वातावरण में कहीं से एक तेज रोशनी की छोर, इस ओर आती लगी।
यहाँ हिन्दी सेक्शन भी है, लेकिन उसमें सिर्फ पुरानी हिन्दी फिल्मों के सी डी थे। हिन्दी की किताबें नहीं थी। चाइनीज़ सेक्शन में चाइनीज़ भाषा में किताबें दिखीं। पता चला कि यहाँ की सदस्यता निशुल्क है। 50 किताबें तक ले जा सकते हैं। इसके लिए अधिकतम तीन सप्ताह का समय रहता है। इसके बाद लौटाने पर जुर्माने का प्रावधान है। आप पुस्तकों को स्वयं online reissue कर सकते हैं। किताबों को लौटाने के लिये पुस्तकालय के बाहर से ही दीवाल में एक चौकोर लेटर बॉक्स जैसी छोटी खिड़की बनी हुयी है। उसमें पुस्तकों को बारी-बारी से डाल दीजिये। लौटाने के लिये पंक्तिबद्ध होनें की जरूरत नहीं है। यह सब कुछ नया-नया-सा लगा। हमारे यहाँ, जब स्थापित पुस्तकालय मृत प्राय हो चुके हैं, उन्हें इस तरह पुनर्स्थापित कर उन्हें कला और संस्कृति के केंद्र के रूप में पुन: विकसित नहीं किया जा सकता? इसका उत्तर खोजना होगा।

  06-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 34 वाँ दिन (Day 34):
यहाँ डायरी लिखते हुए मुझे ऐसा लग रहा है कि हर दिन को खास बनाया जा सकता है। यह आप पर निर्भर है कि अपनी सोच को कौन-सी दिशा देते हैं। आज के दिन को खास बनाने के लिए मैने इरवाइन के इतिहास के बारे में जो सूचनाएँ एकत्र की, उन्हें फेसबुक पर पोस्ट किया।
शाम को Costaco स्टोर जाना हुआ। वहाँ से ज्यादा खपत होने वाली घरेलू सामग्रियाँ जैसे दूध, दही, आम और सेव के रस खरीदने के बाद उसी कैम्पस में स्थित वॉलमार्ट स्टोर गये। अमेरिका में वॉलमार्ट स्टोर की शृंखला है, जो सामग्रियों को सबसे कम कीमत पर उपलब्ध करवाने का दावा करते हैं। साथ ही यहाँ या अन्य किसी स्टोर से खरीदी हुयी वस्तु, जैसे फैन, मिक्सी आदि की कार्यक्षमता से अगर आप संतुष्ट नहीं हैं, तो उसे तीन महीने के अंदर लौटा कर, पूरा क्रय मूल्य वापस पा सकते हैं। इस नीति को सुनकर चौकने की बारी मेरी थी। यह नीति भारत में तो कभी नहीं चल सकती। इसके ग्राहक द्वारा दुरुपयोग होने की सम्भावना ज्यादा है, भले ही ब्यवसायी इसके लागू करने के लिए राजी हो जाय।
हमलोगों ने 9 बजे रात तक का समय वहाँ बिताया। वहाँ से लौटते हुए उसी कैम्पस में फास्ट फूड के आउट लेट Dell Taco गये। कार पर बैठे-बैठे ही, रेस्टोरेंट के पीछे से माइक पर से 4 Barito का ऑर्डर किया और आगे आकर उसे प्राप्त कर लिया गया। Barito चपाती-जैसी बड़ी रोटी में सलाद, अलग-अलग तरह की चटनी और चावल को अंदर में डालकर रॉल् जैसा बना दिया जाता है। इसे सौस के साथ खाया जाता है। यह एक तरह का मैक्सिकन फूड है। घर आकर चटनी के साथ इसके स्वाद का आनन्द लिया गया। इसतरह आज के दिन को भी खास अंदाज में खास बना दिये।
 

Wednesday, October 3, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 33वाँ दिन (Day 33):

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04-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 32वाँ दिन (Day 32)
Irvine Regional Park Visit:
आज सुबह के नास्ते के बाद Irvine Regional Park जाना हुआ। दिन का भोजन पार्क में ही करने का कार्यक्रम बना। इसलिए सुबह ही वेज बिरियानी बना ली गयी। इसे कार में रखने के साथ पानी की बोतलें और आम का रस भी रख लिया गया। सुबह का नाश्ता लेकर ये सारी तैयारियाँ करते हुए विलम्ब तो हो ही गया था। हमलोग घर से निकलकर, Jaffery से होते हुए, Irvine Central Dr वाली सडक से आगे बढकर, Bee Canyon में, Eastwood विलेज की ओर मुड़ गए। वहाँ से Orchard Hill Village, सेंटिआगो Cyn रोड को पार करते हुए, इरवाइन रीजनल पार्क के प्रवेश द्वार पर $3 प्रवेश शुल्क जमा कर पार्क में प्रवेश कर गए।
आज मौसम खुशगवार है, धूप भी खिली हुई, और सप्ताहांत भी है, इसलिए पार्टी के लिये उत्तम समय है। पार्क में अच्छी खासी भीड़ है। कहीं-कहीं लोग बड़े-बड़े समूहों में पार्टियाँ कर रहे हैं। अतएव जू साइड और छोटे तालाब की ओर के पार्किग क्षेत्र भरे हुए थे। ऋषभ (मेरा ग्रैंड सन), मेरी पत्नी और बहू तथा खाने के सारे सामान के साथ पूल साइड में छोड़कर, मैं और चिन्मय पार्किंग स्थान खोजने के लिए निकले। कई चक्कर लगाने के बाद पूल से दूर कार पार्क करने की जगह मिली। वहाँ कार खड़ी कर हमलोग पूल साइड की ओर पैदल ही आये, जहाँ उनलोगों को छोड़ आये थे। वे लोग लंच ले चुके थे। दिन के तीन बज चुके थे। हमलोगों के पेट में चूहे कूद रहे थे। उन्हें शान्त करना जरूरी था। भूख लगने पर चूहे ही क्यों कूदते हैं? शायद पेट का स्थान चूहों के लिए ही उत्तम है, जिसे आसान है, शान्त करना।
इरवाइन रीजनल पार्क करीब 471 एकड़ में विस्तार लिए हुए, Santa Ana Mountain के ढलान क्षेत्र के तलहटी में स्थित है। यह पार्क या उद्यान James Irvine 2 के द्वारा भेंट स्वरूप दी गयी 477 एकड़ जमीन पर 1897 ई में बना, कैलिफ़ोर्निया का सबसे पुराना क्षेत्रीय पार्क है। ओक के वृक्षों की छाँव में खुला मैदान रचनात्मक प्रवृत्ति वाले सुधी जनों को कला क्षेत्र के आकाश में विचरण के लिए अच्छी और उर्वर पृष्टभूमि प्रदान करते हैं।
Santiago Creek (छोटी नदी), पार्क को बीच से विभाजित करती है। एक प्राकृतिक झील जिसमें चट्टानों से होती हुई झरनों के बहाव पथ और छोटे प्रपात है, पार्क के वातावरण को और भी सुरम्य बना देते हैं। इस झील में बत्तखों को पंक्तियों में तैरते हुए देखा जा सकता है। इस पार्क में पुरातत्व द्वारा Spanish American War Memorial को दर्शाता एक धातु का पट्ट, जो USA marine द्वारा प्राप्त हुआ था, लगाया हुआ है।
मछली मारने, पिकनिक का क्षेत्र, पार्क में ट्रेन राइड, जू, बाईसाइकिल राइड के लिये साईकिल की उपलब्धता और पोनी राइड के लिये पोनी, इन सभी संसाधनों के साथ इस पार्क में हर एक के लिए कुछ-न-कुछ है, जिसका हर कोइ लुत्फ उठा सकता है।
कहा जाता है कि पेट में चूहों के कूदने से भोजन का आनन्द दुगना हो जाता है। शायद देर होने के कारण कुछ तो भोजन का स्वाद खुद ही अच्छा लगने लगता है, और कुछ पेट के चूहों को खिलाकर संतुष्ट करने से उनका स्वाद भी खुद महसूस करते हैं, इसलिए स्वाद में बेतहाशा इजाफा हौ जाता है। हा,,,हा,,हा,,,।
बिरियानी और साथ में आम-रस का रसास्वादन करने के बाद पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य का अवलोकन शुरु हुआ। पास के झील में झांकने का कोई फीस तो लगता नहीं है। यहाँ के जल में बत्तखों का जल-विहार बहुत ही मनोहारी लग रहा है। ऋषभ ने भी खूब आनन्द लिया। बच्चे प्रकृति के अधिक नजदीक होते हैं। इसलिए उनका महसूस होना हम सिर्फ देख ही सकते हैं। अपने आनन्द को तो वे लिपिबद्ध कर नहीं सकते, उनके हाव-भाव की अभिब्यक्ति ही देखी जा सकती है। तस्वीरें भी खींची गयीं।
इसके बाद हमलोग ट्रेन राइड के लिये टिकट लिये। छोटी-सी टॉय ट्रेन जैसी है। इसमें पारम्परिक ट्रेन की सारी फीच्बर्स को समाहित करने का प्रयास किया गया है। हमलोग ट्रेन में सवार हौ गए। ट्रेन में ऊपर छत थी, और दोनों ओर खुला था, जिससे परिदृश्यों को आंखों में बन्द किया जा सके। ट्रेन ने सीटी दी, वैसे ही जैसे पहले के स्टीम इंजिन वाली ट्रेन सीटी दिया करते थे। (साठ-सत्तर के दशक में मैनें देखा था)। लो चल पड़ी ट्रेन। झील के किनारे से गुजरती, ठक-ठक, ठक-ठक पहाड़ की तलहटी में जा पहुँची। पीछे की सीट पर बैठा एक बुजुर्गनुमा अंग्रेजी में इस उद्यान और उससे सम्बंधित सारे इतिहास को माइक पर घोषित करता हुआ साथ चल रहा था। ट्रेन जब रोड क्रॉस कर रही थी, टो सीटी बजी। रोड के साइड में अवरोध गिरा दिये गए, ताकि कोई अन्य वाहन रोड पार नहीं करे। इसके बाद ट्रेन एक सुरंग से होकर गुजरी। हमने एक वीडियो भी बनाया। दस मिनट के राइड के बाद हमलोग ट्रेन से उतरे।
पास ही पोनी राइड स्टेशन था, जहाँ घोड़े बन्धे थे। ऋषभ उस ओर भागा। वहाँ की टिकट खिड़की पर जैसे ही ऋषभ के लिये घोड़े की सवारी के लिये टिकट लेने गए, तो देखे कि खिड़की बन्द हौ चुकी थी। चार बजे पोनी राइड के लिये काऊन्टर बन्द कर दिया जाता है। इसका हमें पता ही नहीं था, वरना ऋषभ को ट्रेन राइड नहीं करवाकर पोनी राइड ही करवा देते। निराश होकर उसने जो रोना शुरु किया, उसे चुप कराना मुश्किल हो गया।
किसी तरह वहाँ से उसे लेकर हमलोग कार पार्क की ओर आ गए। वहाँ हरी घास पर दौड़ लगाकर ऋषभ खेलता रहा। हमलोग कभी बेंच पर बैठे हुए, कभी पेड़ों की छाँव में घूमते हुए पार्क का आनन्द लेते रहे। पास की रेस्ट रुम सुविधा का भी लाभ उठाया गया। इस सारे मंजर का आनन्द उठाते हुए, करीब सैट बजे तक हमलोग वापस आ गए। क्रमश:

Sunday, September 30, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 30 वाँ, 31 वाँ दिन (Day 29,30)

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02-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 30 वाँ दिन (Day 30):
आज शाम में हमलोग Costco स्टोर गए। यह स्टोर उचित दाम पर सामानों के bulk purchase के लिए जाना जाता है। यहाँ की गुणवत्ता काफी अच्छी है। इसलिए यहाँ से कम वसा वाली दूध, दही लेने के बाद वॉल मार्ट के स्टोर गए, जो इसी कैम्पस यानि Alton Market प्लेस में ही दूसरी ओर है। वहाँ भी हमलोग की नज़र clearance sale पर गयी, काफी सामान हटा लिए गए थे। लेडिज सेक्शन में ज्यादा कपड़े उपलब्ध थे।
मैने सिंह (Lion) के मास्क या मुखौटा मेरे पोते को लगा दिया गया। वह खूब हँसा। उसके साथ उसकी तस्वीर भी उतारी गयी। अब उन मुखौटे को उतार कर रखने लगे, तो उसने जो रोना शुरु किया, तो चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा था। रास्ते भर कार में रोता रहा। घर पहुँचकर ही शान्त हुआ।
हमलोगों ने आज सैंडविच, मक्खन, एभोकैडौ (Avocado, a type of fruit) मयोनीज के साथ खाए। इसे खाने में एक नया अनुभव हुआ। इसमें वसा की मात्रा मक्खन के कारण बढ़ गई थी। बिना मक्खन के भी इसे खाया जा सकता है।
क्रमश:

03-08-2018, इरवाइन, यू एस ए में 31 वाँ दिन (Day 31):
कभी-कभी जब आप ड्राइव पर निकल जाने के बाद तय करते हैं, कि चलो किसी नए गन्तब्य की ओर चलते हैं, तो गूगल मैप पर आप ऐसी नई मंजिल को चुनते हैं और जब उस ओर चल पड़ते हैं, तो लगता है, अरे यह तो वही पुरानी जगह है, जहाँ हमलोग भीड़-भाड़ के कारण जाने को स्थगित करते रहे।
आज कुछ ऐसा ही हुआ। ड्राईव पर निकल पड़ने के बाद एक नए पार्क का स्थान निर्धारित कर, गूगल मैप से GPS पर डालकर उसी ओर ड्राइव पर चल दिये। जब उस ओर काफी दूर बढ़ चुके, तो लगा कि यह तो Laguna Beach की ओर जा रहे हैं। वस्तुत: हमलोग जिस पार्क को नया समझकर, उसे मंजिल के रूप में चयनित किए थे, वह पार्क Laguna Beach के ऊपर ही था। इसतरह Laguna Beach की यात्रा बाई डिफाल्ट हो गई। कार के स्टीरियो सिस्टम पर गाना चल रहा था, "यही तो उमर है, कर ले गलती से मिस्टेक,,,"
Laguna Beach, दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के Orange County में एक सनुद्र्तटीय रेसोर्टों वाला शहर है। जरीब 23000 आबादी वाला यह शहर कला और साहित्य के केन्द्र के रूप में जाना जाता है। ऐतिहासिक तथ्यों पर अगर रोशनी डालें, तो कहा जायगा कि यह जगह Paleo Indians और Tongva मूलवासियों का निवास स्थान था, जो एक समय मैक्सिको का हिस्सा बना। 1848 ई में मैक्सिको-अमेरिकन लड़ाई के बाद यह अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य का हिस्सा बन गया।
यह शहर, शहरी आपाधापी और अधिकृत कब्जा से महफूज इसलिए रह पाया, क्योंकि राश्ट्रीय उच्च पथों से कम से कम जुडते हुए, तीन ओर से पहाड़ों और समर्पित हरा भरा सुरक्षित क्षेत्र (Dedicated green belt) से घिरा हुआ है। Laguna Beach का 5.88 miles(9.46 km), का समुद्र तट जल प्राणी के सुरक्षित क्षेत्र के रूप में और साथ ही करीब 2 किमी क्षेत्र राज्य के Conservation क्षेत्र के अधीन है।
Laguna Canyon 1841 ई में मैक्सिकन Land Grant Map में Glen of Lagoons में लिखा गया। 1864 ई में भीषण अकाल के समय इसके पूर्व मालिक ने इसे James Irvine को बेच दिया। इसतरह यह Irvine का हिस्सा बन गया।
1880 ई के आस पास यहाँ पर निवासियों की संख्या बढ़ी। 1904 ई तक जब यहाँ पोस्टल सेवायें स्थापित हुईं थी, यह शैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन गया था। यहाँ, इस शहर के एकान्त लम्बे तटीय फैलाव और पहाडों के सौंदर्य ने Wlliam Wendt, Frank Cuprien और Edgar Payne जैसे सौन्दर्य प्रेमी चित्रकारों इतना आकर्षित किया कि वे यहीं बस गए। उन लोगों ने Laguna Beach Art Association की स्थापना की, जहाँ 1918 में पहली Art Gallery खुली। बाद में यही Laguna Beach Art Museum बना। Hollywood से समीपता के कारण यह फिल्मों की शूटिंग के लिये एक आदर्श लोकेशन बन गया। इसीलिए निर्देशक। अभिनेता और फिल्मों में काम करने वाले अन्य लोग काफी दिनों तक यहाँ के Arch Beach Tavern, जो Moss Street के हिल साइड के ऊपर स्थित है, ठहरा करते थे। चित्रकारों, फोटोग्राफरों, फिल्मकारों और लेखकों की निरंतर उपस्थिति के कारण Laguna Beach क्रीयेटिव लोगों का खास वास-स्थान बन गया।
यह Hippie Cultural Movement का भी केंद्र रहा है। हिप्पी फैशन और संस्कृति, जिसने धार्मिक और सांस्कृतिक समन्वय के साथ खुलेपन को जिसतरह से 1960 के दशक में फैलाया, उससे पूर्वाध्यात्मिक और उदारवादी दार्शनिक सिद्धांतों को स्थापित करने में काफी मदद की।
"उत्सव रजनीश ध्यान केंद्र" भी Laguna Canyon Road पर स्थित आध्यात्म गुरु ओशो रजनीश के द्वारा स्थापित अमेरिका का ऐसा अन्तिम समुदाय था। यहाँ ISCON (Inernational Shrikrishna Consciousness) का भी एक आध्यात्मिक केंद्र हमने देखा।
Laguna Beach पर आने की योजना मेरे निर्धारित कार्यक्रम(Itinery) में रहने के बावजूद भी सप्ताहांत में अधिक भीड़-भाड़ के मद्देनजर कार्यक्रम को स्थगित करते रहे। लेकिन आज अचानक ही इधर आना हो गया, जिसकी कहानी मैं पहले वर्णित कर चुका हूँ। कार से काफी घूमने के बाद हमलोग वहाँ पहुँचे, जहाँ यह सड़क, समुद्र तट के समानांतर सड़क से मिलती है। पार्क तो दिखा, परन्तु वहां पार्किंग स्पेश नहीं मिला। हमारे भारत में जैसे सड़क पर कार रोककर सबों को उतार दिये और फिर गाड़ी को दूर ले जाकर जहाँ स्थान मिले वहाँ पार्क कर दिये, ऐसा भी यहाँ नहीं किया जा सकता। यह नियम विरुद्ध है। ऐसा करते हुए आप दूसरे वाहनों के परिचालन में अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं, ऐसा माना जायेगा और आप पर जुर्माना लगाकर आपको दंडित किया जा सकता है। काफी चक्कर लगाते हुये हमलोग एक सीधी उतराई वाली सीधी सड़क से गुजरे, जिसकी तस्वीरें मैने यहाँ पर डाली हैं। आप अवश्य देखियेगा और अपने विचारों से अवगत कराइयेगा। अन्ततः समुद्री तट से दूर सड़क के समानतार चिन्हित स्थान पर कार पार्क की गयी। वहाँ से पैदल हल्की उतराई की स्थिति से गुजरते हुए करीब बीस मिनट में उसी पार्क तक पहुँचे, जिसे हमलोगों ने गूगल मैप पर सेलेक्ट किया था।
यहाँ पहुँचते-पहुँचते शाम का अन्धेरा घिरना शुरु हो चुका था। इस अन्धेरे में भी बिजली की चौन्धियाती रोशनी से धुली वारिद-कन्या श्यामल ओढ़नी ओढे एक नीलवर्णी लावण्या-सी लग रही थी। उदधि का ऐसा रूप, ऐसा अद्भूत सौंदर्य का प्राकट्य मैने पहले कभी नहीं अनुभव किया था। मैने इसी संदर्भ को कई दूसरे कोणों से कल्पना को समेटते हुए एक कविता लिखी है, जो नीचे दी गई है।
मैने तस्वीरें लीं। करीब डेढ़ घन्टे तट पर और पार्क में बिताये। हमलोगों ने यहाँ के साफ-सुथरे रेस्ट रुम का भी उपयोग किया। तट पर खुले पाँव, शॉटस में तन्वन्गी सुंदरियाँ, समुद्र की लहरों को छूकर आती ठंढी हवाओं में गर्मी की सिहरन-सी लग रही थी। सडक के किनारे घूमते हुए एक ओर जलपान गृहों से समुद्री मछली के तले जाने की गन्ध के साथ शराब की मिली-जुली गन्ध नाक में घुस रही थी। सडक के किनारे की पगडंडी पर भीड़-भाड़ थी, जो मुंबई के जुहू या कोलाबा बीच के जैसा दृश्य उपस्थित कर रहा था।
रात पूरी तरह घिरनी शुरु हौ गई थी। ट्रैफिक कुछ कम होने जैसा लगा। हमलोगों ने वापस घर चलने का निर्णय लिया। आधे घन्टे ड्राइव के बाद ही घर आ गए।

आज शाम आ पहुंचे हम बीच लगूना
शैलानियों की लम्बी कतारें लगी हैं यहाँ।

नीले गगन का ऊपर बितान है तना
नीचे वारिधि - जल में नीला रंग है सना।

उठती गिरती तरंगों का तट पर बिखराव
यौवन - उफान भी एक दिन पाता ठहराव।

जल राशि में खेलती डोलती है एक सुन्दरी
ज्यों समुद्र तल से कोई निकली हो जल परी।

रंग बदल रहा उदधि का अब उतर रही शाम।
सूरज थककर पश्चिम क्षितिज मे पाता विश्राम।

चारू -चन्द्र -चंचल- किरण भुज -बँध खोलती
उग आये हों चांद कई, उल्लास रस घोलती।
ब्रजेन्द्रनाथ
क्रमशः 

Friday, September 28, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 28 वाँ, 29वाँ दिन (Day 28, 29)

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31-07-2018, इरवाइन यू एस ए में 28वाँ दिन (Day 28)
San Diego Creek
आज शाम हमलोग पास के पार्क में गए। यह पार्क मेरे निवास स्थान से सबसे निकट है। इस पार्क के बारे में मैने पहले भी चर्चा की है। यहाँ लान टेनिस के दौ मैदान और बास्केट बॉल का एक मैदान है। साथ ही पार्टियाँ करने के लिए एक शेड भी है। बच्चों के लिये झूले और स्लाइड भी हैं। बच्चों के प्ले एरिया से पश्चिम उत्तर - दक्षिण में लम्बा फैलाव लिए घास का खुला मैदान है। इसमें बच्चे दौड़ लगाते हैं। जो अपने पेट, खासकर कुत्तों के साथ आते हैं, वे उनके संग खेलते हैं।
इसी पार्क के उत्तरी-पूर्वी छोर पर San Diego Creek बहती है। Creek के किनारे घूमने के लिये पार्क के उत्तरी ओर से कोई निकास द्वार नहीं है। इसलिए मैं और पत्नी पार्क के पूरबी ओर
से निकलकर बाएँ पगडंडी के रास्ते मुड़ते हुए आगे बढ़े। 200 मीटर चलने के बाद Creek के किनारे के bicycle पथ से होते हुए पश्चिम की ओर मुड़ गए।
मैं बार-बार creek शब्द का प्रयोग कर रहा हूँ। इसका अर्थ ढूढ़ने के लिए जब मैने शब्द्कोश की सहयता ली, तो पता चला कि इसका अर्थ होता है, छोटी नदी या नाला। Creek शब्द का चलन अमेरिका में अधिक है। यह छोटी नदी बहकर बड़ी नदी में या खाड़ी में मिल जाती है। कह सकते हैं कि यह बड़ी नदी की tributary या सहायक नदी कहलाती है। हमलोग San Diego Creek के किनारे बनी करीब 12-14 फीट चौड़ी सड़क से पश्चिम की ओर निकल चले। सूर्य की अस्ताचलगामी रश्मियाँ हमारे चेहरे पर पड़ रही थी। यह रास्ता सिर्फ पैदल चलने वालों, धावकों या साईकिल चालकों के लिए ही है। इसमें आधिकारिक आदेश से पावर चलित गाड़ियों का परिचालन वर्जित है।
इस creek (छोटी नदी) के बारे में मैने जानने की कोशिश की। 19वीं शताब्दी से पहले San Diego Creek बेसिन बढ़े हुए घास आउर मौसमी दलदली भीन्गी जमीन से भरा था। जाड़े के समय Santa Ana और San Joaquin पहाड़ों से ढरकते हुए पानी के बाढ़ से भर जता था और बसंत ऋतु में बाढ़ का यह पानी पश्चिम की ओर बहकर Santa Ana River में मिल जाता था।
उससमय इस क्रीक का कोई निर्धारित पथ नहीं था। यह घाटी के गड्ढों और दलदल से जुड़ा था। Santa Ana River जो Orange County का मुख्य जल श्रोत है, वह कभी-कभी San Diego Creek के नीचले हिस्से से होकर बहते हुए New Port Bay में मिल जाता था। 2000 वर्ष पहले यह घाटी Tongva Native American का निवास स्थान था, जो Red Hill, अभी का Tustin क्षेत्र, में निवास करते थे।
आगे और जानेंगें San Diego Crek के बारे में,,,
क्रमशः
01-08-2018, इरवाइन, यू एस ए 29 वाँ दिन (Day 29):
पिछली डायरी के पन्ने से San Diego Creek के इतिहास में झाँक लेने के बाद, चलिये उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। कहा जाता है कि नदियों के इतिहास का पन्ना खोलना, एक पूरी सभ्यता के विकास की यात्रा को सामने खोलकर रख देता है। San Diego Creek, 16 मील (26 की मी) तक शहरों से होकर गुजरता हुआ जल पथ है, जो Orange County से होते हुए Upper New Port Bay में विलीन होता है। इसका समूचा जलपथ करीब 112 .2 वर्गमील क्षेत्र, जिसमें Irvine, Tustin, Costa Mesa जैसे आठ कस्बों से होते हुए गुजरता है। इसके बाद Laguna Woods से होते हुए यह Creek उत्तर-पश्चिमी ओर मुड़कर Peters Canyon Wash में मिलकर, अचानक दक्षिण-पश्चिम खाड़ी की ओर मुड़ जाता है। ऊपरी New Port Bay में मिलने से पहले बाईं किनारे में Bonita Creek से मिलते हुए New Port Bay मन मिल जाता है।
Creek के दोनों किनारों का काफी हिस्सा Concrete द्वारा मजबूत कर दिया गया है। यह अपने मुहाने तक आते-आते बहुत से पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं को वास स्थान प्रदान करता है।
San Diego Creek का जलोत्सारण क्षेत्र New Port Bay, जो दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के सबसे बड़े मुहानों में से एक है, के विस्तार-क्षेत्र का 80%हिस्सा है।
सूखे मौसम यानि जुलाई से सितम्बर तक 8/15 Cub ft/Sec और बरसात ( अक्टूबर से मार्च तक), के समय 61 Cub ft/ होता है। सबसे अधिक 43,500 Cub ft/sec बहाव Dec 6, 1997 मेँ हुआ था।
आज शाम को ही मैने इसी पार्क के हरे मैदान में बच्चे और उनके माता-पिता गोलबंद होकर कुछ कर रहे थे। मैं भी उसमें शामिल हुआ तो देखा कि बच्चों को कुछ आसान -सा बिना कोई वाह्य उपकरण का प्रयोग किए दिमागी खेल खेलाया जा रहा था। उसी समय एक नौजवान एक बॉक्स लाये। उस बॉक्स को यहाँ खोलने पर देखा गया कि उसमें बांसुरियाँ भरीं थी। उन्होने बांसुरियाँ निकाली और बच्चों में बाँट दी। अब उन्होने बच्चों को बाँसुरी से सुर निकालने के लिये बताया। बच्चों ने भी संगीत के सुर सा रे गा मा,,,,ध्वनि कैसे निकालनी है, इसका अभ्यास किया।
मैनें भी अपनी एक कविता बच्चों और उनके अभिभावकों को सुनाई, जिसकी उन्होने काफी प्रंशसा की। मुझे पता चला कि यह आयोजन हर बुधवार को किया जाता है, ताकि बच्चों में भारतीय संस्कारों के बीज को रोपा जा सके। यह प्रयास मुझे बहुत अच्छा लगा। क्रमश:

Monday, September 24, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 26 वाँ और 27 वाँ दिन (Day 26, 27)

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29-07-2018, इरवाइन यू एस ए में 26 वाँ दिन (Day 26)
आज के पन्ने मेँ दिन के रूटीन से कुछ खास डालने को नही है।
हमलोग आज यहाँ के 99 सेन्ट स्टोर गए। कहा तो जाता है कि इस स्टोर में सबकुछ 99 सेन्ट में ही मिलता है, लेकिन ऐसा है नहीं। हाँ जन्मदिन के आयोजन सम्बन्धी सामान, जैसे बर्थडे baloons और गिफ्ट आदि समान सस्ते अवश्य है।
आज यहाँ के wholesome choice की एक स्टोर में जाना हुआ। यह एक अन्तरराष्ट्रीय स्पेशियलिटी स्टोर चेन का एक स्टोर है जो दुनिया में उल्लेखनीय, शानदार, विशिष्ट Ethnic food और परम्परागत grocery सामानों के लिए मशहूर है। यहाँ भारतीय एएम पी और यू पी के गेंहूं से बना चक्की आंटा, चावल और किराना के अन्य सामानों के साथ हल्दीराम, बिकाजी की नमकीन और मिठाइयाँ भी उपलब्ध हैं। भारतीय ब्यन्जन में प्रयुक्त होने वाली सब्जियाँ जैसे भिण्डी, बैंगन, लौकी, पालक सहित सलाद में प्रयुक्त गाजर, खीरा भी मिल रहा था।
वहाँ की खरीददारी के बाद हमलोग Ralph's स्टोर गए। वहाँ से चीनी, दूध आदि खरीदे गए। दिनचर्या यहाँ समाप्त होती- सी लगी , लेकिन साहित्य -चर्या अभी और कुछ लिखवाने को उकसा रही थी।
मन मेँ कल के Balboa Island के भ्रमण के बाद, कुछ और जानने की उत्कण्ठा ने फिर से इसके इतिहास के पन्नों को पलटने के लिये ब्यग्र किया। हम कल जान चुके थे कि Balboa Island की खोज 1513 ई मेँ योरोप के प्रशांत महासागर की यात्रा पथ की खोज का परिणाम था। Balboa Island, जो कीचड़ वाली दलदली मिट्टी से बनी भूमि से घिरी थी, उससे आज की Newport Beach को निकालने और निखारने का काम 1860 ई मेँ James Mc Fadden और उसके भाई Robert, जिन्होने Newport Beach के समुद्री इलाके का बड़ा हिस्सा खरीद लिया था, के द्वारा किया गया था। उन्होने ही Balboa Island और Newport Harbour के दूसरे द्वीपों के बालू के बीच (beach) को विभाजित कर प्रॉपर्टी के रूप में बेचना शुरु किया।
उनलोगों ने Balboa Peninsula और Newport Beach के townsite को एक मछली मारने वाले घाट (wharf) के रूप में विकसित किया। 1860 ई के अन्तिम दशक मेँ पशुचर्म, चर्बी और सूखी घास और दूसरी वस्तुओं के निर्यात के लिए इस खाड़ी का उपयोग किया जाने लगा। सितम्बर 1870 ई में Captain Samuel S Dunnels के steamer Vaquero से काठ के कुंदों को उतारने में लगाया गया। इसके लिए उन्होने एक छोटे घाट (wharf) का निर्माण आज के पश्चिमी किनारे पर जो Highway और Newport Bay bridge के पास है, किया।
Mc Fidden के भाइयों ने 1875 ई मेँ 19 साल तक इस ब्यवसायिक जहाजरानी ब्यापार केंद्र का परिचालन किया।
हलाँकि यह खाड़ी एक हार्बर का रूप नहीं ले सका था, इसलिए Mc Fidden के भाइयों ने जहाजरानी के ब्यवसाय को समुद्र की सतह तक लाने के लिए बालू के ऊपर एक Pier यानि सेतुबंध का निर्माण किया। यह स्थल Santa Ana River के मुहाने के शान्त जल के प्रवाह मेँ Great White Shark के जन्म लेने और पोषण के लिए आदर्श जगह थी। Mc Fadden का यह घाट 1888 ई मेँ रेल से Santa Ana से जुड़ गया। इसतरह यहाँ एक शहर विकसित हुआ। बाद में 1899 ई मेँ फ़ेडरल सरकार ने San Pedro नामक नए हार्बर के निर्माण के लिए राशि आबंटित की। यह दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया का बडा बन्दरगाह बन गया।
इसीलिए Mc Fadden wharf और रेलखंड को Southern Pacific Railroad को उसी साल बेच दिया। इसतरह Newport Bay के ब्यवसायिक जहाजरानी केंद्र के रूप में विकसित होने पर पूर्ण विराम लग गया। अब यह शैलानियों के लिए White shark watching के लिए एक समुद्री तट के रूप में ही रह गया।
आगे क्या हुआ आगे के पन्ने में पढ़ें,,,,
क्रमशः

30-07-2018, इरवाइन, यू एस ए में 27वां दिन (Day 27)

आज शाम को निकटवर्ती "Oak Creek Community Park " जाना हुआ। यह 12 एकड़ मेँ फैला हुआ बड़ा पार्क है। खेल की बहुत अच्छी सुविधा है।
इसमें खेल के दो बड़े मैदान हैं। दोनो मैदानों में एक मैदान छोटा है, जिसमें फूटबाल के खिलाड़ी खेल का अभ्यास करते हैं।
दूसरा मैदान बड़ा है। उसमें फ्लड लाईटस के बड़े बड़े मास्ट लगे हैं। रात मेँ भी इसमें मैच खेले जा सकते हैं।
बच्चों के लिये स्लाईड और स्वीन्ग लगे हैं। पिकनिक मनाने के लिये Barbecue की भी सुविधा है। Barbecue एक चौकोर oven या चूल्हा होता है, जिसे गैस या चारकोल के द्वारा गर्म किया जा सकता है। ग्रिल के ऊपर हॉट डॉग या मांस के टुकड़े को रखकर गर्म किया जा सकता है। इस तरह उसे खाने के लिये उपयुक्त बनाया जाता है। इससे पिकनिक के समय लोगों का आनंद दुगना हो जाता है।
चारो तरफ हरे-भरे पेड़ लगे हैं। इन पेड़ों मे कोई भी पेड़ फल देने वाला जैसे अमरूद, आम या जामुन का नहीं है। ऐसे पेड़ तो अपने देश में ही नजर आते हैं। हरी घास के मैदान मेँ घास करीने से काटी हुयी है। बड़े फ्लड लाईट वाले मैदान के पास ही रेस्ट रुम यानि गुसलखाना है। अंदर पुरुष और स्त्रियों के लिये अलग-अलग गुसलखाने बने हुए हैं। सफाई भी उत्तम दर्जे की है। वहाँ युरिनल के अतिरिक्त एक टॉऐलेट भी है, जिसमें अंग्रेजी किस्म वाला कमोड लगा है। टिस्सू पेपर के साथ फलस करने के लिए जल की ब्यवस्था भी है। बाहर मेँ नल और बेसिन है, जहाँ हाथ धोया जा सकता है। भींगे हाथों को सुखाने के लिये हॉट एयर (गर्म हवा देने वाला) सूखक यंत्र या ब्लोवर लगा है। उसी रेस्ट रुम की ओर कार पार्किंग के लिये बड़ा-सा पिच किया हुआ मैदान है, जहाँ सौ से अधिक कारें खड़ी की जा सकती हैं।
माँये अपने नवजात शिशुओं को भी कार से ले आ सकती हैं। उन्हें स्टॉलर पर स्थापित कर खुद भी गुन गुनी ठंढी हवा में टहलने का आनन्द लेते हुए खुद को भी शान्त वातावरण के सुकून से दिलोदिमाग को भर सकती हैं।
हमलोग अपने पोते के साथ अपार्टमेंट से पार्क के लिये निकले। मेरा पोता चार साल का है। अपार्टमेंट से दायें होते हुए उत्तर-पूरब की तरफ ओक क्रीक को पारकर कारें चलती सडक के पास पहुँचे। वहाँ पार करने के लिए पोल पर लगे बटन को दबाया। ठीक सामने के पोल पर सडक पार करने का प्रतीक दिखा तभी सड़क पार किए। जैसे ही पार्क में पहुँचे ऋषभ ने दौड़ लगानी शुरु कर दी। दौड़ते हुए वह पास के बड़े मैदान में जहाँ बड़े-बड़े लडके फुटबॉल का अभ्यास कर रहे हैं, उस ओर जाने लगा। उसे पकड़कर वापस लाया गया। फिर दौड़ने के क्रम मेँ वह उधर ही दौड़ पड़ता था। आखिर मेँ उसे ले जाकर झूले पर बैठाना पड़ा, ताकि उसकी दौड़ लगाते हुए फुटबॉल मैदान की ओर भागने के क्रम को तोड़ा जा सके।
कभी-कभी बच्चों पर किसी भी नियंत्रण का क्रियान्वयन भी एक बड़ी चुनौती बन जाया करती है। जैसे ही उसे झूले से उतारा जाता, वह हमलोग सभी को गोलबन्द कर रिंग रिंग रोजेज ,,,कविता के उच्चार के साथ गोल गोल वृत्त मेँ दौड़ाने लगता। इसी खेल को खेलते हुए ना जाने कब शाम घिर आई पता ही नहीं चला। साढ़े आठ बजे हमलोग पार्क से वापस लौटे।
क्रमशः





























Tuesday, September 18, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 24 वाँ और 25 वाँ दिन (Day 24, 25)

#BnmRachnaWorld 
#americatourdiary 





27-07-2018, इरवाइन, यू एस ए में 24 वाँ दिन (Day 24),

लॉस एंजेल्स के अतीत पर नज़र डालें, तो हमें सबसे पहला नाम समुद्री यात्री और खोजी (Maritime explorer), Juan Rodriguez Cabrillo का स्मरण आता है, जो 1542 मेँ स्पैनिश सम्राट के आदेश के तहत कैसे Southern California की धरती पर साम्राज्य स्थापित करते हुए, उत्तर की ओर बढते गए और नए स्पेन के लिये नई कालोनी की स्थापना मेँ सतत प्रयत्नशील रहे। उनके बाद सन 1769 में Gasparade Portola और संत फ्रांसिस ऑफ़ असीसी के क्रिश्चियन अनुयायी, जिन्हें Franciscan कहा जाता है, Juan Crespi के साथ लॉस एंजेल्स पहुँचे। 1771 मेँ Franciscan friar Junipero Serra ने Mission San Gabriel Arcangel, जो इस क्षेत्र में ईसाइयत के प्रचार के लिए पहला मिशन था, की स्थापना की।
सबसे पहले 1781 मेँ इस समूह के 44 settlers ने मिलकर "The town of Our Lady the queen of the Angels of Porceuncula " की स्थापना की। आज इस शहर मेँ अमेरिका का सबसे बड़ा रोम कैथोलिक Archido cese है। इन बसने वालों में दो तिहाई अफ्रीकन और स्थानीय तथा यूरोपियन माता पिता की संतानें थी।
यहाँ दशकों तक उनके आवास मैदान में, खेतों मेँ, छोटे-छोटे घरों जैसे ही रहे। आज भी pueblo settlement एक Historical Monument के रूप में लॉस एंजेल्स प्लाजा के रूप में LA के सबसे पुराने सेक्शन में शुमार होता है। यह शहर के केंद्र मेँ स्थित है जो 1781-1821 तक स्पैनिश के अधिकार मेँ, 1821-1847 तक मैक्सिकन के अधिकार मेँ और 1847 के बाद USA काए अधिकार मेँ रहा है।
1850 मेँ जब कैलिफ़ोर्निया USA का हिस्सा बन गाया, LA एक शहर के रूप में विकसित हुआ। 1880-1890 के बीच आबादी 11,200 से 50,400 तक पहुँच गई। जैसे-जैसे शहर बढ़ता गया, ब्यवसायिक और सांस्कृतिक केंद्र यहाँ से दक्षिण की ओर, इस प्लाजा से हटकर, spring स्ट्रीट और main street की ओर बनते चले गए।
प्लाजा और old paeblo (पुराने घरों) के चारो ओर के 44 एकड़ भूमि को ऐतिहासिक पार्क के रूप में विकसित किया गया। इसी मेँ Spring, Macy, Ala meda, Arcadia Streets और Cesar Chavez Boulvard (formerly Sunset Boulevard) स्थित हैं। इस district मेँ Los Angeles Church (1822), Avila Adobe(1818), the Olvera Street Market. और Old Plaza Fire Station (1884) बने हुए हैं। इन सभी पुराने मकानों को सुरक्षित रखते हुए अभी अजायब घरों(Museum) की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
LA के अतीत की इतनी जानकारी देने के बाद मैं बताता चलूँ कि आज आषाढ़ पूर्णिमा है, जिसे हिन्दू गुरू पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। आज ही के दिन महाग्रंथ "महाभारत" के रचयिता ''वेद व्यास' का जन्म हुआ था। इस विशेष दिन को मनाने के लिए हमलोग फिर आज उसी स्टोरनुमा घर के अंदर मूर्तियों की स्थापना कर मन्दिर का रूप दिये गए मन्दिर मेँ गए।
वहाँ गुरू पर्व मनाया जा रहा था। एक तरफ "साईं महाराज, शिरडी वाले" को गुरू के रूप में स्थापित कर उनकी पूजा हो रही थी और घोषणाकार पण्डित जी अंग्रेजी और संस्कृत में उच्चारण कर मन्त्र बोले जा रहे थे। साथ ही पूजा विधि का निर्देश भी दे रहे थे। बीच-बीच मेँ मन्त्रों के संक्षिप्त अर्थ भी बताते चल रहे थे। काफी लोग वहाँ एकत्रित थे। हमलोग 9 बजे तक वहीं रहे। उसके बाद ही घर के लिये वापस चले। 
क्रमशः
28-07-2018, इरवाइन, यू एस ए में 25 वाँ दिन (Day 25)
आज मैं चिन्मय के साथ कार से नज़दीक ही Tustin County मेँ स्थित कार के सर्विस स्टेशन गए। वहाँ भी कार की सर्विसिंग की वही पद्धति है जो हमारे यहाँ के मुख्य ब्रांड के कारों के सर्विस केन्द्रों मेँ होता है। यानि एक सर्विस इंजीनियर द्वारा कार का मुआयना, अर्थात डेंट या खरोंच आदि को चिन्हित किया जाना और उसके बाद ग्राहक से पूछ ताछ कि क्या कोई और भी दिक्कत है, जो कहना चाहते हों। इन सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हमें 1:30 बजे आने को कहा गया। इस निशान का सर्विस स्टेशन काफी बड़ा था। यहाँ 20 कारों की सर्विसिंग एक साथ की जा सकती थी।
हमलोगों के पास डेढ़ घन्टे का समय था, जिसे Tustin के पास ही स्थित बाज़ार केंद्र के घूमने में बिता सकते थे। इसलिए उसी तरफ पैदल ही निकल पड़े। रास्ते मेँ कई कार ब्रांडों जैसे Nissan Infinity, Honda, Toyota जैसे जापानी कारों के साथ Ford, Ford Mustang, Chevrelette, Hyundai, BMW, Volksvagon, Audi, Mercedez Benz, Mazda और Jaguar Range Rover आदि के सर्विस स्टेशन थे। साथ ही यूज़्ड कार के भी सेल्स स्टेशन थे। परंतु वहाँ Suzuki, Mahindra या Tata की ही कोई कार देखी और ना ही किसी मॉडल की कार ही देखी। हाँ, Jaguar Brand जिसे Tata Motors ने खरीद लिया है, उसका सर्विस स्टेशन अवश्य था। मैं चुकिं यहाँ Hyundai की कार चलाता हूँ, इसलिए उसके सर्विस स्टेशन की तस्वीरें उतारीं।
आगे बढकर रोड पार करना पड़ा। पैदल चालकों को रोड पार करने के लिए रोड के किनारे के पोल पर लगे बटन को दबाना पडता है। थोड़ी देर बाद पार करने के निशान के साथ कितना देर में पार करना है, इसका भी डिस्प्ले आता है। अगर आप निर्देशित समय के समाप्त होने पर भी पग चलन पथ पर हैं, तो कोई भी वाहन उसे पार नहीं कर सकेगा।
हमलोग Tustin बाज़ार केंद्र पर पहुँचकर विभिन्न उत्पादों की स्टोर देखे। वहाँ एक पूरा स्टोर सिर्फ खेल सामग्रियों का था। एक स्टोर सिर्फ़ पालतू पशुओं के खाने से लेकर उनके घर आदि खड़े करने के सारे उपकरण मौजूद थे। एक पूरा स्टोर सर्फ वस्त्रों का था। हमलोग Ross मॉल के अंदर गए। बाहर कफ़ी गर्मी थी। अंदर मेँ जाना पहचाना पेय खरीदकर प्यास बुझाने की सोच ही रहे थे, कि पैक्ड नरियल पानी की टेट्रा पैक की बोतल खरीदी। हमलोगों बाहर निकलकर नारियल पानी से अपनी प्यास बुझायी। करीब तीन बजे हमलोग वापस निसान के सर्विस स्टेशन पहुँच गए। करीब 20 मिनट इंतज़ार के बाद कार तैयार
खड़ी थी।
हमलोग वापस आकर खिचड़ी का लुत्फ उठाये। थोड़ी देर विश्राम के बाद अपराह्न करीब 7 बजे Balboa beach Island जाने का विचार हुआ। मौसम आज खुला था, सप्ताहांत भी था, इसलिए इस समुद्री तट की ओर जाने वाले भ्रमणार्थियों की संख्या अधिक थी। बीच के काफी पहले से ही कारों का कारवाँ धीमी गति से बढ़ रहा था।
इस बीच या आइलैंड का नाम Vasco Nunez de Balboa नामक स्पैनिश समुद्री खोजी यात्री के नाम पर पड़ा है। उसने 1513 ई में युरोप के लिए प्रशांत महासागर के मार्ग की खोज की थी। Balboa Island, Newport Beach, California में हार्बर साइड मेँ स्थित एक कम्युनिटी है। यह कंक्रीट से बने चौड़े चलन-पथ से घिरा है, जिसे पैदल चलने वालों के लिए खोल दिया गया था। यह द्वीप तीन कृत्रिम द्वीपों द्वारा बना है, जिसे Newport हार्बर मेँ ही बनाया गया है।
द्वीप का बड़ा हिस्सा, पूर्व की ओर से द्विपथी पुल द्वारा और छोटा छोटे हिस्सों से और छोटा Collins Isle उत्तर-पश्चिम से Balboa से जुड़ा है। वस्तुत: Balboa Island एक कीचड़-मिट्टी भरा दलदली क्षेत्र था, जिसे 1860 ई मेँ James Mc Fadden अपने भाई Robert के साथ खरीदा था। उसने यहाँ की मिट्टी और कीचड़ को हटाकर इसे बड़े घाट (wharf) मेँ तब्दील किया था। तबसे इसे और भी खूबसूरत बीच में विकसित करने मेँ कई लोगों का योगदान रहा और यह पूरा-का-पूरा शहर एक बीच रेसोर्ट के रूप में शैलानियों के लिए आज की स्थिति में पहुँचा।
कार की पार्किंग खोजने में देर हुई। पेड पार्किंग जो एक घन्टे के लिए उपलब्ध था, वहाँ पार्किंग किया गया। पार्किंग के पास से ही लकड़ी के खम्भों पर खड़े बड़े से पुल जिसे pier कहा जाता है, के तरफ बढ़े। यह समुद्र के अंदर तक आधा कि मी तक घुसा हुआ है। हमलोग उस pier से होकर उसके अन्तिम छोर तक गए। अन्तिम छोर पर एक जलपान गृह भी था, जहाँ seafood और शराब के विभिन्न ब्रांडों की उपलब्धता थी। हमलोगों ने उस पुल से शाम मेँ समुद्र की लहरों में शहर की परछाईयों की तस्वीरें लीं।
हवाएँ तेज बह रही थीं और ठंढ भी बढ़ रही थी। इसके बावजूद भी लोग सामने के तट पर समुद्र स्नान का आनंद लेने मेँ मस्त थे। हमलोग 9:30 रात में वापस चले। तबतक ट्रैफिक मेँ भीड़भाड़ कम हो गई थी।
क्रमश:

Wednesday, September 12, 2018

अमेरिका डायरी, 27-07-2018, इरवाइन यू एस ए में 24 वाँ दिन (Day 24)

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#americatourdiary





27-07-2018, इरवाइन, यू एस ए में 24 वाँ दिन (Day 24),

लॉस एंजेल्स के अतीत पर नज़र डालें, तो हमें सबसे पहला नाम समुद्री यात्री और खोजी (Maritime explorer), Juan Rodriguez Cabrillo का स्मरण आता है, जो 1542 मेँ स्पैनिश सम्राट के आदेश के तहत कैसे Southern California की धरती पर साम्राज्य स्थापित करते हुए, उत्तर की ओर बढते गए और नए स्पेन के लिये नई कालोनी की स्थापना मेँ सतत प्रयत्नशील रहे। उनके बाद सन 1769 में Gasparade Portola और संत फ्रांसिस ऑफ़ असीसी के क्रिश्चियन अनुयायी, जिन्हें Franciscan कहा जाता है, Juan Crespi के साथ लॉस एंजेल्स पहुँचे। 1771 मेँ Franciscan friar Junipero Serra ने Mission San Gabriel Arcangel, जो इस क्षेत्र में ईसाइयत के प्रचार के लिए पहला मिशन था, की स्थापना की।
सबसे पहले 1781 मेँ इस समूह के 44 settlers ने मिलकर "The town of Our Lady the queen of the Angels of Porceuncula " की स्थापना की। आज इस शहर मेँ अमेरिका का सबसे बड़ा रोम कैथोलिक Archido cese है। इन बसने वालों में दो तिहाई अफ्रीकन और स्थानीय तथा यूरोपियन माता पिता की संतानें थी।
यहाँ दशकों तक उनके आवास मैदान में, खेतों मेँ छोटे-छोटे घरों जैसे ही रहे। आज भी pueblo settlement एक Historical Monument के रूप में लॉस एंजेल्स प्लाजा के रूप में LA के सबसे पुराने सेक्शन में शुमार होता है। यह शहर के केंद्र मेँ स्थित है जो 1781-1821 तक स्पैनिश के अधिकार मेँ, 1821-1847 तक मैक्सिकन के अधिकार मेँ और 1847 के बाद USA काए अधिकार मेँ रहा है।
1850 मेँ जब कैलिफ़ोर्निया USA का हिस्सा बन गाया, LA एक शहर के रूप में विकसित हुआ। 1880-1890 के बीच आबादी 11,200 से 50,400 तक पहुँच गई। जैसे-जैसे शहर बढ़ता गया, ब्यवसायिक और सांस्कृतिक केंद्र यहाँ से दक्षिण की ओर, इस प्लाजा से हटकर, spring स्ट्रीट और main street की ओर बनते चले गए।
प्लाजा और old paeblo (पुराने घरों) के चारो ओर के 44 एकड़ भूमि को ऐतिहासिक पार्क के रूप में विकसित किया गया। इसी मेँ Spring, Macy, Ala meda, Arcadia Streets और Cesar Chavez Boulvard (formerly Sunset Boulevard) स्थित हैं। इस district मेँ Los Angeles Church (1822), Avila Adobe(1818), the Olvera Street Market. और Old Plaza Fire Station (1884) बने हुए हैं। इन सभी पुराने मकानों को सुरक्षित रखते हुए अभी अजायब घरों(Museum) की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
LA के अतीत की इतनी जानकारी देने काए बाद मैं बताता चलूँ कि आज आषाढ़ पूर्णिमा है, जिसे हिन्दू गुरू पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। आज ही के दिन महाग्रंथ "महाभारत" के रचयिता ''वेद व्यास' का जन्म हुआ था। इस विशेष दिन को मनाने के लिए हमलोग फिर आज उसी स्टोरनुमा घर के अंदर मूर्तियों की स्थापना कर मन्दिर का रूप दिये गए मन्दिर मेँ गए।
वहाँ गुरू पर्व मनाया जा रहा था। एक तरफ "साईं महाराज, शिरडी वाले" को गुरू के रूप में स्थापित कर उनकी पूजा हो रही थी और घोशणाकार पण्डित जी अंग्रेजी और संस्कृत में उच्चारण कर मन्त्र बोले जा रहे थे। साथ ही पूजा विधि का निर्देश भी दे रहे थे। बीच-बीच मेँ मन्त्रों के संक्षिप्त अर्थ भी बताते चल रहे थे। काफी लोग वहाँ एकत्रित थे। हमलोग 9 बजे तक वहीं रहे। उसके बाद ही घर के लिये वापस चले।
क्रमशः 

Sunday, September 9, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए में 22 वाँ, 23 वाँ दिन (Day 22, 23)

#BnmRachnaWorld
#americatourdiary



25-07-2018, इरवाइन यू एस ए में 22वाँ दिन, (Day 22)
Tongva भी यहाँ की रहने वाली एक और प्रजाति है। स्पैनिश यात्रियों द्वारा LA (Los Angeles) की खोज 1542 में हुई थी। उसी समय यहाँ रहने वाली मूलनिवसियों की Tongva प्रजाति से उनका सम्पर्क स्थापित हुआ था। 1771 ई में जब स्पैनिश उपनिवेश के विस्तार को सुदृढ़ करने के लिए Mission San Gabriel Arcangel के तहत ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रचार प्रसार शुरु हुआ, तभी इस प्रजाति से गहन सम्पर्क स्थापित करने की कोशिश शुरु हुई।
इसी समय पुरानी बीमारियों के फैलने की आशंका जताकर Tongva आबादी को जबर्दश्ती दूसरे जगहों पर स्थानांतरित किया जाने लगा। उसी समय 1821 मेँ स्पैनिश शासन विस्तार के विरोध के स्वर के रूप Toypurina नामक स्त्री नेता का उदय हुआ।
वे Tongva-Gabrielino नामक tribe की Native American स्त्री थी, जिसने स्पैनिश मिशनरियों द्वारा कैलिफ़ोर्निया के औपनिवेशिक अधिकार क्षेत्र के बढ़ाने के विरुद्ध एक विद्रोह का नेतृत्व किया था। 1760 मेँ जन्मी Toypurina जब 9 साल की हुई, तब उसने स्पैनिश उपनिवेशवादियों द्वारा Los Angeles Basin मंं पैठ जमाने की शुरुआत हो चुकी थी। धीरे-धीरे Toypurina एक सशक्त आध्यात्मिक गुरु के रूप में उभरी, जिसे उसकी बहादुरी और विद्वत्ता के लिये लोगों के बीच आदर दिया जाने लगा।
वह वक्तृत्व कला मेँ निपुण थी। वह कई स्थानों जहाँ Tongva भाषा का प्रयोग किया जाता था, मेँ काफी लोकप्रिय हौ गई थी। उसकी प्रसिद्धी Santa Catalina Island से San Bernardino Mountains के पूर्वी किनारों तक तेजी से फैलती चली गयी। बाकी अन्य मूलनिवासियों के नेताओं की तरह वह भी स्पैनिश मिशनरियों को मूलवासियों के अस्तित्व के लिए एक खतरा मानती थी। उसने एक नौसिखिये Nicolas Jose के साथ कई गाँवों के लोगों को विद्रोह के लिये और स्पैनिश निवासियों को खत्म करने की नीयत से आक्रमण की योजना बनायी थी। स्पैनिशों मेँ एक सिपाही जो स्थानीय लोगों की भाषा को समझता था, उसने स्पैनिशों को इस विद्रोह के बारे में आगाह कर दिया। आक्रमण की रात को Tongva मूलवासी Native Americans तीरों से लैस होकर स्पैनीशों पर आक्रमण के लिए आगे बढ़ रहे थे। Toypurina बिना कोई हथियारों के वहाँ लोगों की हौसला-अफजाई के लिये आयी थी, लेकिन उसे और अन्य तीन अगुआई कर रहे लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद Toypurina का क्या हुआ? आगे,,,


26-07-2018, इरवाइन यू एस ए में 23 वाँ दिन, (Day 23)

मित्रों, कल की कहानी के बाद:
Tongva मूलवासियों द्वारा विदेशी settlers के विरुद्ध विद्रोह की अगुआई करने वाली महिला Toypurina और उसके एक और साथी Nicolas Jose को स्पैनिश सेना द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मिलिट्री बोर्ड के सामने प्रस्तुत किया गया। उसके सामने उन्न्होने कहा, "हाँ, मैने अपने समुदाय के लोगों को कहा था कि मैं उन सारे लोगों के ऊपर क्रोधित हूँ जो हमारे पुरखों की जमीन पर अनाधिकार कब्जा कर बैठे हैं। " उससमय के गोवर्नर Pedro Fages ने Toypurina और Nocoles Jose को विद्रोह के नेतृत्व करने का दोषी पाया। उसे निष्काषित करने की सजा दी गयी थी। बाद में जब उसने ईसाइयत स्वीकार कर लिया, तो उसे यहाँ रहने की इजाजत मिली। फिर भी स्थानीय मूलवासी इण्डियन द्वारा स्त्रियों पर इसाई मिशनरियों द्वारा किए गए अत्यचार, भोजन के श्रोतों को बिनष्ट किए जाने और सबसे मुख्य उनकी जमीन पर बाहरियों के अनाधिकार प्रवेश और प्रवास के विरुद्ध किए जाने वाले विरोध के लिये उनका नाम जाना जायेगा।
Toypurina के 1787 में क्रिश्चियन baptism के बाद उनका नाम Pedre Miguel Sanchez, of Rezina (माने रानी या queen), हो गया। दौ वर्षों बाद Manuel Montero नामक स्पेनिश सोल्ज़र से शादी करने पर गोवर्नर द्वारा उसे जमीन मिली। उन्हें बाद मेँ तीन बच्चे हुए। मिशन का कार्य करते हुए ही 1799 मेँ Alta California में 39 साल की अल्प आयु मेँ उनकी मृत्यू हो गई। उसकी अपनी जिन्दगी मेँ ही LA क्षेत्र में कुपोषण और बाहर से आई बीमारियों के कारण, Tongva tribe वालों की संख्या 5000 से घटकर 1500 रह गई।
ऐसी ही बहुत सी कहानियाँ हैं, जो स्थानीय नस्ल और आबादी के ऊपर बाहरी उपनिवेशवादियों के अधिकार के विस्तार का बयाँ करती हैं।
इसतरह आपने देखा कि Native Americans का ईसाई मिशनरियों द्वारा सभ्यता के विकास के नाम पर उनको दी जाने वाली सुविधाओं के एवज मेँ उनका धर्म धारण करवाया गया।
क्रमश:

Wednesday, September 5, 2018

एकलब्य कह रहा,,,(कविता)

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#poemmotivational














एकलब्य कह रहा

एकलब्य कह रहा,
अपने गुरु से:
मैं समझता हूँ
उस गुरु की वेदना को,
अंतर्द्वंदों में छलनी होती
टूटते सिद्धान्तों और आचार संहिताओं की
विवशताओं से निर्धारित होती
जीवन यापन की परिकल्पना को।

जिस गुरु को अपनी ही संतान के लिए,
आंटे के घोल को रंग दे सफ़ेद
आभास देना पड़ा हो दुग्धपान के लिए।
जिस गुरु को सर्वश्रेष्ठ धनुर्विद्या में
निष्णात होने के उपरांत भी,
अपनी संतान को पिलाने को दूध,
मांगनी पड़ी हो अपने ही परम मित्र से,
कम - से - कम एक गाय की भिक्षा।
जिसे अपमान का दंश
विवशताओं के विषदंत
के बीच देनी पड़ी हो
परिवार के पालन की घोर परीक्षा।

उस गुरु के दरबारी गुरु
में बदल जाने में बहुत कुछ
भीतर - भीतर मरा है।
बहुत कुछ भीतर- भीतर
मारना पड़ा है।
जिसे नृप के अन्न से अपने
परिवार को पालकर
गुरुकुल चलाने की विसंगति
को झेलना पड़ा है,
जिसे न चाहकर भी
नृप परिवार के कुशल, अकुशल
उद्दंड, उच्छ्रंखल संतानों को
शिष्यरूप में स्वीकारना,
भाग्य की विडंबना हो।
उसे किसी  राजपरिवार के समर्पित,
निष्ठावान संतान को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर
बनाने की विवशता मैं समझ
सकता हूँ गुरुदेव।

आपने अपनी आत्मा के हवनकुंड में,
अपनी सांसों के साथ
हवन किया है अपने आत्मसम्मान का।
वरना आप भी महर्षि हरिद्रुम गौतम की तरह
एक सत्यभाषी बालक
जिसे अपनी माता के अतिरिक्त
पता नहीं उसका पिता कौन?
उसकी माता अपनी युवावस्था में कई
पुरुषों के संपर्क में आई
या थी लाई गई।
पुराण और उपनिषद है मौन।
उस बालक की सत्यता ही
थी उसका ब्राह्मण और ब्रह्मचर्य
होने का प्रमाण।

मैंने अपने समर्पण और निष्ठा
के बीच नहीं आने दी
महत्वाकांक्षा की विकृति को,
आपके प्रति सत्यता और एकाग्रता
ही थी आपके लिए मेरी आहुति
और हर सांस में व्रत और सम्मान।
क्या यही नहीं था मेरे ब्रह्मचर्य
और ब्राह्मण होने का प्रमाण?

आपने तो सिर्फ मेरा अंगूठा मांगा,
आप अगर मेरा यौवन, पौरुष, निष्ठा और
पूरा जीवन भी मांगते
तो आपके चरणों में समर्पित कर
देता अपनी सांस-सांस, प्राण-प्राण।
मुझे जितनी आत्मसंतुष्टि मिलती
शायद उतनी अभी नहीं मिल रही।
आप तो गुरु दक्षिणा लेने में भी
कृपणता और संकोच से घिर गए गुरुदेव।
इसका मलाल मुझे जीवन पर्यंत रहेगा,
मेरे गुरु ने गुरुदक्षिणा भी ठीक से नहीं मांगी।
मैं हतभाग्य शिष्य उन्हें
संतुष्ट भी नहीं कर सका।
संतुष्ट भी नहीं कर सका,
देकर मात्र अंगूठे का  दान...!

©ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र
दिनांक: 2-06-2017
वैशाली, सेक्टर4, दिल्ली एन सी आर।

नोट: महाभारत में वर्णित एकलब्य के प्रसंग की जब समीक्षा होती है, तो हर द्रष्टा को द्रोण के द्वारा गुरुदक्षिणा में  एकलब्य का अंगूठा मांग लेना ही दिखता है। इससे सीधा गुरु द्रोण का वह पूर्वाग्रह जुड़ा हुआ लगता है, जिससे वह अपने प्रिय शिष्य अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर के रूप में स्थापित कर सकें। यहां इस कविता में एकलब्य, गुरु की विवशता के बारे में सोचता है, और बार-बार सोचता है। जब कोई धनुर्विद्या में निष्णात धनुर्धारी का पुत्र दूध के लिए बिलबिलाता है, तो उसके सारे सिद्धान्त और सामाजिक निष्ठाएं एक-एक कर धराशायी होने लगती हैं। एकलब्य अंगूठा दान के पहले गुरु की इस स्थिति को कैसे भांपता हुआ ब्यक्त करता है, आप देखें।
इसमें छान्दोग्य उपनिषद में वर्णित एक सत्यविद शिष्य सत्यकाम जाबाल की भी चर्चा है, जिसे ऋषि हरिद्रुमता गौतम ने सत्यभाषण के लिए उसे ब्राह्मण और ब्रह्मचर्य घोषित किया। जाबाली की माता का संबंध कई पुरुषों से था। कौन उसका पिता था, उसकी  माता नहीं जानती थी। इस सत्य को सीधे उसने गौतम ऋषि को बताया। गौतम ने उसकी सत्यनिष्ठा के कारण उसका नाम सत्यकाम रखा और उसे शिष्यवत अपने गुरुकुल में उसकी शिक्षा दी।
इस कविता का पाठ मैने "पेड़ों की छाँव तले रचना पाठ" के तत्वावधान में वैशाली सेन्ट्रल पार्क , दिल्ली एन सी आर मे आयोजित काव्य गोष्ठी में किया था, जिसका यू टयूब वीडियो का लिन्क नीचे दे रहा हूँ। इसमें शुरु में माँ दुर्गा की वन्दना है, उसके बाद इस कविता का पाठ है। ओडियो थोड़ा मद्धम स्वर में है, इसलिये ईयर फोन या हेड फोन लगाकर सुनें तो ज्यादा आनन्द आयेगा:

https://youtu.be/cdEyJlreS0o

Tuesday, September 4, 2018

अमेरिका डायरी, इर्वाइन, यू एस ए में 20 वाँ और 21 वाँ दिन ( Day 20, 21)

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23-07-2018, इरवाइन, यू एस ए में 20 वाँ दिन (Day 20)
आज सुबह की सैर पर नहीं जा सका। आज कुछ खास करने के लिए नहीं था, तो सोचा क्यों नहीं लॉस एंजेल्स के बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करने की कवायत की जाय।
लॉस एंजेल्स अमेरिका का न्यू यॉर्क के बाद दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला शहर है।
ऐतिहासिक दृष्टि से लॉस एंजेल्स 1542 में स्पेन यात्री Juan Rodriguez Cabrillo द्वारा पता लगाया गया था। यह Alta California के अन्य जगहों के साथ क्लेम किया गया था। यह शहर 1781 में स्पेनिश गोवेर्नर Falipe de Neve ने अधिकारिक तौर पर इसकी स्थापना की थी। 1821 में Maxican War of Indipendence के बाद यह मैक्सिको का हिस्सा बन गया। इसके बाद मैक्सिकन-अमेरिकन वार हुआ जिसमें लॉस एंजेल्स और कैलिफ़ोर्निया के अन्य हिस्से Treaty of Guadalupe Hidalgo के अन्तर्गत यूनाईटेड स्टेटस ने इसे कैलिफोर्निया के साथ मैक्सिको से खरीद लिया। इसतरह यह अमेरिका का हिस्सा बन गया।
Pre Colonial Period:
यहाँ स्पेनिश समुद्री यात्रियों के आने के पहले यहाँ के मूलवासियों को Chumash कहा जाता था। वे Native American कहलाते हैं। वे अभी के उत्तर के Morro Bay में स्थित San Luis Obispo, Santa Barbara, Ventura और Los Angeles से लेकर दक्षिण में Molibu तक में निवास करते हैं। (विकीपेडिया से प्राप्त तस्वीर यहाँ साभार सन्लग्नित है)
मूलवासी यहाँ के समुद्री तट के आसपास ही रहते आये हैं। उनके लिए भोजन की ब्यवस्था समुद्री जीवों से हो जाया करती थी। यह क्षेत्र अत्यधिक ठंढा प्रदेश नही है। इसलिए भोजन की ब्यवस्था हो जाने पर उनका जीवन यापन अधिक कठिन नहीं था। कहा जाता है कि वे इसा पूर्व 13000 वर्षों से यहाँ रहते आ रहे है। भूमध्यसागरीय जलवायु भी उनके जीवन को संचालित करने में मददगार ही रहे होंगें।
क्रमश:
24-07-2018, इरवाइन, यू एस ए, 21 वाँ दिन (Day 21)
कल की डायरी के पन्ने में मैने लॉस एंजेल्स के Pre Colonial Preiod पर दृष्टिपात किया था। हम यहाँ जानेंगें कि बाहर से आनेवाले समुद्री यात्रियों ने यहाँ के मूलवासियों (Chumash)
के साथ मिलकर कैसे यहाँ की मिलिजुली सभ्यता का विकास किया।
युरोप से आये maritime sailors ने अपने देश की विस्तारवादी और उपनिवेशवादी नीतियों के तहत यहाँ कोलोनियों की स्थापना और उनका विकास शुरु किया। अगर हमलोग 1771 के पहले की बात करें तो इसे pre colonial era, जो स्पैनिश/पुर्तगाली समुद्री यात्रियों के आने का समय कहा जायेगा।
समुद्री यात्री और खोजी पुर्तगाली या स्पैनिश (उनकी जन्मभूमि पर अभी भी विवाद है) Juan Rodiriguez Cabrillo (1542) दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया को स्पैनिश साम्राज्य को अधिकार क्षेत्र में ला चुके थे। Gaspar de Portola, जो स्पैनिश अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कमाण्डर के तौर पर नियुक्त किए गए थे, ने San Diego पर अपना अधिकार स्थापित कर आगे उत्तर की ओर बढ़ने का निर्णय लिया। Portola अपने अभियान में जब चलते थे, तो उनके दल के घोड़े भी पाँव तक चमड़े के आवरण से ढँके रहते थे, ताकि रास्ते के झाड़ झन्खाड़ और काँटों से घोड़े घायल नहीं हो जाँय। वे शायद पहले यूरोपियन थे, जिन्होने San Franscisco Bay को देखा था। वे Baja California Pennisuala (San Diego से दक्षिण), जो Mainland Maxico से Gulf of California और Colorado नदी से अलग किया जाता है, चार मरुस्थलों San Felipe, Central Coast Desert, Vizcaino Desert और Magdalina Plain Desert से घिरा है।
कैलिफ़ोर्निया का क्षेत्र युरोप और पूरे संसार के लिए एक पहेली की तरह था। स्पेनिश लेखक Garci Rodriguez de Montalao के 1510 ईस्वी में लिखे रोमांटिक उपन्यास में Island of California को Indies के पश्चिम मे पृथ्वी के स्वर्ग के रूप में वर्णित किया गया है, जहाँ कृष्णवर्ण, गठीले बदन और सुपुष्ट वक्षों वाली सुंदरियाँ अकेली ही रहती थी। उनके साथ कोई भी पुरुष नहीं रहता था। वे Amazons की तरह रहती थीं, जो योद्धा थीं, आक्रामक और पाशविक थीं और युद्ध करना जिनके लिए खिलवाड़ की तरह था।
उन्हीं की पुस्तक की कहानियों से प्रभावित होकर और पृथ्वी पर स्वर्ग की खोज में Hernan Cortes ने उस स्वर्ग की खोज में कई यात्राएँ की, जिसमें क्यूबा और और बाद में Gulf of California की खोज की। बाद में उसने देखा कि कैलिफ़ोर्निया एक pennisula है। उसने उत्तर की ओर की धरती का नाम Las Carlifornia रखा जिसमें अभी के Baja California और Alta California शामिल थे। उसी क्षेत्र में आजकल California, Nevda, Utah, Arizona, Colorado और Wyoming के कुछ क्षेत्र आते हैं।
क्रमश:

Thursday, August 30, 2018

अमेरिका डायरी, इरवाइन, यू एस ए, 19 वाँ दिन (Day 19)

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22-07-2018, इरवाइन, यु एस ए 19 वाँ दिन (Day 19)
आज पोते ऋषभ, पत्नी, चिन्मय और पुत्र वधु के साथ सोसायटी कैम्पस के अंदर ही, तरण-ताल (Swimming pool) जाना हुआ। ऋषभ अपने लाइफ जैकेट के साथ ताल में घुस गया। पीछे-पीछे चिन्मय को भी उतरना पड़ा। पत्नी भी ताल में उतरी। उससमय दिन के 12 बज रहे थे। मैं किनारे की टेबल पर बैठा ताल के नीले जल में उनलोगों की और खासकर ऋषभ की जल कीड़ा देखता रहा। कुछ और बच्चे भी ताल में कूदकर जल-क्रीड़ा कर रहे थे। उन्हें खुश देखकर मुझे भी खुशी हो रही थी। ऋषभ ताल से निकलना नहीं चाह रहा था। काफी रो रहा था। एक तरह से जबर्दस्ती ही उसे वहाँ से निकालकर घर लाना पड़ा।
दोपहर के भोजन और थोड़ा  विश्राम के बाद हमलोगों का Chino Hills स्थित BAPS ( Bochasanwasi Shri Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha) द्वारा संचालित स्वमीणारायण मन्दिर जाना हुआ। हमलोग यहाँ से 5:20 बजे अपराह्न कार द्वारा Chino  Hills के लिए प्रस्थान किए। मैं, पत्नी, चिन्मय, बहू और पोता ऋषभ सभी साथ में चले। ऋषभ कार के  पीछे के एक स्पेशल बेबी सीट पर विराजमान थे। यहाँ बच्चे को अलग बेबी सीट पर बैठाकर सीट बेल्ट लगाकर ले जाना कानूनी रूप से जरूरी है, जिसका सभी पालन करते है। चिनो  हिल्स यहाँ से करीब 35 कि मी की दूरी पर दक्षिण-पश्चिम दिशा में Bernadino County, South California में स्थित है। यह मन्दिर हर धर्म और पंथ के लोगों के दर्शन के लिए खुला रहता है।
चौड़ी-चौड़ी सात-सात लेन  वाली सड़कों  से होते हुए, कई फ्लाई ओवर से गुजरते हुए वहाँ 7:10 बजे अपराह्न  पहुँचे। रास्ते में कई फोटोग्राफ और विडियो भी लिए। रास्ते पहाड़ों से होकर गुजर रहे थे। पहाड़ कम उँचे थे और उनपर हरियाली कम ही थी। धूप में गर्मी थी और भागते पहाडों के बीच से होते हुए रास्तों से नजारों का अवलोकन रोमांच भरा था। मन्दिर की पार्किंग में  गाड़ी खड़ी करके हमलोग मन्दिर के  प्रांगण की ओर बढ़े। भब्य लाल पत्थरों  से बना मन्दिर सूर्य की रश्मियों में दूर से ही चमक रहा था। जूते बाहर उतार कर मन्दिर के प्रांगण में  पहुँचते ही एक अनिर्वचनीय प्रशांति और निरभ्रता मिश्रित आध्यात्मिक अनुभूति का अहसास हो रहा था।
मन्दिर हिन्दुओं का पूजा स्थल होता है, जहाँ आध्यात्मिक शान्ति, ध्यान का केन्द्रीकरण और उर्जा का संचरण प्राप्त होता है। यह सामजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक क्रियाकलापों का जीवन्त केंद्र होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मन्दिर नदियों के मिलन स्थल, नदी के  किनारे, सरोवर के किनारे, पहाड़ों के ऊपर वृक्षों से घिरे वादियों में  बनाया जा सकता है। मन्दिर में अर्ध मंडप, मंडप, महामंडप, पूर्व गर्भगृह, गर्भगृह, प्रदक्षिणा, गुम्बद और ध्वज मुख्य अंग होते हैं।
यह मन्दिर दुनिया का पहला भूकम्प अवरोधी (Earthquake resistant) मन्दिर है। इसका निर्माण कार्य सितम्बर 2005 में शुरु हुआ और 2012 में पूर्ण हुआ। 20 एकड़ की जमीन पर बने इस मन्दिर में सांस्कृतिक केंद्र, जिम्नाजियम, योग तथा ध्यान के अभ्यास के लिये क्लास रुम है। प्रांगण में 91 फीट के कमल के आकार का सरोवर भी है। इसमें अनुमानत: 900 भारतीय-अमेरिकियों की दूसरी पीढी के स्वयंसेवकों सहित 1.3 मिलियन श्रम घन्टे इस मन्दिर के निर्माण में ब्यतीत हुए। यह मन्दिर सौर उर्जा द्वारा विद्युत उत्पादन कर पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाओं को भी कम करने में अपना योगदान दे रहा है। इस सौर उर्जा से करीब 1556 टन CO2 उत्सर्जन जो 62,244 वृक्षों को 25वर्ष तक लगाने के बराबर होता है, कम करता है।
इस मन्दिर के इतिहास पर अगर नजर डालें तो पता चलेगा कि शुरुआती दौर में इस मन्दिर के लिए जमीन प्राप्त करने में यहाँ के निवासियों को आश्वस्त करना कठिन कार्य था। साथ ही यहाँ के स्थानीय पंचायत या म्युनिसिपलिटी से भी समर्थन प्राप्त करना आवश्यक था। BAPS प्रमुख स्वामी महाराज के हर वर्ष यहाँ आगमन से मन्दिर निर्माण के प्रयास को बल मिलता रहा। जमीन के लिये Chino  Hills के 71 नम्बर की फ़्री वे के पास की जमीन की अनुशंसा स्वामी महाराज ने की थी। वहाँ के उससमय के मेयर लार्सन ने इसलिए विरोध किया था कि चिनो  हील्स के छोटे से कम्युनिटी में क्यों इस तरह का एक केंद्र स्थापित किया जाय, जहाँ शैलानियों का आना जाना बढ़ जायगा, जिससे आतंकी गतिविधियों की भी आशंका हो सकती है। बाद में स्वयंसेवकों द्वारा स्थानीय लोगों को आश्वस्त करने के  बाद उनका इस मन्दिर के निर्माण के लिए लिया गया, जिसमें उन्होने इसके लिए सहमति दी। इसके बाद ही मन्दिर का निर्माण कार्य आरम्भ हो सका। इन्हीं चर्चाओं के दौर में मन्दिर की अधिकतम ऊँचाई 78 फीट तय कर दी गयी।
इस मन्दिर का निर्माण 900 स्वयमसेवकों द्वारा सन 2004 में शुरु किया गया। इसमें करीब 35000 इटालियन Carraraa marble और Indian Pink Sandstone के प्रस्तर खंडों को हाथ से काटकर और छील कर बारीक नक्काशी की गयी। इसमें 5 शिखर, कन्गूरा या कलश (pinnacle), 2 बड़े गुंबद, 4 बाल्कोनी, 122 स्तम्भों और 129 महराब (archways), स्थित हैं। बाहरी दीवारों से लेकर भीतरी स्तम्भों (pillars), और छतों (ceillings) में सूक्ष्म नक्काशी किए हुए प्रस्तर-खण्ड लगे हैं। करीब 6600 हस्त शिल्पियों द्वारा की गयी नक्काशी में प्रेरणा, समर्पण और आस्था के साथ ऐतिहासिक तथ्यों को सूक्ष्मता से उकेरा गया है। इन सारे प्रस्तर खंडों को हिदुस्तान में बनाया गया और उसे अच्छी पैकिंग  में डालकर, यहाँ जहाज द्वारा लाया जाकर,  असेम्बल किया गक़या।
हमलोग मन्दिर के मुख्य द्वार से अंदर पूर्व मंडप और मंडप से होते हुए गर्भगृह के सामने पहुँच गए। स्तम्भों की नक्काशीदार प्रस्तर खंडों को पारदर्शी शीशे के आवरण मनुष्य की उँचाई, यानि करीब सात फीट तक ढंक हुआ है, ताकि लोग पत्थरों को हाथों से छूकर मलिन न कर दें। मन्दिर के अंदर कैमरा का प्रयोग वर्जित था, इसलिए अंदर की तस्वीरें नहीं ली जा सकीं। मन्दिर के अंदर शान्त वातावरण था। वहाँ राम-सीता, राधा-कृष्ण, शिव पार्वती की प्रतिमाओं के अतिरिक्त परमपूज्य स्वामीनारायण की मूर्ति मुख्य स्थान पर तथा अन्य स्थानों पर उनके अन्य उत्तराधिकारियों की मूर्तियाँ लगी थी। हमलोग 7:10 में शाम की ( हालांकी उससमय काफी रोशनी थी) आरती में शामिल हुए। सभी लोग पक्ति बद्ध होकर वहीं कार्पेट पर बैठे रहे। आठ बजे तक संस्कृत काए श्लोकों और गुजराती में आरती होती रही। स्वयंसेवक शान्ति बनाये रखने काए लिए इशारे करते रहे। आरती सब ओर दिखाये जाने के बाद, सभी भक्तों के सामने लायी गयी। हमलोगों ने भी आरती ली। कई लोग डालर में दान भी दिये।
वहाँ से हमलोग मन्दिर के निचले तल में गए। वहाँ मन्दिर काए बारे में एक प्रृदर्शिनी लगाई हुयी थी। इसमें मन्दिर के निर्माण से लेकर अबतक की कहानी चित्रों द्वारा दर्शायी गई थी। इसमें मन्दिरों के निर्माण के वास्तु शिल्प के बारे में भी बताया गया था। इसमें मन्दिर का महत्व, मूर्ति काए अभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती काए महत्व काए बारे में दृश्य-श्रब्य माध्यम से टी भी स्क्रीन पर दिखाया जा रहा था। सबकुछ निश्चित पद्धति काए अनुसार सिलसिलेवार ढंग से प्रदर्शित किया गया था। मन्दिर में लम्बी पक्तियाँ और आपाधापी तथा शोरगुल का अभाव था, जिसे हमलोग भारत के मन्दिरों में देखते रहे हैं। पूरा वातावरण अद्भूत नीरवता और संपूर्णता लिए हुए था। हमलोग 8:30 बजे वापस चले तो हल्की-हल्की रोशनी भी थी। बाहर के जलपान गृह में हिन्दुस्तानी और गुजराती मिठाइयाँ सहित ढोकले सजे हुए थे। हमलोग श्रीखंड खरीदे। वहाँ से 9 बजे चलकर 45 मिनट में  वापस घर आ गए।
क्रमश:

कुटिल प्रवृत्ति के कर्मचारी गण (कहानी )

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